सीएम ठाकरे ने नागरिकता संशोधन कानून को दी हरी झंडी कहा- CAA को हां NRC को ना


सीएम ठाकरे ने नागरिकता संशोधन कानून को दी हरी झंडी कहा- CAA को हां NRC को ना

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के प्रमुख समाचार पत्र सामना को दिए इंटरव्यू में नागरिकता संशोधन कानून को समर्थन अथवा असमर्थन देने के सवाल पर जबाव देते हुए कहा कि हम नागरिकता संशोधन कानून का दिल की गहराई से ससमर्थन करते हैं क्योंकि ये बाहर देशों में रह रहे अल्पसंख्यक हिन्दुओं के लिए सराहनीय कदम है क्योंकि भारत एकलौता हिन्दू देश है जो हिन्दू शरणार्थियों को शरण दे सकता है।

 

इसके साथ ही सिक्ख और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए भी भारत ही एकमात्र देश है। जहां, उन्हें आसानी से शरण मिल सकती है लेकिन अन्य देशों में हिन्दूओं, सिक्खों और बौद्धों को शरण नहीं मिल सकती है। इसलिए हमें नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करना चाहिए। जहां तक केवल मुस्लिम वर्ग की बात है तो उनके लिए पूरे विश्व में दर्जनों देश है जो उन्हें आसानी से शरण दे सकते हैं।

 

 

आप देख सकते है सीरिया और लीबिया से पलायन हुए लोग आसानी से अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोपीय देशों में शरण पाने में सफल हुए हैं। वहीं, म्यांमार से पलायन हुए रोहंगिया मुस्लिम को भी बंगलादेश में शरण मिल गयी लेकिन पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दुओं और सिक्खों के साथ अत्याचार और दुर्व्यवहार हो रहा है। उनकी खबर लेने वाला कोई है, वो कहां जाएं। उनके पास कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में ये हमारी धार्मिक कर्तव्य है कि हम उन्हें अपने देश में शरण दें।

 

वहीं 'NRC लागू किये जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम महाराष्ट्र में एनआरसी लागू नहीं होने देंगे क्योंकि इससे हिन्दू और मुस्लिम सभी वर्गों के लोगों को नागरिकता साबित करने में काफी मुश्किलात आएगी क्योंकि गुजरात से अलग होने के बाद महाराष्ट्र में बसे लोगों के पास पर्याप्त दस्तावेज नहीं होंगे। जबकि हिंदुत्व के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमें हिंदुत्व को नहीं छोड़ा है। हम आज भी हिन्दू और मराठी मानुस के लिए आगे खड़े हैं। हमने कांग्रेस से मिलकर सरकार बनाई है लेकिन अपनी विचार धारा से कभी समझता नहीं किया है।

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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