आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर लगेगा ताला, राजस्व विभाग की टीम ने शुरू की ज़मीन की पैमाश


आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर लगेगा ताला, राजस्व विभाग की टीम ने शुरू की ज़मीन की पैमाश

यूपी के रामपुर में सपा नेता आज़म खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर लगातार प्रशासन का चाबुक चल रहा है। राजस्व परिषद इलाहाबाद में जौहर ट्रस्ट की याचिका खारिज होने के बाद बाद रामपुर प्रशासन हरकत में आ गया है. आज जौहर यूनिवर्सिटी में सरकारी चकरोड की पैमाइश का काम शुरू हो गया है.

 

बता दें कि कुछ दिन पहले ही प्रशासन ने आलिया गंज गांव के किसानों को जमीन पर कब्जा दिलवाया था. वहीं, अब ग्राम समाज की चकरोड भी खाली करवाई जाएगी. दरअसल, किसानों की जमीन पर जाने का रास्ता नहीं था. आज प्रशासन ने किसानों की जमीन पर जाने के लिए चकरोड की पैमाइश भी शुरू कर दी है.

 

वहीं एसडीएम प्रेम प्रकाश तिवारी ने बताया की हमारे करीब 11 चकरोड और रास्ते के नाम से सरकारी अभिलेखों में करीब 17 बीघा जमीन दर्ज थी. जो 132 सार्वजनिक उपयोग की लैंड थी. जिसको अविधिक तरीके से चेंज कर यूनिवर्सिटी में मिला लिया गया. उसमें यूनिवर्सिटी के भवन भी बन गए.

 

 

यह था पूरा मामला : दरअसल, 20 सितंबर 2017 को भाजपा नेता आकाश सक्सेना की मुख्यमंत्री से की गई शिकायत पर तत्कालीन जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने राजस्व बोर्ड परिषद इलाहाबाद में चार मुकदमे दायर किए थे.

 

दायर मुकदमें में आकाश सक्सेना को निगरानी कर्ता के साथ-साथ वाद की पैरवी के लिए व्यक्तिगत एडवोकेट अपने खर्चे पर लड़ने की अनुमति प्रदान की गई थी. 3 अगस्त 2018 को राजस्व बोर्ड परिषद इलाहाबाद द्वारा वाद चलाने की अनुमति प्रदान की गई.

 

20 अगस्त 2018 को राजस्व बोर्ड परिषद के इस आदेश के विरुद्ध आजम खान ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर की. जिसमें आजम खान ने जिलाधिकारी के साथ-साथ आकाश सक्सेना को भी प्रतिवादी बनाया. 26 अगस्त 2018 को उच्च न्यायालय ने राजस्व बोर्ड परिषद के उक्त फैसले को सही ठहराते हुए आजम खान की याचिका को खारिज कर दिया.

 

23 जनवरी 2019 को राजस्व बोर्ड इलाहाबाद ने अपना फैसला सुनाते हुए उक्त मुकदमे को मुरादाबाद कमिश्नर को 4 सप्ताह के अंदर निस्तारण करने का आदेश दिया था. जिसके बाद कमिश्नर मुरादाबाद ने अपना फैसला लिया और एसडीएम द्वारा जौहर विश्वविद्यालय को दी गई सरकारी चकरोड के आदेश को निरस्त किया.

 

साथ ही तत्कालीन लेखपाल के विरुद्ध कड़ी  कारवाई के निर्देश दिए. जिसके बाद जौहर ट्रस्ट ने दूसरी अपील राजस्व परिषद के सामने की थी. जिस 29 जनवरी 2020 को खारिज कर दिया गया.

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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