जानें कारोबारी से राजनेता बने गिरिराज सिंह की जीवनी


जानें कारोबारी से राजनेता बने गिरिराज सिंह की जीवनी

बिहार राजनीति के कद्दावर बीजेपी नेता गिरिराज सिंह वर्तमान में भारत सरकार के कैबिनेट में देश के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री है। सिंह ने अपनी राजनैतिक करियर बहुत देर से शुरुआत की लेकिन जब से उन्होंने राजनीति में एंट्री की है। उस समय से उनका राजनीति कद दिन व दिन बढ़ता ही गया है। ऐसे में आज हम आपको गिरिराज सिंह की जीवनी बताने जा रहे हैं।

 

गिरिराज सिंह बिहार के उस जिले से है। जहां एक समय में ठाकुरों की तूती बोलती थी। जी हां, गिरिराज सिंह बिहार के लखीसराय जिले से हैं। उनका जन्म 9 सितंबर 1952 को लखीसराय जिले के बड़हिया में हुआ था। उस समय बिहार के बेगूसराय क्षेत्र में अपराध अपने चरम पर था। इसी अपराध जगत को देखते हुए उनके पिता ने उन्हें उनकी बुआ के घर बलिया जिले के सदानंदपुर भेज दिया। यहीं से गिरिराज सिंह ने प्राथमिक पढ़ाई पूरी की और फिर माध्यमिक पढ़ाई बोधगया से और उच्च शिक्षा मगध विश्वविद्यालय से पूरी की।

 

 

गिरिराज सिंह ने पढ़ाई पूरी करने के बाद बेगूसराय में ही अपना कारोबार प्रारंभ किया। जिसमें उन्होंने एक बड़ी कंपनी से पम्प सेट की फ्रेंचाइजी ली और अपने करियर की शुरुआत की। इसी दौरान उनकी मुलाकात शादी समारोह में बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाशपति मिश्र से हुई। गिरिराज सिंह उनसे प्रभावित होकर बीजेपी ज्वाइन कर ली और 1985-86 में वे बेगूसराय से पटना चले आये। इसी समय उन्होंने भाजयुमो ज्वाइन की। जिसके एवज में उन्हें भाजयुमो के बेगूसराय, समस्तीपुर व खगडिय़ा का पार्टी प्रमुख बनाया गया।

 

इसके बाद 1990 में वे बिहार भाजयुमो पार्टी के महासचिव बने। इसके बाद उन्होंने राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की। उनके कार्यों की काफी सराहना पार्टी में हुई। जिससे उनको राजनैतिक लाभ मिला और वर्ष 2002 में बिहार विधान परिषद के पहली बार सदस्य नियुक्त किये गये और इस पद पर वे वर्ष 2014 तक विधान पार्षद रहे। इसी समय में उन्हें 2008 से 2010 तक सहकारिता मंत्री बनने का मौका मिला और फिर  2010 से 2013 तक पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री बनने का मौका मिला। इस पद पर उन्होंने अपने कार्यों को बखूबी निभाया।

 

 

इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने नवादा से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें जीत हासिल हुई और गिरिराज सिंह सांसद बने। फिर मोदी सरकार के कैबिनेट में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय की जिम्मेवारी सौंपी गयी। जिसे उन्होंने सफलता पूर्वक पूरा। फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें बेगूसराय से टिकट दी। इस सीट से उनके खिलाफ कांग्रेस की तरफ से कन्हैया कुमार चुनाव लड़े।

 

लेकिन बेगूसराय की जनता ने गिरिराज सिंह को अपना प्रतिनिधि चुना और इस चुनाव में गिरिराज सिंह ने कन्हैया कुमार चार लाख से अधिक वोटों से करारी शिकस्त दी। इस जीत के बाद मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्हें मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री बनाया गया है। उनकी छवि के बारे में बीजेपी के नेता वशिष्ठ नारायण सिंह कहते हैं कि गिरिराज सिंह जमीन से जुड़े हुए नेता हैं। बेगूसराय उनकी जन्मभूमि नहीं है लेकिन उनकी राजनैतिक जन्मभूमि बेगूसराय ही है।

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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