आज से शुरू हो रही है आश्विन नवरात्रि, जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास


आज से शुरू हो रही है आश्विन नवरात्रि, जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

हिन्दू धर्म में नवरात्रि एक अति पावन पर्व है जो आश्विन तथा चैत्र माह में भी मनाई जाती है, और दोनों का अपना विशेष महत्व होता है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है जिसका मतलब नौ रातें होती हैं। नवरात्रि की नौ रातें तथा दस दिनों के दौरान माता शक्ति की पूजा की जाती है। जबकि दशमी का दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है।

 

चैत्र तथा आश्विन नवरात्रि में तीन देवियों – माता लक्ष्मी, माता सरस्वती तथा माता पार्वती के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है जिन्हें नवदुर्गा भी कहा जाता है। नवरात्रि पर्व पुरे भारत वर्ष में उत्साह एवं उमंग के साथ मनाई जाती है । इस बार आश्विन नवरात्रि की शुरुवात रविवार 29 सितम्बर से है।

 

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माँ दुर्गा नवरात्रि की कथा

 

नवरात्र में प्रथम पूजा अर्थात पहले दिन की पूजा मां शैलपुत्री के रूप में की जाती है। और इस तरह से माँ शैलपुत्री की प्रथम दिन की पूजा के साथ नवरात्रि अर्थात दुर्गा पूजा की शुरुआत की जाती है। माँ शैलपुत्री पर्वत राज हिमालय की पुत्री के रूप में जानी जाती हैं, जिनके सिर आधा चाँद माता सुशोभित है और उनकी सवारी नंदी है।

 

नवरात्रि शुरू होने के दुसरे दिन देवी दुर्गा का दूसरा रूप ज्ञान की देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। माँ ब्रह्मचारिणी के हाथ में पद्म (कमल फूल), रुद्राक्ष की माला, और कमंडल सुशोभित है और इन्हें ज्ञान की देवी माना गया है।

 

तृतीय दिन अर्थात तीसरे दिन की पूजा मां चंद्रघंटा के रूप में की जाती है। और इस तरह शांति और समृद्धि के लिए नवरात्रि के तीसरे दिन की पूजा माँ चंद्रघंटा को समर्पित की जाती है। माँ चंद्रघंटा घंटी की आकार में हैं जिनके माथे पर आधा चाँद है। माँ चंद्रघंटा दिव्य आकर्षक सुनहरे रंग की है जो शेर की सवारी करती हैं। उनके दश हाथ, तीन आँखें हैं और उनके हाथो में सशत्र सुसज्जित हैं।

 

पूरी कथा पढ़ें: नवरात्रि कथा एवं पूजा विधि

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