स्कूल फीस को लेकर बच्चों की योगी सरकार से गुहार


स्कूल फीस को लेकर बच्चों की योगी सरकार से गुहार

बच्चे बोले योगी जी प्लीज 'स्कूलों से आने वाले फीस जमा के मैसेज पर लगाओं रोक'

स्कूलों का अभिभावकों को फरमान, 'नहीं भरी स्कूल फीस तो बच्चों की रोक देंगे आनलाइन क्लास'

पेरेंटस को प्रतिदिन भेजे जा रहे मैसेज और किया जा रहा फोन।

बच्चों ने की जिला प्रशासन से हस्ताक्षेप की मांग।

 

मेरठ हे योगी जी हमारी आपसे बस यहीं अपील है कि इन दिनों कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते हमारे पेरेंटस घर से बाहर अपने काम के लिए नहीं निकल सकते। ऐसे में उन पर स्कूल वाले फीस का दबाव नहीं बनाए। ये कहना है कक्षा 10 में पढने वाली नुपुर का। कुछ ऐसे ही मैसेज और स्लोगल लिए आजकल मेरठ के बच्चे सूबे के मुख्यमंत्री योगी से गुहार लगा रहे हैं। वहीं एक अन्य छात्रा माही का कहना है कि स्कूल के ग्रुपों में प्रतिदिन टीचर मैसेज डालती है कि स्कूल की फीस पे करो। जब हमारे परिजन बाहर ही नहीं जा पा रहे तो स्कूल की फीस के लिए पैसा कहां से लाए। बाहर निकलने पर पिता जी को पुलिस पकड़ लेती है। हमारी योगी जी से सिर्फ यहीं अपील है कि वे स्कूल की फीस माफ करवाए।

 

बता दे कि इन दिनों मेरठ प्रशासन की लापरवाही और लचर व्यवस्था के चलते अब स्कूल प्रशासन अभिभावकों को फरमान जारी कर रहे हैं। स्कूल धमकी दे रहे हैं कि अगर बच्चों की स्कूल फीस नहीं जमा की तो बच्चों को आनलाइन क्लास में बैठने से रोक देंगे। मेरठ के अभिभावक अब जिला प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि वे इस मामले में हस्ताक्षेप करें।

 

यर्थाथ के सारथी संस्था की अध्यक्ष जुही त्यागी का कहना है कि कोरोना संकट के दौरान हम लोग घर पर बैठे हैं। हमारी डीएम के माध्यम से सीएम योगी जी से माग है कि इस लॉकडाउन समय की फीस मांफ करवाई जाए। उन्होंने कहा कि आनलाइन शिक्षा से बच्चों के स्वास्थ पर भी प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि 'जब गुड़गांव और नोएडा के स्कूल ऐसा कर सकते हैं तो मेरठ के स्कूल क्यों नहीं कर सकते हैं। सरकार को लॉकडाउन के लिए राहत पैकेज की घोषणा करके स्कूलों की ओर से फीस तलबी का समाधान किया जाना चाहिए।' वहीं जिन छात्रों की फीस जमा नहीं हुई है। उनकी फीस भरने के लिए स्कूल की ओर से मेसेज भेज रहे हैं। 

 

मेरठ पैरंट्स एसोसिएशन ने भी डीएम को पत्र लिखा है और लॉकडाउन की अवधि तक स्कूल फीस जमा से राहत दिलाने का आग्रह किया है। एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा है, 'चूंकि छोटे और मध्यम उद्यमों से कमाई बंद हो गई है और लोगों ने जो बचाकर रखा था, उसे भी रोजाना की जरूरतों के लिए खर्च कर दिया है, ऐसे में लोगों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। हम आग्रह करते हैं कि कम से कम तीन महीने के लिए फीस कलेक्शन पर रोक लगा दी जाए। जुही ने कहा कि जब बच्चों के मोबाइल पर स्कूल से मैसेज आते हैं तो हमको बच्चों के सामने शर्मिदा होना पड़ता है। ऐसे समय में जबकि बच्चों को दो वक्त की रोटी खिलाने में परेशानी का सामाना करना पड़ रहा है तो फीस कैसे भर सकते हैं।

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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