कांस्टेबल रवि प्रताप सिंह बने गरीबों के मसीहा


अयोध्या में लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार हुए दिहाड़ी मजदूरों के लिए संकट की स्थिति पैदा हो गई है. ऐसे में शहर की कई संस्थाएं और व्यक्ति सामने आ रहे हैं जो इन परिवारों के लिए रोटी की व्यवस्था कर रहे हैं. इतना ही नहीं अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में तैनात कांस्टेबल रवि प्रताप सिंह ने निर्धन परिवारों की भूख मिटाने का नेक कार्य किया है.

 

बता दें कि देश में इस समय पूरी तरह सन्नाटा पसर गया है. ऐसे में दिहाड़ी मजदूरों के लिए संकट की स्थिति बन गई है. रोज काम करके अपने पेट भरने वालों के लिए अब भोजन के लिए भटक रहे हैं. राम नगरी में दुख निवारण गुरुद्वारा समिति से संचालित लंगर बाहर बड़ी संख्या में शहर में बेसहारा लोगों को भोजन उपलब्ध करा रहा है.

 

वहीं शनिवार को राम जन्मभूमि थाने में तैनात पुलिस कांस्टेबल रवि प्रताप सिंह और उनके सहयोगी रंजीत सिंह ने निर्धन परिवारों को राशन के पैकेट उपलब्ध कराए. आपको बता दें कि कांस्टेबल जब प्रताप सिंह और उनके सहयोगी ने गरीबों को यह मदद अपने खर्चे पर की है.

 

उन्होंने 4 गरीब परिवारों को राशन का एक पैकेट उपलब्ध कराया. जिसमें  5 किलो आटा, 2 किलो चावल, 1 किलो दाल, 200 ग्राम नमक का पैकेट, 500 ग्राम चाय पत्ती और 50 ग्राम मसाला का पाउच चारों गरीब परिवारों को दिया गया. भरपेट भोजन की व्यवस्था पाकर जरूरतमंद परिवार के लोग बेहद खुश दिखे. निर्धन परिवार की महिला शिव दासी ने कहा कि पुलिस कांस्टेबल का यह कार्य बेहद सराहनीय है.

 

अब उन्हें भूखा नहीं रहना पड़ेगा. राम कुमारी ने कहा कि वृद्धावस्था में हम लाचार हैं. काम नहीं कर सकते. परिवार के लोग भी बाजारों के बंद होने से घर पर बैठे हैं जिसके चलते घर में आई की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में कांस्टेबल की ओर से दिया गया राशन उनके परिवार की भूख मिटाएगा. कांस्टेबल से प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने यह मदद अपने खर्चे पर की है. इन गरीब परिवारों की मदद के लिए भगवान की प्रेरणा से वे उनके पास पहुंचे और उन्हें राशन के पैकेट उपलब्ध कराया.

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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