देश का खुदरा व्यापार सरकारी सहायता के अभाव में अपनी मौत मरेगा


देश का खुदरा व्यापार सरकारी सहायता के अभाव में अपनी मौत मरेगा

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने देश में लॉकडाउन की वर्तमान स्थिति का आंकलन करते हुए कहा कि इस अभूतपूर्व कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन से उत्पन्न होने वाली समस्याओं से निपटने के लिए सरकार की ओर से अनेक कदम उठाये गए हैं फिर भी भारतीय व्यापारियों के एक महत्वपूर्ण हिस्से को बेहद असाधारण परिस्थित का सामना करना पड़ेगा और समय रहते यदि कदम नहीं उठाये गए तो इस कठिन समय और वित्तीय संकट के कारण भारत का व्यापार अपनी मौत के मरने के कगार पर खड़ा होगा!

 

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भारत में सात करोड़ छोटे मध्यम व्यापारियों में से लगभग एक करोड़ प्रतिष्ठान व्यवसायिक आवश्यक वस्तुओं के व्यापार से जुड़े हुए हैं इनमें से लगभग 20 प्रतिशत से 25 प्रतिशत ही वर्तमान समय में अपने व्यापार को चालू रख पा सकें हैं और लोगों की रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरी करते हुए राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं! अपने खुद के जीवन और अपने परिवारों की सुरक्षा के बारे में चिंता किए बिना, भारत के स्थानीय किराना स्टोरों ने इन कठिन समय में राष्ट्र के साथ खड़े होने का जबरदस्त संकल्प दिखाया है, जबकि तथाकथित बहुराष्ट्रीय ईकॉमर्स दिग्गज जो अपने तकनीकी विकास के बारे में बड़ी बात करते हैं, सभी ने वर्त्तमान परिस्थितियों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है! देशवासी अब अच्छी तरह से जान गए है कि भारत के नागरिकों की जरूरत का सच्चा मित्र कौन है। पिछले कई दशकों से हर संकट में भारत के व्यापारी एकजुटता में दृढ़ रहे हैं और कैट कोरोना संकट के ऐसे सच्चे योद्धाओं को सलाम करता है।

 

 

श्री भरतिया और श्री खंडेलवाल दोनों ने कहा कि लगभग 6.5 करोड़ से अधिक व्यापारियों ने राष्ट्रीय तालाबंदी के मद्देनजर अपने शटर पूरी तरह से बंद कर दिए हैं और उनके पास राजस्व का कोई साधन नहीं है और वे लंबे समय तक आय के बिना बने रहेंगे। भले ही सरकार ने विभिन्न विनियामक अनुपालन को स्थगित करने और ऋण की किस्तों आदि में कटौती जैसे कुछ उपायों की घोषणा की हो, लेकिन ये उपाय अल्पावधि पैकेज के बिना अल्पावधि में कुछ कार्यशील पूंजी दबाव को कम कर देंगे और ये उपाय अत्यधिक अपर्याप्त होंगे।

 

कैट ने सरकार से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए कहा है कीसभी प्रकार के ऋणों पर प्रभावी लॉकडाउन अवधि के लिए बैंक ब्याज शुल्क की छूट आगे बड़ाई जाए, कार्यशील पूंजी और तरलता को कम करने के लिए तीन महीने के लिए सभी कर भुगतानों को स्थगित करना, किराये की कैपिंग 25% -35% तक करना ताकि मकान मालिक और किरायेदार दोनों इस कठिन समय से बच सकें, लॉकडाउन अवधि के लिए व्यापारियों पर कर्मचारियों को वेतन देने के बोझ में सरकार की सहायता बेहद जरूरी है! सरकार ने कर्मचारियों को पूर्ण वेतन देने का निर्देश जारी किया है जबकि छोटे व्यापारी को बिना किसी राहत के अपने सभी नियमित खर्चों को वहन करना है। हमने सरकार से एक फार्मूला तैयार करने का अनुरोध किया है, जहाँ कुछ प्रतिशत सरकार दे एवं कुछ प्रतिशत व्यापारी तथा कुछ प्रतिशत कर्मचारी भुगते के आधार पर वेतन का भुगतान किया जाए ताकि कर्मचारी और व्यापारी दोनों बच सकें।

और पढ़ें »

खास आपके लिए

Senior Citizen Tiffin Seva

Viral अड्डा

  • news
  • news
  • news
  • news
-

शेयर बाजार में भारी गिरावट से कारोबारी मायूस


शेयर बाजार में भारी गिरावट से कारोबारी मायूस

शेयर बाजार में भारी गिरावट से मायूस हुए देश भर में छोटे, मझले और बड़े कारोबारी. आज भारतीय शेयर बाजार में काफी कमजोरी देखी गई. शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स 90 अंक से टूटा और निफ्टी भी सपाट खुलने के बाद फिसल गया. 

 

\"\"

आज सुबह 9.39 बजे सेंसेक्स पिछले सत्र से 68.36 अंकों यानी 0.18 फीसदी की कमजोरी के साथ 37,259.65 पर कारोबार कर रहा जबकि निफ्टी 34.20 अंक यानी 0.31 फीसदी फिसलकर 10,982.80 पर कारोबार कर रहा था. 

 

इसके साथ BSE के 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सत्र के मुकाबले मामूली कमजोरी के साथ 37,298.73 पर खुला और 37,346.05 तक उछला. मगर, सुस्त कारोबारी रुझान के कारण सेंसेक्स करीब 90 अंक पिसलकर 37,237.47 पर आ गया.

और पढ़ें »

खास आपके लिए

Senior Citizen Tiffin Seva

Viral अड्डा

  • news
  • news
  • news
  • news
-

देश भर में 1 वर्ष में बंद किए गए 5500 ATM और 600 ब्रांच : RBI


देश भर में 1 वर्ष में बंद किए गए 5500 ATM और 600 ब्रांच : RBI

देश में मौजूद सरकारी बैंक बड़े-बड़े शहरों में अपने ATM और ब्रांच को बंद कर रहें हैं. इसकी वजह यह बताई जा रही है कि शहर में रहने वाले लोग इंटरनेट बैंकिंग पर बहुत ज्यादा जोर दे रहें शिफ्ट हो गए हैं, जिसकी वजह से सरकारी बैंकों का ऐसा मानना है कि ब्रांच और ATM जैसे फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को कम किया जा सकता है. बता दें कि, पिछले 1 वर्ष में देश के 10 सरकारी बैंक ने कुल मिलाकर 5,500 ATM और 600 ब्रांच बंद किए हैं.

 

P चिदंबरम CBI की हिरासत में, जानिए आज क्या होगी चिदंबरम से पूछ ताछ

 

बताया जा रहा है कि, देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने जून 2018 से 2019 के बीच 420 ब्रांच और 768 ATM बंद किए हैं. वहीं विजया और देना बैंक को मिलाने के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा ने कुल40 ब्रांच और 274 ATM पर इस बीच शटर गिराया है. इस लिस्ट में पंजाब नैशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया,  केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूनियन बैंक और इलाहाबाद बैंक भी शामिल हैं.

 

गौरतलब है कि, जहां एक तरफ सरकारी बैंक खर्च घटाने के लिए नेटवर्क में कटौती कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट सेक्टर के एक्सिस बैंक, HDFC बैंक और ICICI बैंक ने अपने बैंकिंग नेटवर्क का विस्तार किया है. RBI के आंकड़ों से पता चलता है कि इन बैंकों ने खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में अपने ATM लगाए हैं.

 

मंद बुद्धि बच्चों का मेमोरी पॉवर बढ़ने एवं बैक पैन, जॉइंट पैन, के चमत्कारी उपाय।

 

और पढ़ें »

खास आपके लिए

Senior Citizen Tiffin Seva

Viral अड्डा

  • news
  • news
  • news
  • news
-

वायरल न्यूज़

×