BHU में फिरोज खान के संस्कृत पढ़ाने पर विवाद के बाद हुआ बड़ा खुलासा


BHU में फिरोज खान के संस्कृत पढ़ाने पर विवाद के बाद हुआ बड़ा खुलासा

BHU में संस्कृत पढ़ाने के लिए मुस्लिम प्रफेसर फिरोज खान की नियुक्ति पर एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है जिसको लेकर BHU के छात्र पिछले 14 दिनों से कुलपति के आवास के सामने धरना दे रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक इन मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान को दूसरे विभाग में ट्रांसफर नहीं किया जाता तब तक उनका विरोध जारी रहेगा.

 

इसको लेकर अब देशभर में भाषा और धर्म पर बहस छिड़ गई है. इस संबंध में कई बड़े विश्वविद्यालयों में जांच पड़ताल की गई तो कई यूनिवर्सिटीज में मुस्लिम शिक्षक संस्कृत पढ़ा रहे हैं, जबकि हिंदू शिक्षक उर्दू की क्लास ले रहे हैं. इसको लेकर अब तक कोई व्यक्ति गलत प्रतिक्रिया नहीं दिया.

 

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इसपर BHU में उर्दू के टीचर ऋषि कुमार शर्मा ने बताया कि वह पिछले 11 साल से उर्दू पढ़ा रहे हैं. कभी किसी छात्र ने आपत्ति नहीं जताई. BHU की हमेशा से यही रवायत रही है. यह एक भाषा है, जिसका रिश्ता इंसानी जिंदगी से है न कि मजहब से. इसके अलावा उन्होने कहा कि, काशी विद्यापीठ की संस्कृत की शिक्षिका डॉ. नाहिद आबिदी को 2014 में पद्मश्री से नवाया गया था. संस्कृत का मौजूदा पाठ्यक्रम तय करने में वह बड़ी भूमिका निभा रही हैं.

 

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के चेयरमैन प्रो. मोहम्मद शारिफ हैं. प्रो. शारिफ ने बताया कि मैं गीता, रामायण और पाली दर्शन पढ़ाता हूं. मेरे अधीन पीएचडी करने वाले 7 स्कॉलर मुस्लिम हैं. AMU में 3 अन्य मुस्लिम शिक्षक भी संस्कृत पढ़ाते हैं. संस्कृत तो कई भाषाओं की जननी रही है, उसे दायरे में नहीं बांधा जा सकता.

 

इसके अलावा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में डॉ. संजय उर्दू पढ़ाते हैं. 2013 में यहां आने से पहले वह लखनऊ के ही ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अरबी-फारसी विश्वविद्यालय में उर्दू के शिक्षक थे. डॉ. संजय ने बताया कि हमारे विभाग में हमेशा से हिंदू शिक्षक रहे हैं. यहां संस्कृत विभाग की प्रमुख रह चुकीं प्रो. किश्वर जबीं नसरीन का नाम देश के नामी संस्कृत विशेषज्ञों में लिया जाता है.

 

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50 के दशक में यहां एक हिंदू प्रफेसर शमशेर बहादुर अरबी पढ़ाया करते थे. वहीं अरब कल्चर में तो 2011 तक केके रस्तोगी ने पढ़ाया है. नगर निगम डिग्री कॉलेज में आज भी सुनील माथुर अरब कल्चर पढ़ा रहे हैं. कभी भी धर्म दीवार नहीं बना. इसके अलावा संस्कृत विभाग की अध्यक्ष डॉ. छाया रानी बताती हैं कि 32 वर्ष तक हमारे विभाग में प्रो. असहाब अली ने पढ़ाया. साल 2011 में विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर हुए. उन्होंने इस्लामिक और वैदिक मिथकों पर भी अध्ययन किया है.

 

आपको बता दें कि BHU संस्कृत विभाग के सहायक प्रोफेसर के पद के लिए 10 उम्मीदवारों को चुना गया था. जिन उम्मीदवारों का साक्षात्कार हुआ उसमें सबसे ज्यादा अंक पाकर फिरोज खान की नियुक्ति की गई. राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद BHU में सहायक प्रफेसर बने फिरोज का कहना है कि हिंदुस्तान में मुझे अपने धर्म के कारण कभी किसी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा. BHU परिसर में उनके खिलाफ चल रहे विरोध के बारे में चर्चा करने पर वह कहते हैं छात्रों का एक समूह नहीं चाहता कि मैं उन्हें संस्कृत सिखाऊं क्योंकि मैं हिंदू नहीं हूं.

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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