कांग्रेस और पूरा देश हमारी सैनिक परिवारों के साथ खड़ा है- सोनिया गांधी


कांग्रेस और पूरा देश हमारी सैनिक परिवारों के साथ खड़ा है- सोनिया गांधी

 

कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने कल सर्वदलीय बैठक में कहा कि "कांग्रेस और पूरा देश हमारी सेनाओं, सैनिक परिवारों और शहीदों के साथ खड़ा है और सेना की मजबूती के लिए हम सब कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं सर्वदलीय बैठक के बाद प्रधानमंत्री जी के संबोधन ने राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता लिए हर देशवासी को हक्का-बक्का और आश्चर्यचकित कर दिया: प्रधानमंत्री जी का बयान देश के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख के बयान के बिलकुल विपरीत है।

 

अगर प्रधानमंत्री जी द्वारा कही गई बात सही है, तो कुछ सवाल खड़े होते हैं: अगर चीनी सेना ने LAC के पार भारतीय सीमा में घुसपैठ नहीं की थी या नहीं की है, तो 5-6 मई 2020 का भारतीय और चीनी सेना के बीच फेस ऑफ के क्या मायने हैं 5 मई और 6 जून के बीच वो क्या मुद्दे थे, जिन पर हमारी भारतीय सेना के कमांडर और उनके चीनी समकक्ष वार्तालाप कर रहे थे?

 

इस आपसी चर्चा का विषय क्या था? अगर चीनी सेना ने भारतीय भूभाग पर कब्जा नहीं कर रखा था, तो 15-16 जून का खूनी संघर्ष कहाँ हुआ, जिसमें हमारे जवानों की शहादत हुई? क्या ये सही नहीं कि हमारे 20 सैनिक शहीद हुए और लगभग 85 सैनिक घायल हुए। ये सब भारत माँ के सपूत हैं : अगर चीनी सेना ने भारतीय क्षेत्र में कब्जा नहीं किया, तो फिर विदेश मंत्री ने साफ तौर से बयान देकर चीनी सेना से पूर्णतः पुरानी यथास्थिति बनाए रखने की मांग क्यों रखी थी?

 

विदेश मंत्री द्वारा "status quo ante" या संघर्ष से पहले की यथास्थिति बनाए रखने की मांग के क्या मायने हैं?  जब भारत सरकार ने ये कहा कि भारतीय और चीनी सेना की "Disengagement" की कार्रवाई चल रही है यानी चीनी सेना अपनी पुरानी स्थिति पर लौट जाएगी। तो इसके और क्या मायने समझे जाएं? : कल प्रधानमंत्री के बयान के बाद चीन ने भारत पर गलत तरीके से इल्जाम लगाते हुए ये कहा कि गलवान घाटी का पूरा क्षेत्र चीन का है, जो सही नहीं है। भारत सरकार का इस चीनी दावे के क्या सटीक जवाब है? क्या भारत सरकार को आगे आकर इस चीनी दावे को सिरे से खारिज नहीं करना चाहिए? प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि सैनिकों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी, उसके क्या मायने हैं?

 

हमारे सैनिकों की शहादत क्यों और कहां हुई? : प्रधानमंत्री जी ये कैसे सुनिश्चित करेंगे कि हमारे कर्नल बी. संतोष और 19 सैनिकों की शहादत व्यर्थ न जाए? : हम ये सवाल पूछते हुए एक बार फिर दोहराते हैं कि कांग्रेस पार्टी सरकार द्वारा भारतीय भूभागीय अखंडता के लिए उठाए गए हर कदम के साथ है। हम हमारी सेना के साथ अटूट तरीके से खड़े हैं : हम राष्ट्रहित में ये सवाल पूछ रहे हैं, ताकि देश संयुक्त और एकजुटता का परिचय दे सके : कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला



बीजेपी भूल जाती है कि वह सत्ताधारी पार्टी है, वह सरकार में है। पिछले 6 वर्षों से और अब जो हो रहा है, उसके प्रति जवाबदेह हैं। लोग भाजपा के इन मूर्खतापूर्ण बचावों के माध्यम से सवालों से बचने और उचित जवाब न देने के उनके प्रयास देख सकते हैं: भारत सरकार को कल का इंतजार न करते हुए गलवान घाटी पर चीनी दावे का आज ही जवाब देना चाहिए, ताकि हमारी स्थिति स्पष्ट हो जाए:  कांग्रेस नेता पि चिताम्बरम

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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