जानें बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव की जीवनी


जानें बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव की जीवनी

चारा घोटाला मामले में रांची की जेल में सजा काट रहे राजद नेता और बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव राजनीति के मंझे हुए नेता हैं। उन्होंने अपने जीवन में देश-दुनिया में अलग पहचान बनाई है। ऐसे में आज हम आपको लालू प्रसाद यादव की जीवनी बताने जा रहे हैं, आइये जानते हैं।

 

लालू प्रसाद यादव का जन्म 11 जून 1948 को बिहार के गोपालगंज के फुलवारिया में हुआ था। उनके पिता का नाम कुंदन राय था और माता का नाम मराचिया देवी था। यादव ने 1973 में राबड़ी देवी के साथ शादी की और उनके परिवार में  कुल 9 बच्चे हैं। जिसमें  सात बेटियां और दो बेटे हैं।

 

शिक्षा : लालू प्रसाद यादव ने प्रारंभिक शिक्षा फुलवारिया से ही की। जबकि उच्च शिक्षा कला स्नातक और लॉ स्नातक से बी एन विश्वविद्यालय से की। ये छात्र जीवन से ही राजनीतिज्ञ रहे हैं।

 

 

राजनितिक करियर : लालू यादव ने अपनी राजनितिक करियर की शुरुआत 1970 में की। जब वे पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (पीयूएसयू) के महासचिव बने। इसके तीन साल बाद वे टना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (पीयूएसयू) के अध्यक्ष बने और फिर एक साल बाद 1974 में जय प्रकाश नारायण आंदोलन में भाग लिए। साल 1977 में लालू 29 वर्ष की आयु में लोकसभा चुनाव लड़े और इस चुनाव उन्हें जीत हासिल हुई।

 

1990 में लालू यादव बिहार के सीएम बनने में कामयाब हुए और वे इस पद पर 1997 तक बने रहे। इसी वर्ष उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल पार्टी की स्थापना की और 12वीं लोकसभा चुनाव में वे मधेपुरा सीट से चुनाव जीतने में कामयाब हो गए। इसके बाद 2002 में वे राज्य सभा के सदस्य मनोनीत किये गए। साल 2004 में लालू यादव की पार्टी ने लोक सभा चुनाव में 21 सीटें जीती। जिसके बाद यूपीए सरकार में रेल मंत्री की जिम्मेवारी दी गयी। उन्होंने अपने कार्यकाल को सफलपूर्वक पूरा किया।

 

लालू यादव की पार्टी ने 2009 लोकसभा चुनाव में चौथी पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ा और इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और फिर बिहार में पहले से ही नितीश कुमार की सरकार थी। ऐसे में लालू यादव के लिए वापसी करना मुश्किल हो गया। साल 2013 में चारा स्कैम में लालू दोषी पाए गए, जिसके बाद वे चुनाव नहीं लड़ सके।

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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