गंगा के स्वच्छ होने पर ज्योतिषी बोले 'कोरोना तो एक बहाना, 84 वर्षों में एक बार प्रकृति ऐसा करती है'


गंगा के स्वच्छ होने पर ज्योतिषी बोले 'कोरोना तो एक बहाना, 84 वर्षों में एक बार प्रकृति ऐसा करती है'

क्या प्रकृति अपने आप को फिर से पुराने दिनों की और ले जा रही है क्या प्रकृति अपने आप को रिस्टार्ट कर रही है। वैज्ञानिकों और ज्योतिषियों की मानो तो प्रकृति समय समय पर अपने आप मे परिवर्तन करती रहती है। ज्योतिष बताते है कि शास्त्रों के अनुसार हर शताब्दी में लगभग 84 वर्षों में एक बार प्रकृति ऐसा करती है जब पवित्र गंगा में केवल देवी देवता यक्ष गंधर्व आदि ही स्नान करते है। ऐसा तब होता है जब बृहस्पति मकर राशि मे हो और हर 84 साल में बृहस्पति अपनी चाल के अनुसार मकर राशि मे एक साल पहले आ जाते है। हरकी पैड़ी पर आजकल इसी योग में देवी देवता शुद्ध पवित्र जल में स्नान कर रहे है, इन दिनों गंगा पूरी तरह से पवित्र और निर्मल है।

 

दुनिया भर में कोरोना नाम के वायरस का कोहराम है और लगभग पूरी दुनिया मे लॉक डाउन की वजह से सड़के सुनसान है। भारत मे भी लॉक डाउन की वजह से पिछले 20 दिनों से सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है, गंगा के घाट पूरी तरह से सूने पड़े हुए है। लॉक डाउन के असर से सबसे ज्यादा लाभ हमारे पर्यावरण और गंगा यमुना सहित सभी नदियों को हुआ है। पर्यावरण पूरी तरह से साफ और स्वच्छ है और गंगा सहित सभी नदिया एकदम निर्मल रूप में बह रही है, ज्योतिष इसे विशेष ज्योतिषीय योग की वजह से होना बता रहे है।

 

प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉक्टर प्रतीक मिश्रपुरी का कहना है कि हर 12 साल बाद जब बृहस्पति मकर राशि मे आते है और सूर्य कुम्भ राशि मे तब धरती पर 4 स्थानों पर कुम्भ लगता है। मान्यता है कि इस अमृत योग में देवी देवता हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड में गंगा स्नान करने आते है। इनका कहना है कि बृहस्पति अपनी चाल की वजह से लगभग 84 साल में एक बार मकर राशि मे 12 के 11 साल में आते है, इसी वजह से इस साल कुम्भ भी 12 के बजाय 11 साल में पड़ रहा है।

 

इनका कहना है कि जब भी ऐसा होता है तो शास्त्रों के अनुसार ब्रह्कुण्ड में मानव का स्नान करना वर्जित माना जाता है। इस योग काल मे गंगा में ब्रह्मकुंड में तब केवल देवी देवता यक्ष गंधर्व, नाग आदि ही स्नान करते है। इनका कहना है कि हर 84 साल में प्रकृति अपने आप ऐसी परिस्थियां बना लेती है जब वंहा मानव स्नान करने जा ही नही पाता है। इन्होंने बताया कि ऐसा ही योग इससे पहले साल 1938, में उससे पहले साल 1855, साल 1772, 1677, 1594, 1416 और 1333 में भी हो चुका है जब बृहस्पति अपनी चाल की वजह से 12 के बजाय 11 साल में मकर राशि मे आ गए थे।

 

कलयुग में मानव का स्वभाव उग्र हो जाता है और तीर्थो की मर्यादा भंग होने लगती है और धरती पर कई तरह के दोष पैदा हो जाते है ऐसे में प्रकृति एक तय कालखंड में इन दोषों को मुक्त करती है इनका कहना है कि आज गंगा पवित्र और निर्मल रूप से देवी देवताओं का धरती पर स्वागत कर रही है बृहस्पति  30 जून तक मकर राशि मे रहेंगे तब तक ऐसी स्थिति बनी रहेगी। पर्यावरण वैज्ञानिक भी मान रहे है कि इस वक्त पर्यावरण पूरी तरह से स्वच्छ है और गंगा निर्मल वैज्ञानिकों का कहना है कि ज्योतिषीय आधार भी हो सकता है।

 

मगर लॉक डॉउन की वजह से तमाम मानवीय गतिविधियां लगभग पूरी तरह से बंद पड़ी हुई है जिसका असर सीधा हमारे पर्यावरण पर पड़ रहा है। पर्यावरण वैज्ञानिक बीड़ी जोशी बताते है कि इस वक्त गंगा निर्मल और स्वच्छ रूप में बह रही है। गंगा में इस वक्त TDSA यानी घुलित ठोस पदार्थ की मात्रा बहुत कम हो गई है और जल की पारदर्शिता बढ़ी है। गंगा जल में ऑक्सीजन की मात्रा में भी 20 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है इनका कहना है कि औद्योगिक कचरा और नदियों के किनारे यात्रियों का आवागमन लगभग खत्म है होटल बन्द पड़े है जिसकी वजह से सॉलिड वेस्ट गंगा में नही जा रहा है यह भी बहुत बड़ी वजह गंगा के स्वच्छ निर्मल होने की है।

 

साथ ही साधु संत भी गंगा के स्वच्छ निर्मल होने से बहुत खुश है। साधु संतों का कहना है गंगा वैसे तो हमेशा से गंगा पवित्र रही है और लॉक डाउन की वजह से यात्रियों के नही आने से गंगा और भी ज्यादा पवित्र हो गई है क्योंकि इस वक्त ना तो होटलों का गंदा पानी गंगा में जा रहा है गंगा मां है और हम गंगा को मां के रूप में देखते हैं हम गंगा को कभी भी अपवित्र नहीं कह सकते।

 

कोरोना तो एक बहाना बन गया जबकि यह बात तो सदियों पुरानी है करीब 9 दशकों में एक बार गंगा स्वच्छ और निर्मल होकर बहती है। इस दौरान कोई भी मानव गंगा में डुबकी तक नहीं लगा पाता और इसकी पुष्टि ज्योतिषाचार्य भी कर रहे हैं उन्होंने भी कई वर्षों का इतिहास बताया जो हमारे पुराणों में दर्ज है। इस वक्त हरकी पौड़ी का नजारा देखकर भी ऐसा ही लगता है तो वहीं वैज्ञानिक गंगा के स्वच्छ और निर्मल होने को मानव की कमी होना बता रहे हैं मगर बात जो भी हो गंगा इस वक्त निर्मल और स्वच्छ बह रही है और इसी रूप में सब गंगा को देखना चाहते हैं।

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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