गोरखपुर में 200 दुकानों का ध्वस्तीकरण, गोरक्षपीठ मंदिर परिसर की 50 दुकानें शामिल


गोरखपुर में 200 दुकानों का ध्वस्तीकरण, गोरक्षपीठ मंदिर परिसर की 50 दुकानें शामिल

सीएम के आदेश पर विकास की राह में एक और पहल की गई है. गोरक्षपीठ परिसर की दो दर्जन दुकानों को जमींदोज कर दिया गया है. वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण के कारण हुए तीन चरण के लॉकडाउन के कारण ये काम रोक दिया गया था. सड़क चौड़ीकरण (फोरलेन) के लिए इसे जल्‍द से जल्‍द ध्‍वस्‍त किया जाना था. लेकिन, इसमें देरी के कारण चौथे चरण के लॉकडाउन की शुरुआत में ही इस काम को शुरू कर दिया गया.

 

गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर से महराजगंज होते हुए नेपाल के सोनौली बार्डर तक जाने वाली इस रोड के चौड़ीकरण का काम योगी आदित्‍यनाथ के मुख्‍यमंत्री बनने के बाद से शुरू हो गया. शहर को जोड़ने वाली मुख्‍य सड़कों के फोरलेन और शहर के अंदर भी सड़कों के चौड़ीकरण और नाला निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है. ऐसे में मंदिर परिसर की दुकानें बीच में आने और उसे नहीं तोड़े जाने पर भी सुगबुगाहट तेज हो गई. लेकिन यूपी और खासकर गोरखपुर के विकास को लेकर मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं हैं.

 

मंगलवार को दुकानों के ध्‍वस्‍तीकरण के काम में लगे मछेन्‍द्र कुमार ने बताया कि यहां पर सड़ क के चौड़ीकरण का काम हो रहा है. जिससे यहां पर विकास हो सके. स्‍थानीय निवासी उदयराज जायसवाल ने बताया कि विकास के काम के लिए सड़क के चौड़ीकरण काम हो रहा है. उन्‍होंने बताया कि वे सर्राफा व्‍यापारी हैं. उनकी दुकान छोटी हो जाएगी, तो कोई बात नहीं है. लेकिन, सड़क चौड़ी होगी, तो शहर का विकास होगा.

 

उनका कहना है कि शहर में मेट्रो सेवा भी शुरू होने वाली है. उन्‍होंने कहा कि दुकानें काफी बड़ी थी. थोड़ी छोटी हो जाएगी, तो कोई परेशानी नहीं है. वहीं गोरखनाथ मंदिर के कार्यालय सचिव द्वारिका तिवारी ने बताया कि शासन-प्रशासन की जंगल कौडि़या से मोहद्दीपुर तक चौड़ीकरण की मंशा रही है. मकरसंक्रांति और अन्‍य आयोजनों के कारण कार्य रोक दिया गया था. उन्‍होंने बताया कि लॉकडाउन के कारण दुकानों में कोई कार्य नहीं है.

 

ऐसे में निर्णय लिया गया, कि दुकानदार खुद ही अपनी दुकानों को निर्देश के अनुसार खाली करके सहयोग दें. किसी भी प्रकार की असुविधा न हो. प्रशासन को भी इस बात से अवगत करा दिया गया है कि किसी भी प्रकार की जबरदस्‍ती न की जाए. ऐसे में सीएम का ये आदेश ऐसे लोगों के लिए नसीहत भी है, जो लोग विकास के लिए किए जा रहे सड़कों के चौड़ीकरण और नाला निर्माण के कार्यों को लेकर अंदर ही अंदर विरोध जता रहे हैं.

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इस मंत्री ने गलती से ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, हुए ट्रोल


इस मंत्री ने गलती से ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, हुए ट्रोल

आज सुबह से सोशल मीडिया पर एक खबर को काफी तेजी से वायरल किया जा रहा है. दरअसल, कर्नाटक में BS येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली BJP सरकार के मंत्रियों ने बीते मंगलवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली. इस दौरान जब BJP नेता और विधायक मधु स्वामी पद और गोपनीयता की शपथ ले रहे थे, तभी उन्होंने गलती से बतौर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. 

 

 

बता दें कि, मधु स्वामी जब शपथ ले रहे थे तो उन्हें मंत्री बोलना था, लेकिन जुबान फिसलने के चलते वह मुख्यमंत्री बोल पड़े. अब इस खबर को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया जा रहा है. खास बात ये है कि इस दौरान CM येदियुरप्पा भी मौके पर मौजूद थे और मधु स्वामी की इस गलती पर मुस्कुरा दिए. इतना ही नहीं येदियुरप्पा ने मधु स्वामी को बाद में गले भी लगाया.

 

गौरतलब है कि, बीते मंगलवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल वजुभाई वाला ने 17 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलायी. जिन विधायकों को मंत्री पद से नवाजा गया है, उनमें बी. श्रीरमुलु, सीटी रवि, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केएस ईश्वरप्पा और पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार का नाम शामिल है. बता दें कि, येदियुरप्पा के 26 जुलाई को CM बनने के बाद उनके मंत्रिमंडल का यह पहला विस्तार है. उन्होंने 29 जुलाई को विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित किया था. 

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22 वर्ष पहले दफ़न हुए व्यक्ति का नहीं गला शरीर, मिला ज्यों का त्यों


22 वर्ष पहले दफ़न हुए व्यक्ति का नहीं गला शरीर, मिला ज्यों का त्यों

उतर-प्रदेश के बांदा जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, कई लोग इसे देखकर खुदा का करिश्मा मान रहें हैं तो वहीं कई लोग नेक इंसाल का दर्जा दे रहें हैं. बताया जा रहा है कि, यहां 22 वर्ष पहले कब्र मे दफनाए गए एक शख्स का जनाजा ज्यों का त्यों पड़ा मिला है.

 

ये मामला तब सामने आया जब मूसलाधार बारिश के चलते कब्रिस्तान में मिट्टी कटने से एक कब्र धंस गई और उसमें  22 वर्ष पहले दफन एक शख्स का कफन में लिपटा जनाजा़ दिखने लगा. यहां देखते ही देखते मौके पर काफी लोगों पहुंच गए. जब कफन में लिपटी लाश को निकाला गया तो वहां मौजूद सैकड़ों लोग देखकर दंग रह गए. क्योंकि 22 सालों बाद भी लाश ज्यों कि त्यों निकली.

 

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दरअसल, ये मामला उतर-प्रदेश के जिले बांदा के बबेरू कस्बे के अतर्रा रोड स्थित घसिला तालाब के कब्रिस्तान की है. यहां मूसलाधार बारिश से कई कब्रों की मिट्टी बह गई और एक कब्र में दफन जनाजा़ बाहर दिखने लगा. इसके बाद लोगों ने कब्रिस्तान कमेटी को इसकी जानकारी दी. कब्रिस्तान कमेटी के सदस्‍यों द्वारा जब कब्र की धंसी हुई मिट्टी को हटाकर देखा गया, तो उसमें दफनाया गया जनाजा ज्यों का त्यों पड़ा मिला.

 

गौरतलब है कि, इस कब्र में 22 वर्ष पहले 55 वर्षीय पेशे से नाई नसीर अहमद नाम के शख्स को दफनाया गया था. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नसीर अहमद पुत्र अलाउद्दीन निवासी कोर्रही, थाना बिसंडा बबेरू में नाई की दुकान थी. उन्‍हें लगभग 22 वर्ष पहले दफन किया गया था. जबकी दूसरी तरफ मृतक नसीर के एक रिश्तेदार बताते हैं कि उनका कोई बेटा नहीं था. 

 

22 वर्ष पहले उनका निधन हुआ था, जिसके बाद उनलोगों ने ही उनके शव को दफनाया था. लेकिन, आज उनका जनाजा मिटटी धंसने की वजह से बाहर निकल आया. न शव ख़राब हुई थी और न ही कफ़न पर कोई दाग लगा था. हालंकी, बाद में स्थानीय मौलानाओं की मौजूदगी में शव को कल देर रात उसे दूसरी कब्र में दोबारा से दफन किया गया.

 

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