बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलने के बाद खुलते हैं बद्रीश के कपाट, सदियों से चली आ रही परंपरा


बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलने के बाद खुलते हैं बद्रीश के कपाट, सदियों से चली आ रही परंपरा

भगवान बद्रीनाथ धाम मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही आज ही हरिद्वार में भी बद्रीश पंचायत के कपाट पूरे वैदिक विधि विधान के साथ खोले गए. भगवान शिव की ससुराल कनखल में भी भगवान बद्री विशाल का विग्रह मौजूद है. कनखल में राजघाट स्थित बद्री विशाल भगवान के कपाट खुलने से पूर्व कल से यंहा पर रामचरित मानस का अखंड पाठ शुरू हुआ जो आज दोपहर तक चलता रहा. सुबह पूजा अर्चना के साथ भगवान बद्रीश स्त्रोत का पाठ भी किया गया.

 

कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से लॉक डाउन के चलते हालांकि इस मौके पर श्रद्धालु नही पंहुच पाए, वैसे यंहा प्रतिवर्ष कपाट खुलने के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान बद्री विशाल के दर्शन करने पंहुचते है. कपाट खुलने पर पूरा गंगा तट बद्रीनाथ के जयकारों से गूंज उठा. प्राचीन बद्रीश पंचायत मंदिर राजघाट कनखल में सदियों से कपाट खोलने की परंपरा चली आ रही है यहां पर बद्रीनाथ भगवान की तरह तुलसी युक्त पंचामृत मूंगफली चने इलायची दाना मिश्री का प्रसाद चढ़ाया जाता है.

 

इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि भगवान बद्रीविशाल के अनन्य भक्त आचार्य इंद्रमणि महाराज को एक रात बद्रीनारायण भगवान ने स्वप्न में दर्शन दिए और यंहा पर उनका मंदिर स्थापित करने को कहा मंदिर के संचालक आचार्य इंद्रमणि के पौत्र पंडित गजेंद्र दत्त जोशी बताते है कि इसके बाद इंद्रमणि महाराज हरिद्वार से पैदल ही बद्रीनाथ धाम पंहुचे और भगवान बद्रीविशाल के दर्शन किये. वंहा से आने के बाद उन्होंने यंहा पर चतुर्भुज बद्रीनारायण की स्थापना की. उंन्होने यंहा पर बद्रीविशाल जैसा ही भगवान बद्रीनारायण का विग्रह स्थापित किया.

 

पंडित गजेंद्र दत्त जोशी बताते है कि जब बद्रीनाथ धाम में मंदिर कब कपाट खोले जाते है और भगवान बद्रीनारायण की विशेष पूजा अर्चना, अनुष्ठान किया जाता है, बद्री स्त्रोत का पाठ और भंडारे का आयोजन भी किया जाता है. मगर इस बार लॉक डाउन की वजह से इस बार श्रद्धालुओं की अनुपस्थिति में भी धार्मिक आयोजन की परंपराओं का निर्वाह पूरे विधि विधान के साथ किया गया. उंन्होने बताया कि मंदिर की स्थापना के बाद से ही बद्रीनाथ धाम की यात्रा से पूर्व बद्रीश मंदी के दर्शन करने के बाद ही यात्रा शुरू करने की परंपराआ रही है मगर पिछले कुछ वर्षों से इस परंपरा के निर्वाह में कमी आई है.

 

पंडित गजेंद्र का कहना है कि जो पुण्य फल भगवान बद्री विशाल के दर्शनों से प्राप्त होता है. वही पुण्य फल बद्रीश पंचायत मंदिर में भगवान बद्री विशाल के दर्शन करने से प्राप्त होता है. बद्री नारायण भगवान यंहा आने वाले अपने सभी भक्तों की मनोकामना पूरी करते है. इस मंदिर के दर्शन कर श्रद्धालु की पुण्य के भागी बनते हैं.

 

श्रद्धालुओं का कहना है कि इस मंदिर के दर्शन कर हमें अच्छा लगता है हम हर साल इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं इस मंदिर में कपाट खुलने से रामायण का पाठ किया जाता है और कीर्तन होता है इस मंदिर में दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं लॉक डाउन लगने की वजह से इस बार संख्या कम है इस मंदिर में जो भी मुराद मांगी जाती है वह पूरी होती है जो बद्रीनाथ मंदिर के दर्शन नहीं कर पाते वह यहीं पर बद्रीनाथ के दर्शन करते हैं.

 

तीर्थ नगरी हरिद्वार के उपनगर कनखल में गंगा तट पर बसे राजघाट में 80 साल से ज्यादा पुराना प्राचीन बद्रीनारायण का मंदिर है जिसे बद्रीश मंदिर बोलते हैं इस मंदिर की स्थापना आचार्य इंद्र मणि महाराज ने की थी उन्हें स्वप्न में बद्रीनाथ जी ने दर्शन दिए थे और वे हरिद्वार से पैदल चलकर बद्रीनाथ गए और वहां उन्होंने बद्रीनाथ जी के विग्रह के दर्शन किए और बद्रीनाथ जी को अपना इष्ट माना बद्रीनाथ जी से लौटकर वो राजघाट में गंगा तट पर आए और यहां उन्होंने 80 साल पूर्व बद्रीश मंदिर की स्थापना की.

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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