गडकरी का शह-मात का खेल


गडकरी का शह-मात का खेल

-रितेश सिन्हा

महाराष्ट्र में सरकार गठन में उत्पन्न गतिरोध को बनाए रखने में भाजपा की अंदरूनी राजनीति का बड़ा खेल खुलता दिख रहा है। भाजपा पूरी तरह से मोदी और शाह की जेबी पार्टी बनकर सरकार और संगठन दोनों पर काबिज है जिसकी कीमत अभी हालिया दो राज्यों के विधानसभा चुनावों में चुकाई है। मोदी ने अमित शाह को गृहमंत्री बनाकर मनमुताबिक एक बड़ी सियासती जीत हासिल की है। देश पर अपना पूरा नियंत्रण करने के साथ ही संगठन को भी अभी अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं।

 

यही वजह है कि भाजपा संगठन में एक पद एक व्यक्ति की परंपरा को निभाने की कोशिश करने के साथ-साथ संगठन पर अपना नियंत्रण बरकरार रखने का उनका राजनीतिक कौशल कमाल का है। विश्वासपात्र जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर संगठन की बागडोर अपने हाथों में आज भी रखा है। नड्डा की राजनीति पर शाह का नियंत्रण है। यही वजह है कि जेपी नड्डा भाजपा संगठन में हाथी के दांत हैं।

 

हालिया महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनावों में अपने वफादारों के टिकट मोदी और शाह ने तय किए थे। न जीतने की खुफिया रिपोर्ट के विपरीत वफादारी के नाम पर इन दोनों जोड़ी ने कई नेताओं को टिकट दिए थे। 370 का जबर्दस्त अंडरकरंट होने के बावजूद और आपसी सिर-फुटव्वल में उलझा कांग्रेसी संगठन की लड़ाई के बावजूद भाजपा 40 सीटें हरियाणा में जीतने में कामयाब नहीं। शुरूआत में 15 सीटों का आकलन करने वाली कांग्रेस भाजपा के कमजोर उम्मीदवार के मुकाबले 31 सीटों पर पहुंच गई।

 

Breaking News : प्याज की बढ़ती कीमतों ने लोगों के निकाले आंसू, दाम हुए 80 रु पार

 

वहीं अपने वजूद के लिए लड़ रही जेपीपी 10 सीटों पर कामयाब हो गई। इनके बावजूद मोदी-शाह ने अपने उसी प्यादे के सिर पर दोबारा ताज रख दिया, जबकि हाईकमान पर पिछले तीन सालों से मनोहर लाल खट्टर को हटाने का दवाब था। खट्टर सरकार और संगठन दोनों को खट्टा कर चुके थे। तभी तो अनिल विज को छोड़कर सभी मंत्री अपना चुनाव हार गए। लोकसभा में बड़ी जीत हासिल कर केंद्र में सरकार बनाकर और धारा 370 को हटाने का अतिआत्मविश्वास मोदी-शाह को टिकट वितरण में ले डूबा।

 

महाराष्ट्र में मोदी-शाह की जोड़ी देवेंद्र फडनवीस को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा के साथ चुनाव में गई और पिछड़ गई। जनता में विश्वास खो रही शिवसेना और भाजपा की युति की और बुरी गत होती, अगर कांग्रेस संगठन में टिकटों की बंदरबांट न हुई होती। भाजपा पर महाराष्ट्र में चेहरा बदलने का दवाब था, लेकिन अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चट्टान की तरह फडनवीस आज भी डटे हुए हैं। जबकि भाजपा 122 से 105 पर आ गई और शिवसेना 63 से 56 पर पहुंच गई।

 

गठबंधन की जीत के बाद भी सरकार न बन पाना बतौर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस को बनाए रखने की जिद मात्र है। आपको बता दें कि फडनवीस ने शिवसेना को कमजोर रखने के लिए शरद पवार को भी घोटाले में लपेटने का मशविरा दिया था, जिससे सूबे की सियासत गर्मा गई। महाराष्ट्र में शरद पवार का अपना एक कद है और पवार ने जो धुआंधार कैंपेन किया और उनके प्रति जो सहानुभूति उपजी, उसने भाजपा को ही कमजोर कर दिया, साथ ही उसका फायदा कांग्रेस को मिला जो अपने लिए 15 सीटों की उम्मीद लगाए बैठी थी।

 

 

कांग्रेसी दिग्गज अशोक चव्हान, बालासाहेब थोराट, पृथ्वीराज चव्हान, नितिन राउत अपने-अपने विधानसभा के क्षेत्रों से बाहर नहीं निकल पाए। बावजूद इसके लोकसभा में 1 पर टिकी कांग्रेस 42 से 44 तक पहुंच गई। एनसीपी सुप्रीमो पवार के घर पर शिवसेना के दिग्गज माथा टेक रहे हैं। भाजपा-शिवसेना की फूट में शरद पवार खुद को मुख्यमंत्री बनने का सपना पाल रहे हैं। इसके पहले कांग्रेसी सरकार में घूसने के लिए बेताब दिख रहे थे।

 

पृथ्वीराज चव्हान, अशोक चव्हान, बालासाहेब थोराट समेत सारे दिग्गज सोनिया गांधी से मिलने का वक्त मांग रहे थे ताकि शिवसेना के साथ मिलकर सरकार में घुसने की एनओसी मिल सके। ये सारे खेल दिल्ली में कांग्रेस के खजाने पर काबिज अहमद पटेल खेल रहे थे, जिसे अहमद विरोधी खेमे ने कांग्रेस अध्यक्ष को शिवसेना के साथ सरकार बनाने से राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले नफे-नुक्सान से अवगत करा दिया। यही वजह थी कि सोनिया गांधी ने महाराष्ट्र के उन दिग्गजों से मिलने से ही इंकार कर दिया था।

 

अब भी एनसीपी सुप्रीमो के पीछे लटककर कांग्रेसी सरकार में घूसने का जुगाड़ बना रहे हैं लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति को समझने वाले इसको भाजपा की बी टीम का खेल मान रहे हैं जिसकी अगुवाई आज नितिन गडकरी कर रहे हैं। गडकरी के बालासाहेब थोराट के साथ बड़े घनिष्ठ संबंध हैं और उद्धव आज भी उनको बड़े भाई का सम्मान देते हैं। जिस दिन भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व गडकरी के नाम पर तैयार होगा, उसी दिन सूबे में भाजपा-शिवसेना की सरकार काबिज हो जाएगी।

 

Hindi Samachar : जानिए मात्र 4 घंटे में कोलेस्ट्रॉल कम कैसे करें

 

सत्ता का भूखा कांग्रेसी कुनबा जैसे-तैसे सरकार बनाने की जुगाड़ में कुतर्क पेश कर रहा है। आपको बता दें कि 1975 में इंदिरा गांधी के रूतबे को सलाम करते हुए शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने खुद को बचाओ अभियान के तहत आपातकाल का सपोर्ट करके सबको चौंका दिया था जिसकी भारी कीमत शिवसेना को 1978 के विधानसभा चुनाव और बीएमसी चुनाव में चुकानी पड़ी।

 

पार्टी में बालासाहेब के इस फैसले की इतनी आलोचना हुई थी कि उनको मुंबई की एक रैली में अपना इस्तीफा तक देना पड़ा था जिसे बाद में उन्होंने पार्टी के कुछ नेताओं के साथ समझौते के बाद वापस ले लिया। शिवसेना भाजपा को दवाब में लेने के लिए भले माहौल बना रही हो, मगर कांग्रेस का हाथ पकड़ते ही शिवसेना फिर अपनी औकात में आ जाएगी। पिछले बीएमसी चुनाव में भाजपा ने शिवसेना को उसकी औकात बता चुकी है। अगर कांग्रेस से हाथ मिलाया तो कागज तक सिमट कर रह जाएगी। इस बात को शिवसैनिक बखूबी समझते हैं।

 

भाजपा के दोनों खेमे एक-दूसरे को थकाकर बाजी मारने की फिराक में हैं। इतना को तय है कि भाजपा और अमित शाह किसी कीमत पर किसी दूसरी सरकार को बनने का मौका नहीं देंगे। फडनवीस के अलावा जैसे ही दूसरा चेहरा सामने आएगा, भाजपा-शिवसेना युति की सरकार बनना तय है। देखना है कि मोदी-शाह के चहेते फडनवीस और संघ के चहेते गडकरी में कौन बाजी मार ले जाता है।

 

Maharashtra elections 2019 News, Nitin Gadkari bjp Hindi News, shiv sena maharashtra elections, bjp shiv sena news, maharashtra assembly election, Nitin Gadkari Hindi Samachar, हिंदी न्यूज़, हिन्दी ख़बर, Maharashtra breaking news, maharashtra sarkar hindi news, hindi khabar, Nitin Gadkari news headlines in hindi, Maharashtra Hindi News Headlines

और पढ़ें »

खास आपके लिए

Senior Citizen Tiffin Seva

Viral अड्डा

  • news
  • news
  • news
  • news
-

बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

और पढ़ें »

खास आपके लिए

Senior Citizen Tiffin Seva

Viral अड्डा

  • news
  • news
  • news
  • news
-

28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

और पढ़ें »

खास आपके लिए

Senior Citizen Tiffin Seva

Viral अड्डा

  • news
  • news
  • news
  • news
-

वायरल न्यूज़

×