जानें राजनीति के मंझे और सधे हुए राजनेता और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की जीवनी


जानें राजनीति के मंझे और सधे हुए राजनेता और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की जीवनी

भारत के वर्तमान विदेश मंत्री और गुजरात से राज्यसभा सांसद एस. जयशंकर एक मंझे और सधे हुए राजनेता है। इन्होंने लोगों के दिलों में जेंटल मैन की पहचान बनाई है। जब पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का देहांत हुआ तो उस समय ऐसा लग रहा था कि शायद उनकी कमी पूरी नहीं हो पायेगी लेकिन मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में जब एस. जयशंकर को विदेश मंत्री बनाया गया तो उन्होंने इस कमी को दूर कर दिया है। आज भारत की विदेश निति एस. जयशंकर के नेतृत्व में उतना ही सबल है जितना सुषमा स्वराज के समय था। ऐसे में आज हम आपको एस. जयशंकर की जीवनी बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं :

 

भारत के वर्तमान विदेश मंत्री और गुजरात से राज्यसभा सांसद एस. जयशंकर का पूरा नाम सुब्रहमण्यम जयशंकर है। इनका जन्म 15 जनवरी 1955 को दिल्ली में हुआ है। इनके पिता का नाम के सुब्रह्मण्यम है जो सिविल सेवा अधिकारी रहे हैं। मां का नाम सुलोचना है। इनका परिवार दक्षिण भारत के तमिलनाडु से ताल्लुक रखते हैं। इनके परिवार में भाई संजय सुब्रह्मण्यम प्रख्यात इतिहासकार रहे हैं और एक अन्य भाई एस. विजय कुमार भारत के ग्रामीण विकास सचिव रहे हैं।

 

 

इन्होंने जापानी मूल की क्योको से शादी की है और इनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी है। बेटे का नाम ध्रुव और अर्जुन हैं और बेटी का नाम मेधा है। एस जयशंकर ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई दिल्ली के श्रीनिवासपुरी स्थित कैंब्रिज स्कूल से की है और फिर माध्यमिक शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय के St. Stephen’s College से की और फिर जवाहर लाल यूनिवर्सिटी से पोलिटिकल सइंस में एमए किया। यहीं से इन्होने इंटरनेशनल रिलेशन्स में एमफिल और पीएचडी भी की।

 

इन्होने अपने करियर की शुरुआत 1977 में भारतीय विदेश सेवा से की। इसके बाद  एस जयशंकर ने रूस, अमेरिका, चीन, जापान, चेक रिपब्लिक, श्रीलंका, सिंगापुर आदि देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद जून जून 2009 से दिसंबर 2013 तक चीन में भारत के राजदूत रहे और फिर दिसंबर 2013 से 28 जनवरी 2015 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे।

 

जब मोदी सरकार का पहला कार्यकाल था उस समय इन्हें मोदी सरकार में विदेश सचिव बनाया गया। इसके बाद मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में दिवंगत सुषमा स्वराज के स्थान पर विदेश मंत्री बनाया गया। इनको हिंदी, इंग्लिश, तमिल, रुसी, जापानी, हंगेरियन मंदारिन आदि समेत दर्जनों भाषाएं आती है। इनकी सेवाओं के लिए 2019 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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