लॉक डाउन की वजह से गंगा निर्मल अविरल और शुद्ध हो गई


लॉक डाउन की वजह से गंगा निर्मल अविरल और शुद्ध हो गई

कोरोना वायरस के बाद पूरे भारत में केंद्र सरकार द्वारा लोक डाउन लगा दिया गया हैं। इस लोक डाउन के लगने की वजह से अब गंगा भी अविरल और निर्मल बहने लगी है। हरिद्वार हरकी पैड़ी के साथ साथ आसपास के घाटो पर देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु मां गंगा में स्नान करने आते थे। लेकिन लोक डाउन के चलते अब लोग गंगा में स्नान नहीं कर पा रहे हैं। इसके साथ ही कई लोग गंगा के पवित्र जल में कूड़ा कचरा भी डाल देते थे। जिससे गंगा का जल दूषित हो जाता था।

 

पूरे भारत वर्ष में लॉक डाउन लगने से हरिद्वार में यात्रियों की संख्या ना के बराबर है। जिससे गंगा का जल साफ-सुथरा बहता दिखाई दे रहा हैं। लॉक डाउन के दौरान गंगा जल स्वच्छता पर वैज्ञानिक और पर्यावरणविद प्रोफेसर बीडी जोशी का कहना है कि पिछले तीन सप्ताह में हमारा वायु मंडल और हमारी नदियों में काफी सुधार आया है इसकी वजह है लोगो की आवाजाही बिल्कुल खत्म हो जाना। तुलनात्मक अध्ययन बताता है कि टीडीएस 70 से 80 प्रतिशत कम हो चुका है गंगा में बहने वाले सॉलिड वेस्ट में भी 90 प्रतिशत की कमी आई है।

 

ऑक्सीजन का स्तर पहले 7.8 के आसपास था वह भी अब बढ़कर 9 के आसपास आ चुका है। गंगा जल की पारदर्शिता भी बढ़ गई है कहा जा सकता है कि गंगा जल में 50 से 80 प्रतिशत की शुद्धता आ गई है गंगा की स्वच्छ्ता के लिए सरकार ने अरबो रुपया खर्च कर दिया है। मगर जो सख्ती सरकार ने लॉक डाउन के दौरान दिखाई है वही सख्ती सरकार गंगा को स्वच्छ करने में दिखती तो अरबो रुपया खर्च करने की जरूरत नहो पड़ती।

 

धर्म नगरी हरिद्वार के गंगा सभा के तीर्थ पुरोहित व विख्यात ज्योतिषाचार्य प्रतीक मिश्र पुरी का कहना है कि ऐसा वर्षो में होता है। सरकार ने अरबो रुपए की धनराशि सरकार ने गंगा जल को शुद्ध करने के लिए हरिद्वार से गंगा सागर तक खर्च कर दिए मगर प्रकृति के अंदर अपनी समयवस्था को कायम करने की शक्ति होती है यही वजह है कि लॉक डाउन के बाद गंगा अविरल और निर्मल हो गई। इसका ज्योतिष आधार यह है कि प्रकृति के तारे 86 वर्षो के बाद दुबारा अपने को दोहराते है और इस क्रिया ब्रहस्पति की अतिचारीति गति कहा जाता है यह समय चक्र जब भी आता है तब तब प्रकृति अपनी समयवस्था स्वयं कायम करती है और यही वजह है कि गंगा खुद निर्मल अविरल और शुद्ध हो गई है।

 

गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए कार्य करने वाली संस्था बीइंग भगीरथ के संयोजक शिखर पालीवाल का कहना है कि जब से लॉक डाउन शुरू हुआ है तब से गंगा के प्रदूषण में भी कमी आई है गंगा में ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ी है बीओडी सीओडी की मात्रा गंगा में जाने वाला कूड़ा कचरा और फैक्टरियों से निकलने वाले केमिकल वेस्ट में भी कमी आई है गंगा अपने निर्मल स्वरूप में बह रही है और काफी साफ गंगा जल नज़र आ रहा है।

 

गंगाजल की स्वच्छता के लिए सरकार ने पानी की तरह रुपया लग गया था मगर गंगा की स्थिति में कोई भी सुधार इतना रुपया लगाने के बाद भी नहीं देखने को मिला अब कोरोना महामारी के चलते जब पूरे देश की जनता अपने घरों में कैद हैं तो हमें गंगा जल की शुद्धता में बहुत ज्यादा सुधार देखने को मिला है इससे एक बात तो साफ हो जाती है कि अगर हम आम जनमानस गंगा के प्रति अपनी आस्था और निष्ठा रखें और गंगा को स्वच्छ रखने की कोशिश करें तो गंगा की निर्मलता हमेशा ऐसे ही बरकरार रहेगी।

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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