जानें बिहार राजनीति के चिराग कहे जाने वाले राजनेता और सांसद चिराग पासवान की जीवनी


जानें बिहार राजनीति के चिराग कहे जाने वाले राजनेता और सांसद चिराग पासवान की जीवनी

बिहार राजनीति के चिराग कहे जाने वाले और लोक जनशक्ति पार्टी के उत्तराधिकारी चिराग पासवान किसी पहचान के मोहताज़ नहीं हैं। इन्होनें अपनी राजनैतिक सूझ बुझ से लोक जनशक्ति पार्टी की डूबती नैया को पार लगाया है। जिस कारण आज लोक जनशक्ति पार्टी बिहार विधान सभा चुनाव के लिए 48 सीटों पर दावेदारी कर रही है। आज हम आपको बिहार राजनीति के चिराग कहे जाने वाले राजनेता चिराग पासवान की जीवनी बता रहे हैं।

 

चिराग कुमार पासवान का जन्म  31 अक्टूबर 1982 को बिहार राज्य के खगरिया जिले में हुआ था। इनके पिता का नाम राम विलास पासवान है जोकि माननीय खाद्य एवं उत्पादन मंत्री हैं और माता का नाम रीना पासवान है जोकि पूर्व में एयर होस्टेस रही हैं।

 

चिराग पासवान ने अपनी प्रारंभिक पढाई एयर फ़ोर्स गोल्डन जुबली इंस्टिट्यूट, दिल्ली से की। इसके बाद उन्होंने अपनी माध्यमिक पढाई 2003 में नई दिल्ली में स्थित स्वास्थशी संस्थान से कंप्यूटर विज्ञान में की । इसके बाद 2005 में झांसी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान से बी. टेक किया।

 

 

राजनैतिक करियर

राजनीति में आने से पहले चिराग पासवान ने अपनी किस्मत बॉलीवुड की दुनिया में किस्मत आजमाई लेकिन एक फिल्म 'मिले ना मिले हम' के बाद इन्होने फिल्म से दूरी बना ली। इसकी मुख्य वजह उस फिल्म का हिट भी नहीं होना था। इसके बाद चिराग पासवान ने अपनी किस्मत राजनीति में आजमाई और इस क्षेत्र में उनको सफलता हाथ लगी और 2014 में 16 वीं लोकसभा चुनाव में  बिहार के जमुई लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से वे सांसद चुने गये। यहीं से इनकी राजनैतिक करियर की शुरुआत हुई।

 

चिराग पासवान ने पार्टी की कमान उस समय अपने हाथ में ली थी और अपनी राजनैतिक करियर की शुरुआत उस समय की थी। जब लोजपा का अस्तित्व बिहार से मिट गया था और नितीश कुमार, बीजेपी से अलग हो गए। इस समय चिराग पासवान ने बीजेपी से हाथ मिलाई और स्वंय के साथ साथ पार्टी को भी बिहार में खोया हुआ सम्मान वापस दिलाया।

 

इस ऐतिहासिक फैसले से लोजपा का कायापलट हो गया। इसके बाद मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में रामविलास पासवान केंद्रीय मंत्री बने। वहीं 2019 में 17 वीं लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान एक बार फिर से जमुई से सांसद बने। आज बिहार को चिराग पासवान की राजनीति से बड़ी उम्मीद है।

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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