जो हम सोच नहीं सकते वो इन बच्चों ने कर दिखाया, वीरता के लिए बाल पुरस्कार से हुए सम्मानित


जो हम सोच नहीं सकते वो इन बच्चों ने कर दिखाया, वीरता के लिए बाल पुरस्कार से हुए सम्मानित

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार की तरफ से 49 बच्चों को बाल पुरस्कार दिया गया। ये हमारे जैसे कोई सामान्य बच्चे नहीं है, ये वैसे बच्चे हैं जो शारीरिक अक्षमता के वावजूद भी अपने सपनों से लड़ते हैं। इन्हीं छात्रों के बीच है शारीरिक अक्षमता को मात देने वाला हृदयेश। गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान भाटी की मां बताती हैं की, "हृदयेश सिर्फ चार साल का था जब हमने नोटिस किया कि हर बार चलते वक्त गिर जाता है।

 

डॉक्टर ने हमें उसकी बीमारी के बारे में बताया। इस सच को स्वीकार करने में हमें काफी वक्त लगा। हमारे बेटे ने खुद ही सारी फिक्रों को दूर कर दीया जब उसने यह साबित किया कि शारीरिक अक्षमता उसे जीवन में आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। शतरंज के खेल में वह किसी से कम नहीं है।" दिल्ली के रहने वाले 17 वर्षीय हृदयेश्वर सिंह भाटी के लिए सब कुछ किसी सपने जैसा है। उन्होंने कहा, 'मैं चल नहीं सकता, लेकिन इस वक्त मैं हवाओं में उड़ रहा हूं।'

 

आपको बता दें की हृदयेश्वर का पूरा शरीर पैरालाइज्ड है। उनके हौसले को और बुलंद करने के लिए जब राष्ट्रपति ने उन्हें बाल पुरस्कार दिया तो वो भाउक हो गए और ख़ुशी के मारे खुद को रोक नहीं पाए। आपको बताते चलें की 17 वर्षीय भाटी का 85% शरीर मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से ग्रस्त है, बावजूद किसी अवरोध वो हमेशा सकारात्मक सोच रखते हैं। यही कारण है 17 वर्ष के उम्र में हृदयेश्वर ने बहुत कुछ कर दिखाया है।

 

 

हृदयेश्वर से वैसे बच्चों को सिख लेनी चाहिए जो हमेशा खुद के बारे में नकरात्मक सोचते हैं। इतना ही नहीं हृदयेश्वर चेस का भी एक माहिर खिलाड़ी है। वह चेस के खेल में शह और मात की बारीकियों को वह खूब भली-भांति समझते हैं और इस खेल में मिली उपलब्धियों के कारण ही उन्हें राष्ट्रपति द्वारा बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इन्हीं बच्चों के बीच उपस्थित वेंकट सुब्रमण्यन की भी कहानी एक मिशाल पेश करता है।

 

6 साल के वेकंट ने हमेशा ऐसा काम किया जिससे उनके परिवार का नाम रौशन हुआ। मीडिया से बातचीत के दौरान वेंकट की मां जयापरधा ने बताया की 'मेरा बेटा एक बांह के बिना ही पैदा हुआ था। पहले मैं सिर्फ रोती रहती थी और सोचती थी कि भगवान ने मुझे शायद कोई सज़ा दी है लेकिन वेकेंट ने हमसब के सोच को झुठलाते हुए कुछ ऐसा कर दिखाया जो हमारे लिए नामुमकिन था।'

 

आपको बता दें की कराटे, स्काउटिंग, एबसकस में बेहतर प्रदर्शन लिए वेंकट राष्ट्रपति द्वारा मल्टी-डायमेंशनल टैलेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वेंकट ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया की उसका सपना है सिविल सर्विस पास करना। एक ऐसा बच्चा जो मौत को मात देकर मंच पर उपस्थित था। वर्ष 2018 में जम्मू के सजुवान आर्मी स्टेशन पर आतंकियों द्वारा हमला किया गया था। वो आतंकी जबरन लोगो के घरों में घुस रहे थे।

 

 

16 साल के सौम्यदीप ने उन्हें अपने घर में घुसने से रोका, जिसके बाद आतंकियों ने उन पर फायरिंग की। फायरिंग के दौरान गोली लगने के बाद सौम्यदीप बुरी तरह घायल हो गए थे। दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल में सौम्यदीप का इलाज चल रहा था। छह महीने तक कोमा में रहने के बाद अब उनकी हालत में सुधार हो रहा है, लेकिन ट्रीटमेंट जारी है।

 

आपको बता दें की बाल पुरस्कार के तहत बच्चों को एक मेडल, सर्टिफिकेट और एक लाख रुपये का इनाम दिया जाता है। इस बार भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बच्चों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी पुरस्कृत बच्चों से मुलाकात करेंगे और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करेंगे।

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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