जानें बादल परिवार की बहू और कुशल राजनेत्री हरसिमरत कौर बादल की जीवनी


जानें बादल परिवार की बहू और कुशल राजनेत्री हरसिमरत कौर बादल की जीवनी

वर्तमान में मोदी सरकार के कैबिनेट में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री की जिम्मेवारी संभाल रही हरसिमरत कौर बादल एक कुशल राजनीतिज्ञ हैं। अपनी कार्य कुशलता और स्वच्छ छवि के लिए हरसिमरत कौर बादल लोगों में जानी जाती है। उन्होंने अपने राजनैतिक करियर में कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की है जिसके लिए वह न केवल पंजाब बल्कि पूरे भारत में लोकप्रिय हैं। आज हम उनके जीवन के बारे में बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं।

 

हरसिमरत कौर बादल का जन्म 25 जुलाई 1966 को दिल्ली में हुआ था। इनके पिता का नाम सत्यजीत और माता का नाम सुखमनजस मजीठिया है। पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखने वाली हरसिमरत कौर बादल ने अपनी प्रारंभिक पढाई लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल, नई दिल्ली से पूरी की और फिर और उच्च शिक्षा दिल्ली से ही उन्होंने टेक्सटाइल डिज़ाइन में तीन साल का स्नातक की शिक्षा हासिल की।

 

 

इसके बाद वे 21 नवंबर 1991 को सुखबीर सिंह बादल संग परिणय सूत्र में बंधी और उनके परिवार से दो बेटियां और एक बेटा है। इनके परिवार में उनका बड़ा भाई बिक्रम सिंह मजीठिया है जोकि मजीठा से अकाली विधायक हैं। जबकि कौर के ससुर प्रकाश सिंह बादल सरकार में मंत्री रह चुके हैं।

 

राजनैतिक करियर

हरसिमरत ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 2009 में शिरोमणि अकाली दल दल से की। इस चुनाव में उनकी प्रतिद्व्न्दी उम्मीदवार कांग्रेस के रनिंदर सिंह थे, जिन्हें उन्होंने 120960 मतों से हराया और बठिंडा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद बनी। उनकी जीत का मुख्य कारण उनका जोरदार भाषण था। जब उन्होंने 3 दिसंबर 2009 को भाषण में 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों का मुद्दा उठाकर उनके जीवन के लिए गहरी चिंता व्यक्ति की थी। इसी समय उन्होंने "नन्ही छन्न" नाम से एक परियोजना प्रारम्भ की जो पंजाब में काफी लोकप्रिय हुआ था।

 

 

इसके बाद जब 2014 में 16वीं लोकसभा चुनाव हुआ तो इस चुनाव में उन्होंने फिर से कांग्रेस-पीपुल्स पार्टी ऑफ़ पंजाब के संयुक्त उम्मीदवार मनप्रीत सिंह बादल को हराया और एक बार फिर से बठिंडा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद बनी। इसी विजय के बाद उनकी राजनैतिक पहुंच बढ़ गयी और मोदी सरकार के कैबिनेट में उन्हें जगह दी गयी और उन्हें खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री की जिम्मेवारी दी गयी। जिसे हरसिमरत कौर बादल ने बखूबी निभाया और अपने कार्यकाल को सफल तरीके से पूरा किया।

 

इसके बाद 2019 में, 17वीं लोकसभा चुनाव में बठिंडा से पुनः चुनाव लड़ा और इस चुनाव में भी उन्ही जीत हासिल हुई। जब उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी अमरिंदर सिंह राजा वारिंग को 21,000 मतों से हराया। इसके बाद मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्हें पुनः खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय दिया गया। बता दें कि हरसिमरत कौर बादल पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हैं।

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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