चंद्रयान-2 : वर्ल्‍ड मीडिया ने की इसरो की तारीफ


चंद्रयान-2 : वर्ल्‍ड मीडिया ने की इसरो की तारीफ

चंद्रयान-2 मिशन को कल बीते देर रात उस समय झटका लगा, जब लैंडर विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया. चंद्रमा की सतह से महज 2 किलोमीटर पहले विक्रम का पृथ्‍वी से संपर्क टूट गया. आखिरी 15 मिनट जो सबसे मुश्‍किल माने जा रहे थे, उसे ये मिशन पूरा नहीं कर पाया. भारत के इस अहम मिशन पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुईं थीं. हालांकि भारत को इस मिशन में लगे झटके के बाद भी वर्ल्‍ड मीडिया ने इसरो की तारीफ की है.

 

आइए जानते हैं वर्ल्‍ड मीडिया ने इस मिशन पर क्‍या क्या कहा..

 

अमेरिकी ऑनलाइन मैगजीन वायर्ड के अनुसार, "इस मिशन में अब तक सब कुछ खत्‍म नहीं हुआ है. हो सकता है कि लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग में नाकामी और प्रज्ञान रोवर से संपर्क खत्‍म होने से इसरो को झटका लगा हो, लेकिन मिशन में अभी सब कुछ खत्‍म नहीं हुआ है."

 

जबकी न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स ने लिखा है, "भले सॉफ्ट लैंडिंग में इसरो को नाकामी मिली हो, लेकिन ऑर्बिटर अभी भी ऑपरेशन में है. हालांकि सॉफ्ट लैंडिंग न हो पाने की वजह से भारत को एलीट क्‍लब में शामिल होने के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना होगा."

 

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जबकी ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने लिखा, "संपर्क टूटने से चंद्रयान-2 को आखिरी समय में नाकामी मिली. लेकिन फिर भी ये कई मायनो में अहम है. भारत वहां पहुंच रहा है जहां आने वाले समय में आदमी को बसाने की योजना है."

 

इसके अलावा वॉशिंगटन पोस्‍ट ने अपने आर्टिकल में कहा, "ये घटना भारत के तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष मिशन के लिए एक झटका है. हालांकि इस मिशन में जो कामयाबी मिली, वह देश की युवा आबादी के सपनों को साकार करने का जीता जागता उदाहरण है."

 

इसपर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र के अध्यक्ष के़ सिवन ने कहा, "विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई तक सामान्य तरीके से नीचे उतरा. इसके बाद लैंडर का धरती से संपर्क टूट गया. आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है."

 

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आपको बता दें कि, चंद्रयान-2 मिशन के तहत भेजा गया 1,471 किलोग्राम वजनी लैंडर ‘विक्रम’ भारत का पहला मिशन था, जो स्वदेशी तकनीक की मदद से चंद्रमा पर खोज करने के लिए भेजा गया था. लैंडर का यह नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ.विक्रम ए साराभाई पर दिया गया था.

 

लैंडर विक्रम के साथ संपर्क टूटने की वजहों का अध्ययन विश्लेषण किया जाएगा. जिन चुनौतियों की वजह से इस मिशन को अब तक का सबसे कठिन मिशन माना जा रहा था. उससे निपटने के नए तरीके भी ढूंढे जाएंगे.

 

इसके बाद PM मोदी ने कहा कि आज भले ही कुछ रुकावटें हाथ लगी हो, लेकिन इससे हमारा हौसला कमजोर नहीं पड़ा है, बल्कि और मजबूत हुआ है. आज हमारे रास्ते में भले ही एक रुकावट आई हो, लेकिन इससे हम अपनी मंजिल के रास्ते से डिगे नहीं हैं. इसरो का मिशन चंद्रयान-2 भले ही इतिहास नहीं बना सका लेकिन वैज्ञानिकों के जज्बे को देश सलाम कर रहा है.

 

 

 

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