आम आदमी पार्टी सरकार की बुनियाद ही झूठ पर टिकी हुई है- मनोज तिवारी


आम आदमी पार्टी सरकार की बुनियाद ही झूठ पर टिकी हुई है- मनोज तिवारी

नई दिल्ली, 24 मई-

दिल्ली सरकार की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण कोरोना संक्रमित मरीजों को सही समय पर समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है और दिल्ली में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण बढ़ रहे कोरोना वायरस के मामलों और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल द्वारा लगातार झूठ बोले जाने पर दिल्ली भाजपा ने हमला बोला।

 

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व दिल्ली प्रभारी श्री श्याम जाजू ने कहा कि कोरोना संकट के समय में भी दिल्ली सरकार लगातार राजनीति कर रही है। दिल्ली सरकार कोरोना टेस्टिंग के आंकड़े और अब सरकारी व निजी अस्पतालों के बेड को लेकर भी लगातार झूठ बोल रही है। अरविंद केजरीवाल लगभग हर रोज़ ही प्रेस कांफ्रेंस के नाम पर वीडियो कांफ्रेंस करके दिल्ली के लोगों को यह बताते हैं कि हमने कोरोना पर कितने शानदार तरीक़े से लड़ने को तैयार हैं लेकिन कभी भी सच्चाई उनके सामने नहीं रखते हैं।

 

पहले दिल्ली सरकार ने कहा था कि कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 30,000 पहुंचने पर भी दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के इलाज के लिए बेड की व्यवस्था की है लेकिन हकीकत में कोरोना संक्रमित मरीज बेड के अभाव में इलाज नहीं करवा पा रहे हैं। दिल्ली सरकार के ही वकील हाईकोर्ट में यह माना है कि कोरोना से लड़ने के लिए दिल्ली के सरकारी व निजी अस्पतालों में सिर्फ़ 3150 बेड है।

 

दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री हर मोर्चे पर दिल्ली की जनता को सुरक्षित रखने में फेल हुई है। दिल्ली सरकार का स्वास्थ्य विभाग टेस्टिंग को लेकर कोई आंकड़े नहीं दे रहा है और हॉस्पिटल में बेड की उपलब्धता को लेकर झूठे आंकड़े दिए जा रहे हैं। आज दिल्ली के लोग अस्पतालों में बेड की कमी के कारण अपने घरों में ही रहने को मजबूर हैं जिसके कारण उनके परिवार के लोगों को भी संक्रमण का खतरा है।

 

आम आदमी पार्टी सरकार की बुनियाद ही झूठ पर टिकी हुई है। जिस भरोसे के साथ केजरीवाल को दिल्ली के लोगों ने मुख्यमंत्री बनाया था उसी भरोसे और विश्वास को हाशिए पर रखते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल दिल्ली के लोगों को कोरोना संकट के समय में भी धोखा दिया। अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है, उन्हें इस पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

 

प्रदेश महामंत्री श्री कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री को राजनीति से फुर्सत नहीं कि वह इस पर ध्यान दें। दिल्ली सरकार की अकर्मण्यता के कारण दिल्ली के लोगों के साथ साथ साथ कोरोना वॉरियर्स की भी जान चली गई। हालत यह है कि सरकारी अस्पतालों में बेड मिल ही नहीं रहे हैं और कोरोना इलाज के लिए निजी अस्पतालों में बेड 15 लाख तक में मिल रहे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को या खुद सोचना चाहिए कि इस कोरोना संकट के समय में गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार कोरोना से इलाज के लिए इतने पैसे कैसे जमा कर पाएगा।

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मुंबई से दिल्ली का सफ़र सिर्फ 10 घंटो में होगा पूरा


मुंबई से दिल्ली का सफ़र सिर्फ 10 घंटो में होगा पूरा

दिल्ली से मुंबई के बीच काफी तेज़ चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस में सफर जल्द ही और छोटा होने वाला है। रेलवे अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर को अब और बेहतर कर रहा है। delhi mumbai train

आपको बता दें, रेलवे ने 2023 तक इसके ट्रैवल टाइम को 5 घंटे 45 मिनट कम करने की योजना शुरू कर दी है। फिलहाल, इस सफर में 15 घंटे 45 मिनट लगते हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर के लचर होने के कारण यह ट्रेन अपनी क्षमता के मुताबिक स्पीड नहीं पकड़ पा रही थी।

घर से छिपकली भगाने के घरेलू उपाय।

हालांकि रेलवे ने 2016-17 में बजट मिशन रफ्तार के नाम से रेलवे के इन्फ्रास्ट्रक्चर को बदलने का प्लान भी किया था, लेकिन मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में इस पर ध्यान दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि रूट की क्षमता 20 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है। लेकिन हर दिन यह सेक्टर 100 पैसेंजर और 80 गुड्स ट्रेनें हैंडल करता है। delhi mumbai train

बता दें, राजधानी एक्सप्रेस रेक जर्मनी की सुपीरियर लिंक हॉफमन बश टेक्नॉलजी से बने होते हैं और यह 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकते है लेकिन इसको सपॉर्ट करने वाला इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहतर नहीं है। जिस कारण यह 87 किमी प्रति घंटा की स्पीड से चलते है।

रेलवे के एक विश्लेषण से पता लगा है कि कुल 60,000 किमी के नेटवर्क में से सिर्फ 0.3 प्रतिशत 160 प्रति घंटा की रफ्तार को झेल सकता है, जबकि 5 प्रतिशत 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार का भार उठा सकता है।

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Facebook से आधार लिंक करना जरूरी है क्या?


Facebook से आधार लिंक करना जरूरी है क्या?

अब नहीं चलेगी सोशल मीडिया पर फेक न्यूज क्योंकी अगर आपके फेसबुक अकाउंट से फेक न्यूज फैलती है तो इसका जवाब आपको खुद देना होगा. इसके अलावा फेसबुक को आधार से जोड़ना पड़ सकता है. इसका प्रयोग फेसबुक अकाउंट वेरिफिकेशन के लिए किया जाएगा.

आपको बतादें कि, इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक PIL दायर की गई थी जिसपर कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में यह मामला मद्रास, बॉम्बे और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित है. दूसरी तरफ मीडिया का कहना है कि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, गूगल, ट्विटर, यूट्यूब सहित अन्य को नोटिस जारी किया है. facebook aadhar link

इन्हें 13 सितंबर तक इस मामले में जवाब देने के लिए कहा गया है. बता दें कि, तमिलनाडु सरकार ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि फेक न्यूज, अश्लील कंटेट, राष्ट्रविरोधी कंटेट पर लगाम कसने के लिए जरूरी है. फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आधार से लिंक किया जाए. ऐसा करने से आरोपियों की पहचान आसानी से हो पाएगी. facebook aadhar link

हालांकि, इसके विरोध में फेसबुक ने कोर्ट से कहा कि ऐसा करने से यूजर्स की प्राइवेसी को खतरा पहुंच सकता है. फेसबुक के लिए भारत एक बहुत बड़ा बाजार है.

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