जानिए गुजरात के जूनियर जनक और आधुनिक भारत के चाणक्य अमित शाह की जीवनी


जानिए गुजरात के जूनियर जनक और आधुनिक भारत के चाणक्य अमित शाह की जीवनी

भारत के वर्तमान गृहमंत्री श्री अमित शाह हैं। जिन्होंने अपने कार्यकाल के महज चंद महीनों में भारतीय इतिहास की दिशा और बदल दी है। श्री अमित शाह ने सबसे पहले जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35A को निरस्त कर जम्मू कश्मीर को दो भागो में बाँट कर उसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिलाया। इसके बाद वर्षों से चली आ रही राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद को भी शांतिपूर्ण ढंग (अदालत के फैसले के बाद) से हल किया, और अब नागरिकता संशोधन कानून को लागू किया। उनके इस साहसिक और ऐतिहासिक फैसले से अब उनकी तुलना वल्लभ भाई पटेल से की जाने लगी हैं। ऐसे में आज हम आपको अमित शाह की जीवनी के बारे में बताने जा रहे हैं।

 

अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई में हुआ था। वे एक गुजराती वैष्णव और रईस बनिया परिवार से ताल्लुक रखते हैं। इनका गाँव गुजरात राज्य के पाटण जिले के चँन्दूर में है। इन्होंने अपनी प्रारंभिक पढाई मेहसाणा से की। इसके बाद बॉयोकेमिस्ट्री की पढाई अहमदाबाद से की। इसी उम्र में (1982 में) अमित शाह ने आरएसएस ज्वाइन की और यहीं पर उनकी मुलाकात देश के गुजरात के पूर्व सीएम श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी से हुई और फिर 1983 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ज्वाइन की और पढाई पूरी होने के बाद अमित शाह अपने पिता के बिजनेस को संभालने लगे।

 

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इसके तकरीबन पांच वर्ष बाद अमित शाह ने बीजेपी ज्वाइन की और इसी वर्ष शाह भारतीय जनता युवा मोर्चा के सदस्य बनाये गए। उन्होंने अपनी लगन और समर्पण से सबका दिल जीत लिया। इस मेहनत के फल में उन्हें 1991 में श्री लाल कृष्ण आडवाणी के लिए गांधीनगर लोक सभा सीट से चुनाव प्रचार का जिम्मा दिया गया। इसके बाद 1996 में फिर से उन्हें चुनाव प्रचार का जिम्मा मिला लेकिन इस बार अडवाणी की जगह श्री अटल बिहारी के लिए प्रचार करना था। इस प्रचार प्रसार में अमित शाह खुद भी काफी लोकप्रिय हुए और 1997 में गुजरात की सरखेज से चुनाव लड़ा, जहां उन्हें सफलता मिली। यहीं से उनके राजनैतिक करियर की शुरुआत हुई।

 

 

इसके बाद 1999 में शाह एडीसीबी के प्रेसिडेंट चुने गए। वहीं शाह 2003 से 2010 तक गुजरात सरकार की कैबिनेट में गृहमंत्रालय के पद पर कार्यरत रहे। फिर शाह 2009 में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बने और जब नरेंद्र मोदी ने 2014 में लोक सभा चुनाव मद्देनजर गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया तो अमित शाह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के प्रेजिडेंट बने। गृह मंत्री अमित शाह, नरेंद्र मोदी के खास और करीबी रहे हैं। इसके बाद उन्हें बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया और उनके नेतृत्व में बीजेपी की लहर पूरे देश में फ़ैल गयी और बीजेपी देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और लगातार दूसरी बार विजयी श्री होने में कामयाब हुई। इस कामयाबी के बाद उन्हें मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में गृह मंत्री की जिम्मेवारी सौंपी गयी है।

 

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आपको बता दें कि अमित शाह उस समय सुर्ख़ियों में आये जब पुलिस ने 2004 में अहमदाबाद में एक फेक एनकाउंटर में 19 वर्षीय इशरत जहां, ज़ीशान जोहर और अमजद अली राणा के साथ प्रणेश को मार गिराया था। इस बारे में गुजरात पुलिस का कहना था कि ये लोग गोधरा दंगे का बदला लेने आये थे। इसी मामले में गोपीनाथ पिल्लई ने अमित शाह को भी आरोपी बनाने का अनुरोध किया था। जिसके बाद अमित शाह पर भी क़ानूनी कार्रवाई की गई थी लेकिन सीबीआई ने 15 मई 2014 को पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण अमित शाह को क्लीन चिट दे दिया था। इससे पहले उन्हें 25 जुलाई 2010 में गिरफ्तार भी किया गया था। 

 

फ़िलहाल अमित शाह देश के गृह मंत्री है और उनके राजनीतिक सूझबूझ के लिए लोग उन्हें आधुनिक भारत के चाणक्य कह कर पुकारने लगे हैं। इस बारे में अमित शाह का कहना है कि इस देश की मिटटी की सौगंध है कि हम अपने लिए कुछ नहीं बल्कि देश के लिए सब कुछ कर रहे हैं। ऐसे में हम देश के गृह मंत्री से यही उम्मीद करते हैं कि वे देश हित में अपना योगदान देते रहे और देश समाजिक सौहार्द के साथ खूब तरक्की करें।

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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