जानें मोदी और शाह के करीबी चुनावी रणनीतिकार धर्मेंद्र प्रधान की जीवनी


जानें मोदी और शाह के करीबी चुनावी रणनीतिकार धर्मेंद्र प्रधान की जीवनी

2014 लोकसभा चुनाव में बिहार में बीजेपी की जीत के सूत्रधार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह के करीबी सहयोगी और भरोसेमंद व्यक्ति धर्मेंद्र देवेन्द्र प्रधान अपनी चाणक्य निति के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान में धर्मेंद्र देवेन्द्र प्रधान भारत के पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं इस्पात मंत्री हैं। इनकी कूटनीति से बिहार में बीजेपी की वापसी हो पाई और आज बिहार में बीजेपी प्रमुख पार्टियों में से एक है। आज हम आपको इनकी जीवनी बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं।

 

धर्मेंद्र देवेन्द्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा राज्य के तालचेर में हुआ था। इनके पिता का नाम देबेन्द्र प्रधान है जो पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रहे हैं। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा तालचेर से की और इसके बाद उच्च एवं माध्यमिक शिक्षा ओडिशा के प्रमुख शैक्षिक केंद्र उत्कल विश्वविद्यालय से की है। इनकी शादी यंग लिम से हुई और इनके परिवार में दो बच्चे हैं।

 

राजनैतिक करियर

प्रधान ने अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता के रूप में की। इसके दो वर्ष बाद वे 1985 में तालचेर कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष बने। इसके बाद इन्होंने अपनी सेवा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में दी और फिर 1995 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रिय सचिव बनाये गये। यहीं से इन्होंने अपनी पकड़ ओडिशा की राजनीति में मजबूत करने की शुरुआत की और फिर 2000 ओडिशा विधान सभा चुनाव में पल्हदा विधानसभा से विधायक बन विधान सभा पहुंचे।

 

 

इसके बाद वे 2004-2006 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये गये। यहीं से उनकी देश व्यापी राजनीति करियर की शुरुआत हुई और फिर 2004 में वे ओडिशा के देवगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़े और इस चुनाव में उन्हें जीत हासिल हुई। इस तरह से एक सामान्य कार्यकर्ता से अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत करने वाले प्रधान सांसद बने। इन्होंने अपने कार्यकाल बखूभी पूरा किया।

 

इसी बीच उन्हें कई अन्य जिम्मेवारी भी सौंपी गयी। जिसमें 2007-2010 तक वे छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रभारी बनाये गए। 2007-2010 तक वे बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव पद की जिम्मेवारी संभाली। जब झारखण्ड में विधान सभा चुनाव हुई तो इस चुनाव में वे झारखंड बीजेपी के प्रभारी बने। इसके बाद 2010 में वे भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रभारी और बिहार बीजेपी के सह प्रभारी भी बने।

 

इसी वर्ष प्रधान भारतीय जनता पार्टी के अखिल भारतीय महासचिव बने और इस पद पर प्रधान आज भी आसीन हैं। इसके एक वर्ष बाद उन्हें कर्नाटक बीजेपी का प्रभारी बनाया गया। इस पद पर प्रधान 2013 तक रहे। फिर उन्हें बिहार बीजेपी का प्रभारी बनाया गया है। जिस पद की जिम्मेवारी आज भी प्रधान के हाथों में हैं।

 

इसी समय में वे बिहार से राज्य सभा सांसद चुने गये और 2018 तक राज्य सभा सांसद रहे। इस दरम्यान उन्हें मोदी सरकार में पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं इस्पात मंत्री बनाया गया। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में वे फ़िलहाल मध्य प्रदेश से राज्य सभा सांसद है और वर्तमान में पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं इस्पात मंत्री की जिम्मेवारी संभाली है।

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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