अयोध्या अतुल खरे हत्याकांड का बड़ा खुलासा


अयोध्या अतुल खरे हत्याकांड का बड़ा खुलासा

अयोध्या-

लॉकडाउन के बीच लोगों के बर्बरता की ऐसी खबरें सामने आ रही है जिसे जानकर आपकी रुह कांप जाएंगी. जी हां जिस हत्याकांड की बात करने जा रहे हैं वह अतुर खरे हत्याकांड। अयोध्या अतुल खरे हत्याकांड का एक बड़ा खुलासा हुआ। जिसके बाद उतर-प्रदेश सरकार और प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं.  

 

खबर है कि डॉक्टर अरविन्द खरे के बड़े भाई अतुल खरे के हत्यारों की पहचान कर ली गई है. मृतक अतुल खरे के हत्यारे उनके ही पड़ोसी हैं. हत्यारों की पहचान आदित्य सैनी उर्फ़ शानू (मुख्य आरोपी) व उसके दोस्त मिथिलेश (मुख्य आरोपी), राहुल, रामाजी के तौर पर हुई है.


बताया जा रहा है कि अतुल खरे का क़त्ल पूरी सोची-समझी साजिश के तहत किया गया. शानू ने उन्हें अपने घर बुलाया और फिर वहां पहले से उसके तीन दोस्त मौजूद थे. उन्होंने ढेर सारी शराब पी रखी थी, और फिर जब अतुल को वहां का माहौल ठीक नहीं लगा तो उन्होंने वहां से जाने की कोशिश की. लेकिन इतने में ही चारों लोगों ने उन्हें घेर लिया और शराब की बोतल से सिर पर वार कर दिया.

 

इसके बाद जब मृतक अतुल ने खुद को बचाना चाहा तो हत्यारों ने चाक़ू से उनका गला काटा और उनके खून से लथपथ शरीर में आटा डाल दिया. जिससे कि उनका खून सूख जाए. इतना ही नहीं हत्यारों को फिर भी संतोष नहीं मिला तो रातोंरात उनका शव जला दिया.

 

शानू सैनी की मां सरला मृतक अतुल खरे की बेटियों को सैंट मेरी स्कूल में पढ़ाती थी. हत्यारे शानू ने अपनी मां को हत्या की जानकारी दी थी. बता दें कि शानू की हमेशा से मृतक अतुल खरे की प्रॉपर्टी पर नजर थी. वह गुंडागर्दी से उनकी जमीन हड़पना चाहता था. जबकि अतुल खरे के पास जमीन के पूरे कागजात थे. दिल्ली दरवाजा में मृतक अतुल खरे का खुद का मंदिर और उनके दादा-बाबा की ढेरों जमीन थी. जिसपर कई लोगों की निगाह थी. उन्हीं में से एक था शानू सैनी. वह हमेशा उन्हें नेतागिरी का रौब दिखाता है. कई बार पहले भी शानू उन्हें धमकी दे चुका था.


बताया जा रहा है कि मृतक अतुल खरे की पांच बेटियां और दो बेटे हैं. वे लोग लखनऊ में रहते हैं. जबकि मृतक अतुल खरे अपने दिल्ली दरवाजा सीमेंट कोठी के पीछे स्थित पुश्तैनी घर में निवास करते थे. परिवारजनों ने साफतौर पर कहा है कि हमें कोई मुआवजा कुछ नहीं चाहिए, लेकिन उनके पिता की हत्या करने वालों को क़ानून सख्त से सख्त सजा दे. उन्हें फांसी हो.

 

गौरतलब है कि अयोध्या अतुल खरे हत्याकांड इतना भयावह है पूरे उतर-प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। अब जब कई सवालों के जवाब मिल गए हैं तो क्या अतुल खरे के परिवार को इंसाफ मिलेगा। क्या प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दिलाएगी यह सारे सवाल अभी है जिसके लिए इंतजार करना होगा।

 

-Farheen Ansari

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इस मंत्री ने गलती से ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, हुए ट्रोल


इस मंत्री ने गलती से ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, हुए ट्रोल

आज सुबह से सोशल मीडिया पर एक खबर को काफी तेजी से वायरल किया जा रहा है. दरअसल, कर्नाटक में BS येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली BJP सरकार के मंत्रियों ने बीते मंगलवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली. इस दौरान जब BJP नेता और विधायक मधु स्वामी पद और गोपनीयता की शपथ ले रहे थे, तभी उन्होंने गलती से बतौर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. 

 

 

बता दें कि, मधु स्वामी जब शपथ ले रहे थे तो उन्हें मंत्री बोलना था, लेकिन जुबान फिसलने के चलते वह मुख्यमंत्री बोल पड़े. अब इस खबर को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया जा रहा है. खास बात ये है कि इस दौरान CM येदियुरप्पा भी मौके पर मौजूद थे और मधु स्वामी की इस गलती पर मुस्कुरा दिए. इतना ही नहीं येदियुरप्पा ने मधु स्वामी को बाद में गले भी लगाया.

 

गौरतलब है कि, बीते मंगलवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल वजुभाई वाला ने 17 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलायी. जिन विधायकों को मंत्री पद से नवाजा गया है, उनमें बी. श्रीरमुलु, सीटी रवि, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केएस ईश्वरप्पा और पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार का नाम शामिल है. बता दें कि, येदियुरप्पा के 26 जुलाई को CM बनने के बाद उनके मंत्रिमंडल का यह पहला विस्तार है. उन्होंने 29 जुलाई को विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित किया था. 

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22 वर्ष पहले दफ़न हुए व्यक्ति का नहीं गला शरीर, मिला ज्यों का त्यों


22 वर्ष पहले दफ़न हुए व्यक्ति का नहीं गला शरीर, मिला ज्यों का त्यों

उतर-प्रदेश के बांदा जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, कई लोग इसे देखकर खुदा का करिश्मा मान रहें हैं तो वहीं कई लोग नेक इंसाल का दर्जा दे रहें हैं. बताया जा रहा है कि, यहां 22 वर्ष पहले कब्र मे दफनाए गए एक शख्स का जनाजा ज्यों का त्यों पड़ा मिला है.

 

ये मामला तब सामने आया जब मूसलाधार बारिश के चलते कब्रिस्तान में मिट्टी कटने से एक कब्र धंस गई और उसमें  22 वर्ष पहले दफन एक शख्स का कफन में लिपटा जनाजा़ दिखने लगा. यहां देखते ही देखते मौके पर काफी लोगों पहुंच गए. जब कफन में लिपटी लाश को निकाला गया तो वहां मौजूद सैकड़ों लोग देखकर दंग रह गए. क्योंकि 22 सालों बाद भी लाश ज्यों कि त्यों निकली.

 

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दरअसल, ये मामला उतर-प्रदेश के जिले बांदा के बबेरू कस्बे के अतर्रा रोड स्थित घसिला तालाब के कब्रिस्तान की है. यहां मूसलाधार बारिश से कई कब्रों की मिट्टी बह गई और एक कब्र में दफन जनाजा़ बाहर दिखने लगा. इसके बाद लोगों ने कब्रिस्तान कमेटी को इसकी जानकारी दी. कब्रिस्तान कमेटी के सदस्‍यों द्वारा जब कब्र की धंसी हुई मिट्टी को हटाकर देखा गया, तो उसमें दफनाया गया जनाजा ज्यों का त्यों पड़ा मिला.

 

गौरतलब है कि, इस कब्र में 22 वर्ष पहले 55 वर्षीय पेशे से नाई नसीर अहमद नाम के शख्स को दफनाया गया था. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नसीर अहमद पुत्र अलाउद्दीन निवासी कोर्रही, थाना बिसंडा बबेरू में नाई की दुकान थी. उन्‍हें लगभग 22 वर्ष पहले दफन किया गया था. जबकी दूसरी तरफ मृतक नसीर के एक रिश्तेदार बताते हैं कि उनका कोई बेटा नहीं था. 

 

22 वर्ष पहले उनका निधन हुआ था, जिसके बाद उनलोगों ने ही उनके शव को दफनाया था. लेकिन, आज उनका जनाजा मिटटी धंसने की वजह से बाहर निकल आया. न शव ख़राब हुई थी और न ही कफ़न पर कोई दाग लगा था. हालंकी, बाद में स्थानीय मौलानाओं की मौजूदगी में शव को कल देर रात उसे दूसरी कब्र में दोबारा से दफन किया गया.

 

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