आर्थिक पैकेज की चौथी किस्त: कोयला, खनिज और रक्षा क्षेत्र को लेकर हुए बड़े ऐलान


आर्थिक पैकेज की चौथी किस्त: कोयला, खनिज और रक्षा क्षेत्र को लेकर हुए बड़े ऐलान

एमआरओ इकोसिस्टम को रैश्नलाइस किया गया। इससे 800 से 2000 करोड़ रुपये तीन सालों में जो एयरक्राफ्ट की मेंटेनेंस के लिए जो खर्च होता है, उसमें बचत होगी। डिफेंस और सिविल सेक्टर को कन्वर्ज करके भी इसके लिए बढ़ावा दिया जा सकता है।

 

इससे लगभग 2300 करोड़ की डाउन पेमेंट मिलेगी। 12 हवाई अड्डों में पहले और दूसरे चरण में लगभग 13,000 करोड़ रुपये का निवेश आएगा। छह अन्य एयरपोर्ट्स की नीलामी तीसरे चरण में होगी।

 

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने छह में से तीन हवाई अड्डों का अनुबंध प्रदान किया है। पीपीपी के माध्यम से इसके लिए काम होगा। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल के तहत 6 नए एयरपोर्ट्स की नीलामी होगी।

 

सिविल एविएशन सेक्टर को लेकर तीन कदम हैं। भारतीय नागरिक विमानों को लंबे रास्ते लेने पड़ते हैं। भारतीय हवाई क्षेत्र को सुगम बनाने के लिए मिलिटरी अफेयर विभाग के साथ समन्वय करके इसको दो महीने के अंतर्गत सुलझा लिया जाएगा। इससे विमानन क्षेत्र को 1 हजार करोड़ रुपये का फायदा होगा। एयर फ्यूल भी बचेगा और पर्यावरण भी बचेगा।

 

समयबद्ध रक्षा खरीद के लिए सरकार कदम उठाएगी। इसके साथ ही ट्रायल और टेस्टिंग प्रक्रिया को बेहतर बनाया जाएगा। रक्षा उत्पादन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लिमिट 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी कर दी जाएगी।

 

रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लिए मेक इन इंडिया जरूरी है। इसके लिए कई कदम उठाए गए। साल दर साल हथियारों की लिस्ट को नोटिफाई किया जाएगा और आयात के लिए प्रतिबंध लगाया जाएगा। इनकी स्वदेशी आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जाएगा। इससे डिफेंस आयात बिल में भारी कटौती होगी, जिसका सीधा लाभ भारत में की उन कंपनियों को मिलेगा जो हिंदुस्तान में सैन्य सामान की आपूर्ति करेंगी।

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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