अशोक गहलोत ने किया सोनिया गाँधी के SpeakUpIndia का समर्थन, बोले कांग्रेस अध्यक्ष का शुक्रिया कहना चाहता हुँ


अशोक गहलोत ने किया सोनिया गाँधी के SpeakUpIndia का समर्थन, बोले कांग्रेस अध्यक्ष का शुक्रिया कहना चाहता हुँ

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है की कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी जी को बधाई देना चाहूंगा कि उन्होंने SpeakUpIndia के माध्यम से देश के लाखों-करोड़ों मज़दूरों की आवाज़ को बुलंद करने का आह्वान किया है। जैसा आप सब जानते हैं कोरोना के बारे में जिस रूप में लॉकडाउन किया गया अचानक उसके कारण से पूरे देश को जो तकलीफ हुई है उसको शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते हैं।

 

विशेष रूप से मजदूर चले पैदल घर की तरफ वो दृश्य विचलित करने वाले है देशवासियों को। किस प्रकार से रास्ते में डिलीवरी हो रही है, बच्चे मारे जा रहे है, औरतें, पुरुष मारे जा रहे है। कोई कल्पना नहीं कर सकता है। इतना अस्त-व्यस्त व्यवस्था हो गई, जो पहली बार सुन रहे हैं कि रेल गाड़ी भी, ट्रेन भी बम्बई से चलती है पटना के लिए पहुंच जाती है उड़ीसा के लिए। ऐसा आज तक कभी नहीं हुआ।

 

हृदय विदारक दृश्य देखकर के जो संवेदनशीलता होनी चाहिए केन्द्र सरकार में नजर नहीं आती है। वरना इतने लंबे समय तक मजदूर कभी पैदल चलने की नौबत कभी नहीं आती। अगर केन्द्र सरकार जैसे जारी कर रही थी एडवाइजरी राज्यों को उसी प्रकार से अगर वो एडवाइजरी जारी करती राज्यों को कि आपको बसें लगाकर के ये सुनिश्चित करना चाहिए, एक भी मजदूर आपके राज्य में, आपके राज्य के किसी गांवों में, कस्बे में पैदल चलता हुआ नजर नहीं आना चाहिए तो तीन दिन में ये संकट समाप्त हो सकता था जैसे राजस्थान ने किया।

 

मुझे बहुत दुख है कहते हुए लापरवाहियों का जो माहौल है देश के अंदर उससे लोग चिंतित हो गए हैं। लोगों ने सरकार को सपोर्ट किया पूरी तरह से। प्रधानमंत्री जी ने ताली बजवाई, थाली बजवाई, बैंड बजवाए लोगों ने उसको स्वीकार भी किया और साथ भी दिया। आज पूरे देश के अंदर जो आर्थिक रूप से, सामाजिक रूप से, राजनैतिक रूप से जो बैंड बज गई है देश के अंदर उसका हम सबको दुख है। उसके कारण से ना आर्थिक रूप से गतिविधियां शुरू हो पा रही है लॉकडाउन 4 के बावजूद भी। ना पूरी तरह से रुक पा रहे है केसेज पहले की तरह आ ही रहे है।

 

राज्य सरकारें पूरी तरह से कोशिश कर रही है किस प्रकार से कोविड 19 का मुकाबला किया जाए। केन्द्र सरकार को चाहिए था कि वो आगे आकर के, बगैर कि बजाए कि राज्य सरकारें मांग करें केन्द्र सरकार से इमदाद देने की ये कोविड 19 का वक्त है, लॉकडॉउन हो चुका है। रेवन्यू 30 प्रतिशत आ गई राज्यों की। चाहे किसी भी राजनैतिक पार्टी की राज्य सरकार हो केन्द्र सरकार को आगे आकर उनको पैकेज देना चाहिए था। 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की। पूरी देश दुनिया जानती है 90 प्रतिशत लोन के रूप में घोषणाएं हुई है।

 

उसका फायदा नहीं मिलने वाला है। जब तक गरीब तक, मजदूर तक, दिहाड़ी मजदूर तक, बीपीएल वालों को, स्टेट बीपीएल वालों को, अंत्योदय वालों को जब तक उनके जेब में पैसा नहीं जाएगा, तब तक वो पैसा खर्च नहीं होगा, पर्चेजिंग पॉवर नहीं बढ़ेगी उसकी वो खर्च कैसे करेगा। खर्च होंगे डिमांड बढ़ेगी तब जाकर इकॉनमी पटरी पर आएगी। पर दुर्भाग्य से इस तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। उस कारण से आज लोग सब तकलीफ के अंदर है। और बिजनेस, व्यापारी हों, चाहें दुकानदार हो दुकानें खोल रहे है पर माल बिक नहीं रहा है।

 

इसलिए सोनिया गांधी जी ने कहा था लॉकडाउन शुरू होते ही कि सरकार को चाहिए कि 21 दिन का एडवांस पेमेंट करें नरेगा मजदूरों को उनकी बात सुनी नहीं गई। अभी कांग्रेस मांग कर रही है कि 10 हजार रू प्रति गरीब परिवार को दीजिए। जिससे उसकी पर्चेजिंग पॉवर बढे, उसी कारण से डिमांड बढेगी और व्यापार शुरू होंगे। इसलिए जो मांग की जा रही है पूरे देश के अंदर गरीबों के लिए पैकेज दीजिए, जिससे कि गाड़ी पटरी पर आए।

 

सोनिया गांधी जी जो कांग्रेस अध्यक्ष हैं और राहुल गांधी जी ने पहले भी कहा था अभी हाल ही में कहा है। हम आलोचना नहीं कर चाहते सरकार की, सरकार के साथ में कांग्रेस पार्टी खड़ी मिलेगी आपको हर वक्त में, उसके बावजूद भी अगर कोई सलाह देते है विपक्ष वाले उन सलाह को मानना नहीं मानना सरकार का काम है। परंतु सुनने की बजाय उन सलाह को लेकर आलोचना करना, Condemn करना कैसे-कैसे शब्द काम में लिए जाते हैं, पूरी मीडिया में आते हैं, यह दुर्भाग्य है। मैं फिर कहना चाहूंगा कि कांग्रेस प्रेसिडेंट ने जो आह्वान किया है, स्पीक अप इंडिया इसके माध्यम से आज लाखों लोगों ने जो अपनी भावना व्यक्त की है।

 

यह तमाम प्रयास केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए और दबाव देने के लिए किया जा रहा है। जिससे कि आने वाले वक्त में गरीब आदमी का, मजदूर का, बेसहारा इंसान का भला हो सके और आज जो दृश्य बने हैं देश के अंदर वह समाप्त हो सके और गाड़ी पटरी पर आ सके आर्थिक रूप से भी सामाजिक रूप से भी और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात कही जा रही है, उस पर भी ध्यान जा सके। मुझे उम्मीद है कि केंद्र सरकार आज के इस अभियान के माध्यम से एक मैसेज लेगी और उसके बारे में टीका टिप्पणी करने की बजाय किस रूप में आगे आकर फैसला कर सकती है, 10000 रुपये प्रति व्यक्ति प्रति परिवार इसका फायदा मिलेगा देश को, यह मैं मानता हूं।

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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