आशा वर्कर कोरोनो जंग जीतने की जगा रही ‘आशा’


आशा वर्कर कोरोनो जंग जीतने की जगा रही ‘आशा’

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए बीते दो माह से देशभर में लॉकडाउन है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात इस जंग में योगदान दे रहे हैं। आशा कार्यकर्ता को गांवों, शहरों, कस्बोंमें कोरोना संक्रमित लोगों की पहचान का जिम्मा सौंपा गया है।

 

आशा घर-घर जाकर लोगों में कोरोना से जंग जीतने की ‘आशा’ जगा रही हैं। ऐसी ही एक आशा कार्यकर्ता है रूकमणी, जैतपुर ब्लाक के मुड़ारी गांव की आशा कार्यकर्ता रूकमणी तिवारी किसी परिचय की मोहताज नहीं है। वह अपनी गृहस्थ जिम्मेदारियों को पीछे छोड़कर समाज के प्रति अपनी सहभागिता को बखूबी निभा रही है।

 

उनके इन्ही उत्कृष्ट सेवाओं के लिए मंडल व जिला स्तर पर कई बार इन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। जनपद मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर मुड़ारी गांव बसा हुआ है।

 

इसकी आबादी लगभग 8000 है। यहां स्वास्थ्य विभाग ने आठ आशा कार्यकर्ताओं को तैनात किया हैं। वैसे तो यह सभी आशा अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभा रही हैं, लेकिन रूकमणी तिवारी इन सबके लिए एक मिसाल हैं। वह समुदाय के बीच अपना सबसे ज्यादा समय बिता रही हैं।

 

संयुक्त परिवार में रहकर भी घर और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन बहुत अच्छे ढ़ग से कर रही हैं। रूकमणी के पति कमलेश तिवारी गांव में ही परचून की छोटी सी दुकान रखे हैं। वह समय-समय पर रूकमणी को प्रात्सोहित करते रहे हैं।

 

रूकमणी कोरोना संक्रमण से बचने के लिए ग्रामीणों को हाथ धोने के तरीके, आसपास साफ सफाई का ध्यान रखने व होम क्वारेंटाइन के फायदे बुंदेलखंडी भाषा केगाने के जरिए लोगों तक पहुंचा रही हैं। उनका यही अंदाज ग्रामीणो को बहुत प्रभावित भी कर रहा है।

 

जैतपुर सीएचसी अधीक्षक डा. पीके सिंह का कहना है कि मौजूदा समय में हर आशा अपने काम को पूरी निष्ठा के साथ अंजाम दे रही है। लेकिन मुड़ारी गांव की आशा रूकमणी की लगन कोरोना योद्धाओं के लिए मिसाल पेश कर रही हैं।

 

उत्कृष्ट सेवाएं देने पर कई बार मिला सम्मान जैतपुर ब्लाक के मुड़ारी गांव की आशा रूकमणी तिवारी अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए कई बार मंडल व जिला स्तर पर सम्मानित हो चुकी हैं। वर्ष 2018-19 के सालाना आशा सम्मेलन में जनपद में प्रथम पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा अन्य वार्षिक आशा सम्मेलनों में दो बार तीसरा स्थान रहा है।

 

रूकमणी ने वर्ष 2019-20 में परिवार नियोजन कार्यक्रम में सर्वोच्च योगदान दिया। 25 महिला नसंबदी व 11 अंतरा इंजेक्शन की सेवाओं से लोगों को लाभान्वित करवाया। इसके लिए मंडल स्तर पर सम्मानित होकर जिले का नाम रोशन किया है।

 

- प्रवीण कुमार

 

 

 

 

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इस मंत्री ने गलती से ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, हुए ट्रोल


इस मंत्री ने गलती से ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, हुए ट्रोल

आज सुबह से सोशल मीडिया पर एक खबर को काफी तेजी से वायरल किया जा रहा है. दरअसल, कर्नाटक में BS येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली BJP सरकार के मंत्रियों ने बीते मंगलवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली. इस दौरान जब BJP नेता और विधायक मधु स्वामी पद और गोपनीयता की शपथ ले रहे थे, तभी उन्होंने गलती से बतौर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. 

 

 

बता दें कि, मधु स्वामी जब शपथ ले रहे थे तो उन्हें मंत्री बोलना था, लेकिन जुबान फिसलने के चलते वह मुख्यमंत्री बोल पड़े. अब इस खबर को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया जा रहा है. खास बात ये है कि इस दौरान CM येदियुरप्पा भी मौके पर मौजूद थे और मधु स्वामी की इस गलती पर मुस्कुरा दिए. इतना ही नहीं येदियुरप्पा ने मधु स्वामी को बाद में गले भी लगाया.

 

गौरतलब है कि, बीते मंगलवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल वजुभाई वाला ने 17 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलायी. जिन विधायकों को मंत्री पद से नवाजा गया है, उनमें बी. श्रीरमुलु, सीटी रवि, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केएस ईश्वरप्पा और पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार का नाम शामिल है. बता दें कि, येदियुरप्पा के 26 जुलाई को CM बनने के बाद उनके मंत्रिमंडल का यह पहला विस्तार है. उन्होंने 29 जुलाई को विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित किया था. 

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22 वर्ष पहले दफ़न हुए व्यक्ति का नहीं गला शरीर, मिला ज्यों का त्यों


22 वर्ष पहले दफ़न हुए व्यक्ति का नहीं गला शरीर, मिला ज्यों का त्यों

उतर-प्रदेश के बांदा जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, कई लोग इसे देखकर खुदा का करिश्मा मान रहें हैं तो वहीं कई लोग नेक इंसाल का दर्जा दे रहें हैं. बताया जा रहा है कि, यहां 22 वर्ष पहले कब्र मे दफनाए गए एक शख्स का जनाजा ज्यों का त्यों पड़ा मिला है.

 

ये मामला तब सामने आया जब मूसलाधार बारिश के चलते कब्रिस्तान में मिट्टी कटने से एक कब्र धंस गई और उसमें  22 वर्ष पहले दफन एक शख्स का कफन में लिपटा जनाजा़ दिखने लगा. यहां देखते ही देखते मौके पर काफी लोगों पहुंच गए. जब कफन में लिपटी लाश को निकाला गया तो वहां मौजूद सैकड़ों लोग देखकर दंग रह गए. क्योंकि 22 सालों बाद भी लाश ज्यों कि त्यों निकली.

 

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दरअसल, ये मामला उतर-प्रदेश के जिले बांदा के बबेरू कस्बे के अतर्रा रोड स्थित घसिला तालाब के कब्रिस्तान की है. यहां मूसलाधार बारिश से कई कब्रों की मिट्टी बह गई और एक कब्र में दफन जनाजा़ बाहर दिखने लगा. इसके बाद लोगों ने कब्रिस्तान कमेटी को इसकी जानकारी दी. कब्रिस्तान कमेटी के सदस्‍यों द्वारा जब कब्र की धंसी हुई मिट्टी को हटाकर देखा गया, तो उसमें दफनाया गया जनाजा ज्यों का त्यों पड़ा मिला.

 

गौरतलब है कि, इस कब्र में 22 वर्ष पहले 55 वर्षीय पेशे से नाई नसीर अहमद नाम के शख्स को दफनाया गया था. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नसीर अहमद पुत्र अलाउद्दीन निवासी कोर्रही, थाना बिसंडा बबेरू में नाई की दुकान थी. उन्‍हें लगभग 22 वर्ष पहले दफन किया गया था. जबकी दूसरी तरफ मृतक नसीर के एक रिश्तेदार बताते हैं कि उनका कोई बेटा नहीं था. 

 

22 वर्ष पहले उनका निधन हुआ था, जिसके बाद उनलोगों ने ही उनके शव को दफनाया था. लेकिन, आज उनका जनाजा मिटटी धंसने की वजह से बाहर निकल आया. न शव ख़राब हुई थी और न ही कफ़न पर कोई दाग लगा था. हालंकी, बाद में स्थानीय मौलानाओं की मौजूदगी में शव को कल देर रात उसे दूसरी कब्र में दोबारा से दफन किया गया.

 

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