बिहार विधानसभा चुनाव : कैसी है चुनाव की तैयारियां


बिहार विधानसभा चुनाव : कैसी है चुनाव की तैयारियां

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव का माहौल बनने लगा है. सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव की तैयारी में लग गई है क्योकि भैया अब चुनाव नजदीक है. जदयू और भाजपा ने तो इसकी शुरवात कुछ दिन पहले ही कर दी है और अब बिहार में मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी भी अपना चुनाव अभियान शुरू करती दिखाई दे रही है. बिहार में वर्तमान में एनडीए की सरकार है जिसमें जदयू और भाजपा गठबंधन में है.

 

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव का शंखनाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित साह की रैली से हुआ जिसमें उन्होने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर सरकार के कार्यों को जनता के समक्ष रखा. अब बिहार भाजपा जी – जान से आगामी चुनाव की तैयारियों में लग गई है. पार्टी के नेता और कार्यकर्ता बिहार के घर – घर जाकर मोदी सरकार द्वारा इस एक वर्ष में किए गए कार्यों को बता रहे है और आगामी चुनाव में भाजपा- जेडीयू गठबंधन के लिए वोट मांग रहे है. भाजपा आगामी चुनान के लिए वर्चुअल रैली से लेकर धर- घर जा रही है तो जेडीयू कहां पिछे रहने वाली थी.

 

बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी ने भी आगामी चुनाव के मद्देनजर वर्चुअल टेक्नॉलजी का सहारा लेना कोरोना संकट के दौरान सहीं समझा और जुट गए जिलेवार संवाद में. नीतीश कुमार अब राज्य के हरेक जिले में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से वर्चुअल संवाद कर रहे है .आगामी चुनाव पर कैसे फोकस करना है और राज्य के विकाश के लिए किए गए कार्यों को जनता तक कैसै पहुचाना है इसका मूलमंत्र नीतीश कुमार पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओँ को दे रहे है. बिहार का विधानसभा चुनाव नीतीश के 15 साल बनाम आरजेडी के 15 साल के मुद्दे पर लड़े जाने की दिशा में सत्तापक्ष जुट गया है. हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिये पार्टी के नेताओँ और कार्यकर्ताओं से संवाद के दौरान नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार की जनता को हमारे 15 साल और आरजेडी के 15 साल के बारे में बताना जरूरी है. इस बात को नहीं भूलना है कि पति- पत्नी के राज में बिहार का क्या हाल था. लोग घर से बाहर निकलने में डरते थे.

 

इन सब बातों को नई पीढ़ी को बताना जरूरी है. लोजपा भी एनडीए में शामिल है जिसने स्पष्ट कर दिया है कि वे भाजपा के साथ है. लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने हाल ही में कहा था कि बिहार चुनाव में बीजेपी ही एनडीए का चेहरा तय करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी बीजेपी के साथ रहेगी। पासवान ने कहा कि बिहार विधानसभा में एनडीए का चेहरा कौन होगा, यह बीजेपी को ही निर्धारित करना है। चुनाव में बीजेपी नीतीश कुमार के साथ रहे या न रहे।

 

मगर हम बीजेपी का साथ देंगे.  इधर  आरजेडी लगातार बिहार की नीतीश सरकार पर हमलावर है. अब जैसा की बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक है तो सत्तापक्ष को घेरने में आरजेडी कोई कसर नहीं छोड़ना नहीं चाहती. बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव लगातार नीतीश कुमार पर हमलावर है. उनका कहना है कोरोना संकट की इस घड़ी में एक और जहां नीतीश कुमार को जहां सिर्फ वोट और चुनाव की चिंता है तो वहीं आरजेडी को गरीबों और कोरोना पीड़ीतों की. उनका कहना हे कि बिहार की जिस काम के लिए नीतीश कुमार को चुना था उससे वे भटक गए है और चाचाजी को इन सब का जवाब बिहार की जनता इस चुनाव में देने जा रही है. खैर, इस बार भी लड़ाई आमने – सामने की है तो फिर कोई क्यों पिछे रहे. जेडीयू और भाजपा ने भी आरजेडी और महागठबंधन पर हमला तेज कर दिया है. हाली ही में आरजेडी सुप्रीमो और बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव का 73वां जन्मदिन था.

 

इस मौके पर जेडीयू ने लालू परिवार के 73 संपत्तियों को अवैध बतातै हुए आरजेडी को घेरा और पोस्टर जारी किया. साथ ही इस पोस्टर में लिखा गया है- लालू परिवार का संपत्तिनामा, राजनीतिक धौंस से अर्जित की गयी संपत्ति, संपत्तियों का ब्योरा अभी पूरा नहीं, शेष है. बिहार में महागठबंधन का भी मन डोलता रहता है. जीतनराम मांझी , उपेंद्र  कुशवाहा और सहनी की तिकड़ी सिट बटवारे को लेकर कई बार अपनी बात रखती दिखाई देते है औऱ महागठबंधन से अलग होने की बात भी करते है  लेकिन अब भविष्य में क्यो होगा वो तो कोई नहीं जानता.

 

बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही एक बात तो सप्ष्ट हो गई है कि पांच साले के कार्यकाल में जो कार्य किया उसे बताना काफी आवश्यक है. इसिलिए तो कोरोना महामारी के इस काल में भी राजनीतिक पार्टियों ने जनता से जुड़ने का तरीका ढूंढ़ निकाला है. वर्चुअल रैलियां हो रही है जिससे लोगों तक डिजिटली पहुंचा जा रहा है ताकि आगामी चुनाव का किला फतेह किया जा सके. 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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