बजट सत्र : सीएए पर विपक्ष ने सरकार को घेरा, प्रवेश वर्मा के बयान पर विपक्ष का वॉकआउट


बजट सत्र :  सीएए पर विपक्ष ने सरकार को घेरा, प्रवेश वर्मा के बयान पर विपक्ष का वॉकआउट

संसद का बजट सत्र आज से 31 जनवरी से शुरू हो चुका है जहां 1 फरवरी को वर्ष 2020-21 का आम बजट केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा संसद में पेश किया है. वहीं आज बजट सत्र के चौथे दिन लोकसभा में CAA को लेकर जमकर हंगामा हुआ और इस दौरान विपक्ष ने जमकर सरकार को इस मुद्दे पर घेरा.

 

 

आज बजट सत्र राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान दिल्ली से भाजपा सांसद प्रवेश शर्मा द्वारा दिए गए बयान पर लोकसभा में जमकर हो हल्ला हुआ और नेता सरकार और विपक्ष एकदूसरे को घेरते नजर आए. दरअसल, आज लोकसभा में प्रवेश वर्मा ने शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राजीव फिरोज गांधी की सरकार नहीं है.

 

 

शाहीन बाग में पिछेल डेढ़ महीने से जारी CAA विरोध प्रदर्शन पर प्रवेश वर्मा ने कहा कि शाही बाग में नागरिकता कानून का विरोध नहीं हो रहा, बल्कि वहां प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को मारने की धमकी दी जा रही है. हिंदुस्तान से अलग आजादी के नारे लगाए जा रहे हैं. मैं ऐसे लोगों को कहना चाहता हूं कि ये राजीव गांधी या फिरोज खान की सरकार नहीं है.

 

 

ये मोदी की सरकार है. हम किसी भी सूरत में CAA वापस नहीं लेंगे.' भाजपा सांसद परवेश वर्मा यही नहीं रुके. उन्होंने विपक्ष से 'जय श्री राम' के नारे लगाने को कहा. उनके इस बयान पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जाहिर करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया.

 

 

परवेश वर्मा ने आज लोकसभा में कांग्रेस पार्टी को लेकर कहा कि 'इस दुनिया में दो चीजें गिनाना नामुमकिन है. आज सदन के शुरू होते ही विपक्ष ने वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर को भी उनके द्वारा दिए गाए बयान पर घेरा. लोकसभा में जैसे ही वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर एक सवाल का जवाब देने के लिए उठे तो विपक्ष ने गोली मारना बंद करो, अनुराग ठाकपर शर्म करो, शर्म करो के नारे लगाकर हूंटिंग की.

 

 

गौरतलब है कि अनुराग ठाकुर ने एक चुनाव  सभी के दौरान आपत्तिजनक नारे लगवाए थे. दिल्ली की एक रैली में ठाकुर ने कहा था कि देश के गद्दारों को गोली मारो। वहीं  कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने देश में सीएए के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन पर कहा कि, 'देश के आम लोग संविधान को बचाने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं।

 

 

 

वह संविधान को पकड़कर विरोध कर रहे हैं और राष्ट्रीय गान गा रहे हैं लेकिन उनपर गोलियां चलाई जा रही हैं. इस दौरान विपक्ष  के नेताओं ने 'संविधान को बचाओ, हमारे भारत को बचाओ। नो टू सीएए' के नारे लगाए और सरकार को जमकर घेरा. 

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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