3 महीने की स्कूल फीस माफ करें और सबके आधार कार्ड में 1 हजार रुपये दें


3 महीने की स्कूल फीस माफ करें और सबके आधार कार्ड में 1 हजार रुपये दें

राष्ट्रीय राष्ट्रवादी पार्टी अध्यक्ष प्रताप चन्द्रा नें प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि भारत निश्चित ही संक्रमण काल से गुजर रहा है, जिससे लगभग सभी प्रकार का व्यवसाय बंद है, लोग गुजारा कर रहे हैं और सरकार के निर्देशानुसार अपने व्यवसाय के कर्मचारियों को तनख्वाह देकर उनका जीवन यापन करा रहे हैं, मकान के किरायेदारों को राहत दे रहे हैं, जबकि दुकानों का किराया, बिजली आदि का भुगतान करना पड़ रहा हैं। देश के नागरिक निरंतर सरकार को अपना वित्तीय योगदान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष टैक्स के रूप में देते रहे हैं।

 

  • राष्ट्रीय राष्ट्रवादी पार्टी सामाजिक सरोकार के उद्देश्य से बनी पार्टी है, इसलिए सरकार को सहयोग और सुझाव देने की जिम्मेदारी निभाता रहता है।
  • कोरोना की रोकथाम हेतु देश में लागू लॉकडाउन यदि बढाया जाता है तो कृपया निम्न उपाय के साथ ही बढाया जाये जिससे नागरिकों को राहत मिल सके, जिसकी अपेक्षा सरकार से है :

 

1. नागरिकों के बच्चों की प्राइवेट स्कूलों की ३ महीने की फीस सरकार द्वारा माफ़ किया जाये,

(सरकार निर्धारित RTE की फीस 333 रूपया प्रति माह यानि 4000 रूपया सालाना के हिसाब से प्राइवेट स्कूलों को भुगतान करे) अथवा स्कूल फीस का ३३% सरकार स्कूल को भुगतान करे, ३३% फीस स्कूल माफ़ करे और ३३% अभिभावक फीस जमा करें,  जिससे अभिभावकों को राहत मिल सके।

 

2. नागरिकों के बैंक खाते आधार से लिंक हैं, इसलिए सभी नागरिकों के खाते में कम से कम 1000 रुपये की राशि दी जाये जिससे इस संक्रमण काल से स्वाभिमान से यापन कर सकेंगे, ऐसा करने से हर वर्ग को सहायता मिल जाएगी, जिन्हें नहीं जरुरत होगी वो राहत कोष में दान दे देंगे, इससे नागरिक जरुरत का सामन स्वयं खरीद सकेंगे,  ये न सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि नागरिक अधिकार भी है गर्व के साथ जीवन यापन करना।  

 

विदित हो कि इस संक्रमण काल में नागरिक मजबूर हैं, भिखारी नहीं, जबकि दिल्ली सहित कई राज्यों में मजबूर नागरिकों को भिखारी के रूप में ट्रीट किया जा रहा है |

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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