जीविका समूहों के माध्यम से राशन कार्ड नहीं रखने वाले परिवारों को भी मिलेगा सहयोग


जीविका समूहों के माध्यम से राशन कार्ड नहीं रखने वाले परिवारों को भी मिलेगा सहयोग

-कोरोना को मात देने की तैयारी में जुटी जीविका दीदियाँ

-कोरोना संक्रमण से लोगों के बचाव के लिए बना रहीं मास्क 

-1 लाख से अधिक सामुदायिक सदस्यों के मोबाइल नंबर किये एकत्रित 

-मोबाइल वाणी मंच की सहायता से वॉयस मैसेज भेज कर फैला रही जागरूकता

 

लखीसराय- 19 अप्रैल:

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने विश्व भर में आपातकालीन स्थिति पैदा कर दी है. धीरे-धीरे संक्रमण का प्रसार देश के साथ बिहार में बढ़ने लगा है. इसकी रोकथाम एवं पीड़ितों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा प्रदान करने की दिशा में सरकार हर संभव प्रयास भी कर रही है. अब इस महामारी को मात देने के लिए जीविका कार्यकर्ता भी जुट गए हैं.

 

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सरकार द्वारा मास्क के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है. अचानक मास्क की मांग बढ़ने के कारण बाजारों में मास्क की कमी भी देखने को मिल रही है. इसलिए जीविका ने इस दिशा में पहल की है. राज्य के सभी जिलों में जीविका दीदियाँ सक्रिय होकर मास्क बनाने में जुट गयी हैं. मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार जिन परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं है, उन्हें भी जीविका समूहों के माध्यम से चिन्हित कर उनकी मदद की जाएगी.

 

जागरूकता का उठाया बीड़ा: 

कोविड-19 के वैश्विक महामारी घोषित होने पर जीविका ने पहल करते हुए कोरोना पर आईईसी मटेरियल तैयार करने का कार्य शुरू कर दिया, ताकि आम लोगों को इस रोग के बारे में जागरूकता फ़ैलाने और इससे निपटने की तैयारियों में मदद कर सके. जीविका अपने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अधिकतम परिवारों तक पहुँचने का प्रयास कर रही है एवं हैण्ड वाशिंग, क्वारंटीन, सामजिक दूरियाँ एवं आईसोलेशन जैसे महतवपूर्ण मुद्दों पर आम जागरूकता फैला रही है.

 

जीविका ने अब तक 1 लाख से अधिक सामुदायिक सदस्यों के मोबाइल नंबर एकत्रित किये हैं और कोविड-19 के बारे में वॉयस मैसेज जारी करने के लिए मोबाइल वाणी मंच का उपयोग कर रहा है और उसी के माध्यम से समुदाय के प्रश्नों का उत्तर भी दे रहा है. साथ ही कोरोना पर जागरूकता बढ़ाने के मकसद से विडियो एवं गानों का भी सहारा  लिया जा रहा है. 

 

जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, उन्हें जीविका समूह का मिलेगा सहयोग: 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनता के नाम संदेश देते हुए बताया बिहार के सभी राशन कार्ड धारकों को सरकार द्वारा 1000 रूपये की सहायता राशि दी जा रही है. इसके अंतर्गत अब तक 94.85 लाख कार्ड धारकों को सहायता राशि आवंटित की जा चुकी है. शेष कार्ड धारकों के खाते में भी शीघ्र की राशि भेज दी जाएगी.

 

साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि जिन परिवारों के पास राशन कार्ड नही हैं, उन्हें भी जीविका समूहों द्वारा चिन्हित कर उनकी मदद की जाएगी. इसके लिए ऐसे लोगों की पहचान करने का कार्य जीविका द्वारा प्रारंभ कर दिया गया है तथा शीघ्र ही इन परिवारों की पहचान कर उनकी भी मदद की जाएगी.   

 

कोरोना को हराने में जीविका का हो सकता है महत्वपूर्ण योगदान:

अन्य राज्यों की तुलना में अभी बिहार में कोरोना के कम मामले सामने आए हैं. लेकिन धीरे-धीरे राज्य में भी कोरोना का प्रसार देखने को मिल रहा है. ऐसी स्थिति में यह आवश्यक है कि सामुदायिक स्तर पर अधिक से अधिक लोगों को कोरोना संक्रमण के बारे में जानकारी दी जाए एवं उन्हें इस गंभीर रोग से बचने की उचित सलाह दी जाए. जिसमें जीविका की भूमिका अहम् हो सकती है.

 

राज्य के सभी जिलों में जीविका महिला स्वयं सहायता समूह बनाये गए है, जो महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त करने का कार्य कर रहा है. कोरोना काल में जीविका समूह द्वारा लोगों को कोरोना पर जागरूक करने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है.

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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