कोरोना महामारी या तीसरे विश्व युद्ध की सुगबुगाहट


कोरोना महामारी या तीसरे विश्व युद्ध की सुगबुगाहट

-सी. के. शर्मा

कोरोना एक महामारी या तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत, इसे समझने के लिए हमें कुछ बातों पर गौर करने की जरूरत है, क्योंकि जैसे जैसे समय बितता जा रहा है यह इसकी महक कोरोना मुद्दे से आ रही है। कोरोना एक वैश्विक महामारी बनकर पूरे विश्व में छा गयी जिसका फैलना या फैलाना ऐसा मुद्दा बन चुका है जिसे अमरीका ने यूएन में उठाया लेकिन चीन की वीटो के कारण उस मुद्दे पर बहस को टाल दिया गया, जिससे पहली बार यूरोप को मालूम हुआ वीटो के गलत इस्तेमाल होने का मतलब क्या होता है।

 

और आज उन्हें लगने लगा है कि यह वीटो पावर का खेल यूएन में नहीं होना चाहिए। क्योंकि भारत देश की समस्या को आज तक अमरीका और यूरोप ने समझने की कोशिश नहीं की थी। पहली बार उन्हें लगा है कि अपने फायदे के लिए गलत लोगों का साथ देना आस्तीन में सांप पालने जैसा है,और वो वहीं कर रहे थे, जैसे भारत भ्रष्टाचार को अपनी आस्तीन में पाल रहा है और अब उसे खत्म करना बिल्कुल वैसा ही एक युद्ध लड़ने जैसा है जैसे युद्ध की सुगबुगाहट विश्व में शुरू हो गयी है।

 

दूसरे कारण पर अगर हम नजर डालें तो चीन ने पहली बार इस बीमारी के ऐसी पिक्चर विश्व में फैलायी जिससे लगा मानव अंत की शुरुआत हो गयी है और एक पैनिक माहौल बनाने में वो कामयाब रहा जिसको और भ्रमित करने के लिए उसने अपना शेयर मार्केट गिरा दिया जिससे पूरे विश्व में हड़कंप मच गया जो वो चाहता था और यूरोपियन इन्वेस्टर ने अपने शेयर मार्केट में बेचने शुरू कर दिए और शेयर वेल्यू इतनी नीचे चलीं गईं जिसकी अमरीकन और यूरोपियन इन्वेस्टर ने सोचा भी नहीं था,

 

क्योंकि वो चीन के महामारी के नाम पर फैलाये गये चक्रव्यूह में वो ऐसे फंसे की पूरा यूरोप, जर्मन, जापानी, और अमरीका के इंवेस्टर अपने शेयर कौड़ियों के भाव बेचकर सड़क पर आ गये और उन्हीं शेयर को देश की आर्थिक बर्बादी का डर दिखाकर चीनी सरकार ने पैकेज लाकर खरीद डालें और एक ही झटके में अपने देश की विदेशी कम्पनियों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर डाला, इसको जब तक अमरीका और यूरोप ने समझा उनकी अर्थव्यवस्था जड़ से चरमरा गई, जिसे साबित करने में आज अमेरिका सबसे ज्यादा मेहनत कर रहा है क्योंकि वो जानते हैं चीन ने उसे कहा पहुंचा दिया है।

 

कोरोना को महामारी बनाने में और उससे पूरे विश्व में कोहराम मचाने में विश्व स्वास्थ्य संगठन का सबसे अहम रोल रहा है जो कि विश्व की सबसे बड़ी भ्रष्ट संस्था है। उसने अनेकों बार ऐसे प्रपंच किये है आपको याद होगा 1984 में जब इस संस्था ने HIV के नाम पर इतना डर फैला दिया था कि लोग एक दूसरे को छुने से डरने लगे थे जिसको बाद में होर्डिंग और एजोटाइज करके समझाया गया की छुने और पप्पी लेने से प्यार फैलता है HIV नहीं, लेकिन इससे भी ज्यादा हेरत आपको अब होगी जब आपको पता चलेगा कि आजतक HIV पर कोई रिसर्च पेपर विश्व स्वास्थ्य संगठन विश्व को नहीं दे पाया है जो साबित कर सके की वो बीमारी वायरस द्वारा मनुष्य से मनुष्य में फैलती है,

 

लेकिन उसके बावजूद भी हमारे देश की सरकार हजारों करोड़ रुपए उस बीमारी से लडने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन को हर साल देती है जिसका बीमारी होना भी प्रश्न चिन्ह अंकित करता है। उसके बाद केलेसटरोल, शुगर की प्रमाणिकता, एच१एन१ ओर ना जाने कितनी बीमारी जो पैदा ही की गयी विश्व मे दवाइयां बैचने के लिए और ऐसा ही कुछ कोरोना से पैदा किया जा रहा है जबकि ये भी एक इन्फ्लुएन्जा बीमारी है, जिसमें मृत्यू दर एक प्रतिशत से भी कम है जिसे धीरे धीरे एम्स के डारेक्टर भी मानने लगे हैं, जबकि इससे कहीं ज्यादा टीवोकलोशीश जिसे हम टी वी बीमारी के नाम से जानते हैं जिसमें भारत में ही हर मिनट एक आदमी की मृत्यु हो जाती है (और वो बीमारी भी एक एनफलुनजा बीमारी ही है) जबकि उसके कारण हर साल पांच लाख लोग भारत मे मर जाते हैं विश्व का आंकड़ा तो आपको डरा देगा लेकिन फिर भी कोन सी बीमारी ज्यादा खतरनाक है ये आपके विवेक पर मैं छोड़ता हूं। इसका फैसला आप खुद करे।

 

फिर इससे इतना डर क्यों। मेरे अनुसार ये चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन के गठजोड़ का नतीजा है जो विश्व को महामारी दिखाई और पूरे विश्व को आर्थिक रूप से समाप्त करने की ओर ले गया, जिससे सब इस बीमारी में उलझे रहे और चीन द्वारा सभी देशों की आर्थिक स्थिति में मजबूत भागीदारी बन गयी।और चीन के साथ भागीदार जैसी स्थिति में विश्व स्वास्थ्य संगठन खड़ा है।

 

अब आप सोचोगे इससे युद्ध जैसी स्थिति कैसे बन रही है वो पिछ्ले कुछ दिनों में अमरीका द्वारा सबसे अधिक हथियारों की खरीद, पहली बार कच्चे तेल का सबसे अधिक भण्डार इकट्ठा करना, भारत को ऐसे समय में 1173 करोड़ डालर का मिसाइल देने का अमरीका द्वारा क़रार और चीन को परमाणु परीक्षण की तैयारी करना और महासागर में मानव निर्मित दीपों पर चीन द्वारा सैनिक ठिकाने बनाकर महासागर में अपना अधिपत्य स्थापित किया जा रहा है जो संकेत है तीसरा विश्व युद्ध का।

 

लेकिन इन सबके बाद भी हमें अपने देश की मोजूदा सरकार और  कम्पनी एक्ट की सराहना करनी चाहिए क्योंकि वो हमारी कम्पनी पर विदेशी आधिपत्य स्थापित करने में विदेशी कम्पनी एक्ट की तरह लचर पंचर नहीं है,वो इतना मजबूत है जो हमें आर्थिक रूप से गुलाम होने से बचाता है और मोजूदा सरकार द्वारा चोतरफा लड़ाई लड़कर देश को विजेता बनाने में लगी होना दिखाता है सरकार के तेजी से फैसले लेने के कारण ही सरकार ने आज एक फैसला किया की कोई भी पड़ोसी देश भारत की कम्पनी में बिना सरकार की मर्जी के हिस्सा नहीं खरीद सकता, जो एच डी एफ सी के एक प्रतिशत शेयर खरीदते ही ले लिया गया, हमें बताती है कि हमारी सरकार और इंटेलिजेंस एजेंसियो के वो अधिकारी जिन्हें कोई नहीं जानता हर समय जागी हुए है और मोजूदा परस्थितियों में भारत का नेतृत्व एक महान नेता कर रहा है यह प्रमाणित करता है।

 

अगर आप चाहते हैं कि हमारा देश इन सभी बीमारियों और षड्यंत्र से हर  बार लड़कर विजेता बने तो देश में भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने की कसम खाओ और भ्रष्ट व्यवस्था से नफ़रत करनी शुरू करो, सरकारी सिस्टम ही नहीं देश के हर सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए वचनबद्ध हो, अपने बच्चों को जन्म से मेहनत करना सिखाये, उन्हें समझाते कोई भी सफलता उन्हें केवल और केवल अपने मेहनत से मिलनी चाहिए वो रिश्वतखोरी को बढ़ावा देकर ना मिली हो और ना ही किसी का हक मार कर ना प्राप्त हुई हो जिसके कारण हमारे देश में मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन मिलेगा और देश को आने वाले समय में ईमानदार, निष्पक्ष और मेहनतकश डाक्टर, इंजीनियर, वेज्ञानिक और प्रोफेशनल पैदा होंगे जो अपनी मेहनत के बल पर वेक्सीन, दवाइयां, और उपकरणों की खोज कर पायेंगे जिससे देश अपने बलबूते पर समस्याओं का सामना कर पायेगा और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी भ्रष्ट संस्था की हमें जरूरत नहीं होगी।

 

ये लॉक डाउन हमें बहुत कुछ सिखाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, हमें आज अपने आपको और अपने बच्चों को सबसे पहले भारतीय बनाने की शुरुआत करनी होगी, क्योंकि अब तक हम अधिकारी, बिजनेस मैन, प्रोफेशनल, डाक्टर, इंजीनियर और नेता तो बन गये लेकिन भारतीय बनने का प्रयास कम रहा जिसे बढ़ाकर हमें अपनी रगो में लहू बनकर दौड़ाना है, हम कितने भी बड़े अधिकारी बिजनेस मैन नेता क्यों ना हों, अपने कार्यालय में आते हर ईमानदार व्यक्तित्व का अपनी सीट से खड़ा होकर उसकी ईमानदारी का अभिनन्दन करें और उसे प्रोत्साहित करें ईमानदार व्यवस्था कायम करने के लिए, क्योंकि चाहे ये वायरस लैब मैं बनाया गया बाइलोजिकल हथियार हो या जन्तु से मानव में फैलने वाला वायरस, या आर्थिक वायरस ऐसे वायरस की शुरुआत मानव सभ्यता में हो चुकी है, जिसका सामना हम भ्रष्ट बनकर या भ्रष्ट व्यवस्था को स्थापि होने में सहायक होकर नहीं कर पायेंगे और अपने कारण मानव सभ्यता को समाप्त होते देखेंगे। समय है हमें मिलकर इसे बदलना होगा। क्योंकि मुझे यकीन है हम ये कर सकते हैं।

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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