'विश्व पुस्तक मेला 2020‘ के अंतिम दिन पुस्तक प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी


 'विश्व पुस्तक मेला 2020‘ के अंतिम दिन पुस्तक प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी

विश्व पुस्तक मेला 2020 के अंतिम दिन बच्चे, युवा और बुजुर्गों की भारी भीड़ ने अपनी पसंद की पुस्तकों को खरीदने के लिए अपने-अपने पसंदीदा स्टालों में जम कर खरीदारी की। देर रात तक प्रवेश द्वार 1 व 10 पर लंबी कतारें देखी गईं। नौ दिनों तक चले इस मेले को लगभग दस लाख से अधिक लोग देखने आए। इस भारी भीड़ के बीच प्रगति मैदान के विभिन्न मंडपों में कई साहित्यिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। किताबों के इस त्यौहार के 28वें संस्करण का आज विधिवत् समापन हो गया।

 

थीम पैवेलियनः-

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2020 के अंतिम दिन थीम मंडप में ‘मैथिली मचान‘ और ‘राष्ट्रीय पुस्तक न्यास‘ के संयुक्त तत्वावधान में ‘मैलोरंग‘ संस्था द्वारा पद्मश्री डॉ. उषा किरण खान द्वारा रचित मैथिली नाटक ‘एक मुठिया‘ का नाट्î-पाठ किया गया। इस अवसर पर उषा किरण खान के साथ मैथिली की प्रख्यात लेखिका डॉ. सविता झा खान भी उपस्थित थीं। मैलोरंग के संस्थापक प्रकाश झा व साथी कलाकार ऋषि मुकेश, ऋतु झा, ज्योति झा, राजीव रंजन, मनु कुमार, विवेक कुमार, संजीव कुमार मायानंद झा, कंचन, हर्ष और रवि ने मैथिली गीतों की संगीतमय प्रस्तुति से इस नाट्य-पाठ को जीवंत बना दिया।

 

डॉ. उषा किरण खान द्वारा रचित यह मैथिली नाटक ‘दरभंगा‘ में सन् 1919 में स्थापित गांधी आश्रम की स्थापना के बहाने गांधी के विचारों की सुदूर गाँव तक पहुँच को दर्शाता है। गांधी जी का दर्शन आम जनता का दर्शन है। उनके विचार आम जनता के लिए हैं, जिसे इस नाटक में प्रभावी तरीके से दर्शाया गया है। कार्यक्रम के अंत में ‘मैथिली मचान‘ और ‘मधुबनी रेडियो‘ द्वारा आयोजित मैथिली कहानी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।

 

 

बाल मंडपः-

पुस्तक मेले में आज की गतिविधियों की शुरुआत बाल मंडप में  ‘द लिटिल गर्ल‘ नामक एक कहानी वाचन कार्यक्रम से हुई। श्री विकास दवे और सुश्री मंजरी शुक्ला ने बच्चों के साथ बातचीत की और दिलचस्प कहानियां सुनाईं। इन कहानियों के माध्यम से उन्होंने उन संघर्षों को उजागर करने की कोशिश की जो एक बच्ची अक्सर झेलती है।सत्र का आयोजन राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा किया गया।

 

बाल मंडप में एक दूसरे कार्यक्रम में भाषाओं के महत्व को सामने लाने के लिए बच्चों एक गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अंग्रेजी, हिंदी के साथ-साथ संस्कृत और उर्दू में प्रेरक पंक्तियों का पाठ किया। ‘मंथन सम्पूर्ण विकास केंद्र‘ से बड़ी संख्या में बच्चों ने भाग लिया। सत्र का आयोजन ‘दिव्य ज्योति जागृति संस्थान‘ द्वारा किया गया।

 

‘चेतना इंडिया‘ द्वारा प्रदुषण की समस्या पर एक लघु नाटिका का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत ‘चेतना इंडिया‘ के एक छात्र ऋषभ ने की। उन्होंने एक पारंपरिक लोक गीत गाया जबकि पुलकित जैन ने एक कहानी सुनाई। यह नाटक उन उपायों  के इर्द-गिर्द घूमता है जो प्रदूषण को कम करने के लिए उठाए जा सकते हैं। यशपाल ने पेड़ लगाओ का संदेश देते हुए एक कविता पाठ किया।

 

‘जीवन बुक्स‘ की निधि कुंद्रा ने रंगमंच की सामग्री द्वारा कहानी वाचन सत्र का आयोजन किया। उन्होंने बच्चों को एक ब्राह्मण पर आधारित कहानी के लिए पात्र बनाने और कहानी बनाने का आह्वान किया। नकाबपोश बच्चों ने पात्रों को अच्छी तरह से निभाया व कहानी लेखन किया। ‘राजीव गांधी फाउंडेशन‘ और ‘वंडररूम‘ द्वारा  संयुक्त रूप से एक युवा कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। युवा बच्चों ने बचपन, सितारों, प्रकृति और अन्य विभिन्न विषयों पर कविताएं पढ़कर खुद को अभिव्यक्त किया। प्रतुल वशिष्ठ ने कहा कि बच्चे कविताओं के माध्यम से अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं।

 

ऑथर्स काॅर्नरः-

डॉ. अनूप मिश्रा द्वारा लिखी गई किताब ‘डायबिटीज विद डिलाइट‘ पर एक चर्चा ‘ब्लूम्सबरी पब्लिश्ंिाग द्वारा ऑथर्स कॉर्नर के हॉल नंबर 8 में आयोजित की गई। इस अवसर पर वक्ताओं में प्रवीण मिश्रा, आलोक मेहता, सत्यदेव पचैरी और सुमन उपस्थित थे। आलोक मेहता ने टिप्पणी की कि यह पुस्तक एक प्राइमर है इसमें वे  सभी जानकारियां हंै जिनकी मधुमेह के किसी भी रोगी को कभी भी आवश्यकता पड़ सकती है। डॉ. अनूप मिश्रा ने कहा कि उन्होंने मधुमेह की समस्या के अंतराल और विकारों को भरने की कोशिश की है। इसमें दी गई अतिरिक्त जानकारी से रोगियों को रोग-जनित चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी।

 

‘रीडोमैेनिया प्रकाशन द्वारा ‘भारत में महिला लेखन‘ पर एक चर्चा सत्र आयोजित किया गया। चर्चा भारत में नारीवाद के उद्भव पर केंद्रित थी। वक्ताओं ने उन संघर्षों के बारे में बात की जो महिलाओं को अपने जीवन में महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय करने पड़ते  हैं। इस अवसर पर महिला लेखिका डॉ. हर्षाली सिंह, अनुपमा जैन और तृप्ति शरण ने आगंतुकों के साथ बातचीत की और महिला लेखन पर अपने विचार साझा किए।

 

लेखक मंचः-

राष्ट्रीय पाक्षिक पत्रिका ‘चाणक्य वार्ता‘ द्वारा पुस्तक परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसके अंतर्गत वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मीनारायण भाला की ‘राष्ट्रीय पुस्तक न्यास‘ से प्रकाशित पुस्तक ‘हमारा संविधान:  भाव एवं रेखांकन‘ के विविध पक्षों पर बातचीत की गई। पद्मश्री डॉ. श्याम सिंह शशि की अध्यक्षता में सम्पन्न

 

 

जारी......

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. गोविंद प्रसाद शर्मा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय हिंदी निदेशालय के अध्यक्ष प्रो. अवनीश कुमार मौजूद थे। कार्यक्रम में वक्ता के रूप में पत्रिका के संपादक डॉ. अमित जैन, डॉ. विनोद बब्बर, श्री विष्णु गुप्त, डॉ. प्रमोद दुबे तथा श्री कुलदीप त्यागी उपस्थित थे। श्री हरीश जैन ने कार्यक्रम का संचालन किया। 

 

‘लेखक मंच पर ‘नयी पुस्तकों पर परिचर्चा’ की कड़ी में ‘भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला’ द्वारा सात पुस्तकों का लोकार्पण एवं उन पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इन पुस्तकों के लेखक हैं- डॉ. ज्योति सिंह,  सौम्या शर्मा, विजय शंकर वर्मा  जे.सी. शर्मा, इनाक्षी रे मित्र, अरुण कुमार तथा प्रो. पारुल मुखर्जी । इस कार्यक्रम संचालन अखिलेश पाठक ने किया।

 

‘पुस्तक पर चर्चा’ के सत्र में ‘दास पब्लिकेशन’ से प्रकाशित तीन पुस्तकों डॉ. सिद्धार्थ की ‘सावित्रीबाई फुले की जीवनी’, कँवल भारती द्वारा अनूदित प्रो श्यामलाल की ‘डॉ. अम्बेडकर और वाल्मीकि समाज’ तथा पूजा रॉय की ‘आधी आबादी का दर्द’ का लोकार्पण किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता शांतिस्वरूप बोध’ ने की तथा वक्ता के रूप में रमेश भंगी, डॉ. कौशल पावर, पूजा राय तथा रामू सिद्धार्थ उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अशोक दास ने किया।

 

शब्द उत्सव एवं राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा ‘साहित्य की नजर में संगठक की कहानी: श्री दत्तोपंत ठेगड़ी- जीवन और दर्शन’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में वक्ता के रूप में ‘स्वदेशी जागरण मंच’ के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी महाराज, भारतीय मजदूर संघ के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अमरनाथ डोगरा उपस्थित थे। कार्यक्रम में ठेगड़ी जी के जीवन के विविध पहलुओं पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का संचालन आलोक गोस्वामी और श्री प्रफुल्ल केतकर ने संयुक्त रूप से किया।

 

‘विश्व हिंदी साहित्य परिषद’ द्वारा ‘शरद काव्य उत्सव एवं लोकार्पण समारोह’ का आयोजन किया गया। इस आयोजन में डॉ. रवि शर्मा, शशि पांडे, डॉ. राझी रमन, कृष्ण नागपाल, इंदरजीत शर्मा, हरेंद्र प्रताप, डॉ. राजेश श्रीवास्तव, डॉ. रवि शर्मा तथा हर्षवर्धन आर्या उपस्थित थे। कार्यक्रम में विश्व हिंदी साहित्य परिषद से प्रकाशित कृष्ण नागपाल की ‘आईना तो देखो जरा’ तथा काव्य प्रकाशन से राज हीरमन की ‘आओ न बैठो मेरे पास’ पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का संचालन आशीष कंदरे ने किया।

 

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अब PHD करना हुआ असान, UGC करने जा रही ये बलदाव


अब PHD करना हुआ असान, UGC करने जा रही ये बलदाव

देश में शिक्षा को सुधारने के लिए सरकार एक नये प्लान पर विचार कर रही है. इससे खासकर PHD करने वाले स्टूडेंट्स को अधिक लाभ मिलेगा और समय की बचत होगी. दरअसल, देशभर की तमाम यूनिवर्सिटीज के यूजी प्रोग्राम्स की अवधि 3 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष करने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन इस मामले पर विचार कर रहा है. अगर ऐसा होता है तो छात्र पाठ्यक्रम के बाद सीधे PHD कर सकेंगे. साथ ही छात्र का पोस्ट ग्रेजुएट होना भी जरूरी नहीं होगा. 

 

बता दें कि विश्वविद्यालयों में वर्तमान में स्नातक पाठ्यक्रम 3 वर्ष का और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम 2 वर्ष का होता है. इसके बाद ही किसी छात्र को PHD में प्रवेश मिल सकता है. दरअसल UGC देश की शिक्षा नीति में बड़े स्तर पर फेरबदल करने जा रहा है. इसके लिए UGC ने एक विशेषज्ञ समिति गठित की है. 

 

इसी कमेटी ने शिक्षा नीति में बदलाव के लिए UGC को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. इसमें ऐसी ही कई सिफारिशें की गई हैं. इसके अलावा इसमें बताया गया है कि विश्वविद्यालयों को 3 वर्षीय परंपरागत स्नातक पाठ्यक्रम चलाने की छूट भी मिलेगी.

 

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अगर कोई छात्र 4 वर्ष का स्नातक पाठ्यक्रम करने के बाद PHD के बजाए स्नातकोत्तर करना चाहता है तो उसे ऐसा करने की छूट मिलेगी. वर्तमान में तकनीकी शिक्षा के बैचलर ऑफ टेक्नॉलॉजी (बीटेक) या बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (बीई)  4 वर्ष के स्नातक पाठ्यक्रम हैं. उनके बाद छात्र सीधे PHD में प्रवेश ले सकते हैं. 

 

आपको बता दें कि प्रो. DP सिंह ने बताया कि शिक्षा नीति में बदलाव के पहले गठित कमेटी ने रिपोर्ट में स्नातक पाठ्यक्रम की अवधि 3 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष किए जाने की सिफारिश की है. यह नीति देश को नई दिशा देने वाली होगी. इस वजह से इसके हर बिंदु को अच्छी तरह से परख कर ही लागू किया जाएगा. नई नीति अगले वर्ष से लागू की जा सकती है.

 

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आदिवासी बेटियों के लिए खोले गए कौशल नर्सिंग कॉलेज: रघुवर दास


आदिवासी बेटियों के लिए खोले गए कौशल नर्सिंग कॉलेज: रघुवर दास

आज की बेटियां कल की भविष्य है. इन्हे शिक्षा देने की जरुरत है मगर हमारे देश में आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो अपने बेटियों को शिक्षा नहीं दे पाते है. इसका मुल कारण है गरिबी. मगर हमारी केंद्र सरकार और राज्य सरकार इसे सुधारने के लिए मुहीम चला रही है. इस कड़ी में झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बेटियों को एक बड़ा तोहफा देते हुए गुमला में नर्सिंग कॉलेज का उद्घाटन किया. 

 

बताया जा रहा है कि कॉलेज में इसी सत्र से पढ़ाई भी शुरु हो जाएगी. एक बैच में 120 छात्राओं को दाखिला दिया जाएगा. दो वर्ष की नर्सिंग डिग्री हासिल करने के बाद छात्राओं को प्लेसमेंट भी दिया जाएगा. बता दें कि कौशल नर्सिंग कॉलेज के उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सूबे के महिला शक्ति की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए कृत संकल्पित है और इसको लेकर कई तरह की योजनाएं चला रही है.

 

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उसी कड़ी में महिलाओं को स्वालम्बी बनाने की दिशा में यह नर्सिंग खोला गया है. यहां से हर वर्ष 120 छात्राएं पढ़ कर निकलेंगी और देश के नामी गिरामी अस्पतालों में उनका प्लेसमेंट कराया जायेगा. मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि सूबे में इस तरह के 9 और नर्सिंग कॉलेज खोले जाएंगे.

 

गौरतलब है कि पहले इस इलाके में कॉलेज नहीं होने और गरीबी के कारण यहां की लड़कियां इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ देती थीं लेकिन अब वे नर्सिंग की ट्रेनिंग ले कर जरुरतमंदों की सेवा कर सकेंगी. इसके अलाव उन्होने कहा कि जनजाति क्षेत्र के विकास पर सरकार का विशेष फोकस है. सालों से आदिवासी समाज को विकास के नाम पर सिर्फ धोखा मिला है, लेकिन हमारी सरकार आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्पित है.

 

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