जानें बीजेपी के कर्णधार, लौह पुरुष कहे जाने वाले प्रखर नेता आडवाणी की जीवनी


जानें बीजेपी के कर्णधार, लौह पुरुष कहे जाने वाले प्रखर नेता आडवाणी की जीवनी

लाल कृष्ण आडवाणी की राजनैतिक और व्यक्तित्व जीवन से किसी से छुपा हुआ नहीं है। आडवाणी हिन्दू धर्म के पुनरूत्थान एवं देश में हिंदुत्व को एकत्र करने में अग्रणी नेता रहे हैं। इन्होंने अपने बल पर न केवल हिन्दू को देश में सम्मान दिलाया बल्कि बीजेपी पार्टी को भी प्रमुख पार्टी बनाया। इनके राजनैतिक करियर में कई ऐसी घटनाएं हुई, जिनके लिए इन्हें जाना जाता है। जिसमें एक बाबरी मस्जिद विध्वंस है। आज हम आपको बीजेपी के लौह पुरुष कहे जाने वाले लाल कृष्ण आडवाणी की जीवनी बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं।

 

लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवम्बर 1927 को पाकिस्तान के कराची में हुआ था। इनके पिता का नाम के डी आडवाणी और माँ ज्ञानी आडवाणी था। आडवाणी ने 25 फ़रवरी 1965 को 'कमला आडवाणी' से विवाह किया और इनके दो बच्चे है। इन्होंने अपने जीवन के 20 साल पाकिस्तान में गुजारे और फिर जब विभाजन हुआ तो इनका पूरा परिवार भारत आ गया। इन्होंने प्रारम्भिक पढ़ाई पाकिस्तान के लाहौर में पूरी की और फिर भारत में आकर मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से लॉ में स्नातक किया।

 

 

इसके बाद सन 1951 में इन्होंने डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित जनसंघ ज्वाइन की और जनसंघ में 1957 तक सचिव बने रहे। फिर ये पार्टी को मजबूत करने के लिए देश भर में घूमे और एक बार फिर 1973 में जनसंघ के अध्यक्ष चुने गए। इस पद पर वे 1977 तक रहे। इस समय उन्होंने केंद्रीय सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री का दायित्व संभाला। 1977 में जनसंघ का विघटन हुआ और 1980 में बीजेपी पार्टी की स्थापना हुई। उस समय ये बीजेपी पार्टी के महासचिव रहे। इसके बाद वे 1986 से 1991 तक बीजेपी पार्टी के अध्यक्ष बने रहे। 

 

जब वे बीजेपी पार्टी अध्यक्ष थे तो उसी दौरान 1990 में उन्होंने सोमनाथ से अयोध्या के लिए राम मंदिर आंदोलन की रथयात्रा निकाली। जब यह रथयात्रा बीच में ही थी। उसी समय आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन तब तक आडवाणी देश के हीरो बन चुके थे और लोग इन्हें हिन्दू नेता कहकर पुकारने लगे। इसके दो साल बाद जब 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ तो उन्हें भी अभियुक्त बनाया गया। 

 

आपको बता दें कि वर्तमान में आडवाणी गांधीनगर से सांसद है और अपने राजनैतिक जीवन में आडवाणी एनडीए सरकार की कार्यकाल में केंद्रीय गृहमंत्री बने और 29 जून 2002 को उपप्रधानमंत्री पद संभाला। बीजेपी के कर्णधार कहे जाने वाले लाल कृष्ण आडवाणी आज अपने उग्र रूप से समझौता कर चुके हैं और शांत स्वभाव व्यक्तित्व वाला जीवन बिता रहे हैं। लोग आज भी इनके उग्र रूप को देखना चाहते हैं लेकिन आडवाणी की कहानी शायद अब पुरानी हो गयी है। ऐसे में हम उन्हें उनके स्वस्थ और कुशल जीवन की शुभकामना देते हैं।

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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