जानें बीजेपी के तेज़तर्रार नेता प्रकाश जावेड़कर की जीवनी


जानें बीजेपी के तेज़तर्रार नेता प्रकाश जावेड़कर की जीवनी

भारतीय जनता पार्टी के कुशल प्रवक्ता और मंझे राजेनता प्रकाश जावेड़कर अपनी बेबाक शैली के लिए जाने जाते हैं। इनकी कुशल एवं  साफ़ छवि वाली राजनीति से पुरी दुनिया वाकिफ है। ये उस वक्त लाइम लाइट में आये जब वोट के बदले नोट कांड का पर्दाफाश किया गया। इससे पहले भी जावेड़कर अपनी उग्र एवं तेज़तर्रार राजनीति के लिए जाने जाते रहे हैं। आज हम प्रकाश जावेड़कर की जीवनी पर प्रकश डालने जा रहे हैं। आइये जानते हैं।

 

व्यक्तित्व जीवन
प्रकाश जावड़ेकर का जन्‍म 30 जनवरी 1951 को महाराष्‍ट्र के पुणे शहर में हुआ था। इनके पता का नाम  केशव कृष्ण जावड़ेकर पेशे से पत्रकार रहे हैं। जबकि माता रजनी जावड़ेकर पेशे से अध्यापिका रही है। इन्होने अपने प्रारम्भिक एवं उच्च शिक्षा यहीं से प्राप्त की है। इन्होने णे विश्‍वविद्यालय में बी.कॉम किया है। इनकी पत्नी की नाम पत्नी डॉ प्रची जावड़ेकर जो इंदिरा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, पुणे के पूर्व निदेशक हैं। वहीं दो बेटे आशुतोष जावड़ेकर दंत चिकित्सक हैं और अपूर्व जावड़ेकर  बोस्टन विश्वविद्यालय से इकोनॉमिक्स में पीएचडी कर रहे हैं।

 

 

राजनैतिक जीवन
प्रकाश अपने स्टूडेंट्स लाइफ से राजनीति कर रहे हैं और उन्होंने 1971 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ज्वाइन की थी और इसी दौरान उन्होंने महाराष्‍ट्र बैंक में ग्रामीण विकास विभाग, सिक यूनिट सेल में लगभग दस वर्षों तक काम किया। जब इंदिरा गाँधी सरकार के कार्यकाल में आपातकाल लगा तो उन्होंने सत्‍याग्रह आंदोलन का नेतृत्‍व भी किया।

 

इस विरोध के लिए उन्हें सोलह महीने तक जेल में रहना पड़ा था। इसी दरम्यान उनकी मुलाकात बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से हुई थी और  उनसे उन्होंने सम्पर्क जेल से रिहा होने के बाद भी बनाया रखा। इसी वर्ष उन्हें पुणे विश्‍वविद्यालय का सीनेट चुना गया और  1984 में जावेड़कर सक्रिय राजनीति से जुड़े, जब उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्‍ट्रीय सचिव व जनरल सेक्रेटरी चुना गया।

 

 

बीजेपी में उनके योगदान के लिए उन्हें महाराष्‍ट्र में  राज्‍य का सचिव और बीजेपी प्रचार समिति का प्रमुख नियुक्त किया गया और फिर उन्हें महाराष्ट्र बीजेपी का प्रवक्ता बनाया गया। इसके एक साल बाद 1995 में राज्‍य के प्‍लानिंग बोर्ड के कार्यकारी अध्‍यक्ष भी बनाये गए। इस कार्य को जावेडकर ने बड़ी लगन और शिद्दत से पूरा किया। उनके इस सराहनीय कार्य के लिए वर्ष 2000 में वे महाराष्‍ट्र सरकार में आईटी विभाग के टॉस्‍क फोर्स के चेयरमैन बनाया।

 

जब 2004 में राष्टीय जनतांत्रिक पार्टी को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ। उस समय इन्होने बीजेपी की कमान प्रवक्ता के रूप में संभाली और लगभग दस सालों तक सेवा दी और जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी 2014 में बड़ी पार्टी बनकर उभरी तो उस समय पीएम मोदी ने सांसद नहीं होने के बावजूद प्रकाश जावेड़कर को कैबिनेट में जगह दी। उस समय जावेड़कर को तीन विभाग में स्वतन्त्र रूप से कार्यभार सौंपा गया। फिर 2016 में जावेड़कर को देश का शिक्षा मंत्री बनाया गया। अब जबकि मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल चल रहा है तो इस समय जावेड़कर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के जिम्मेवारी संभाले हैं।

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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