जानें कौन हैं अर्जुन देशपांडे, जिसने रतन टाटा से की बिजनेस डील


जानें कौन हैं अर्जुन देशपांडे, जिसने रतन टाटा से की बिजनेस डील

आज सुबह से सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा देश के एक नया उभरता हुआ चेहरा अर्जुन देशपांडे की हो रही है. अगर रतन टाटा जैसा बड़ा उद्योगपति किसी कंपनी में निवेश करे तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वह कितनी बड़ी होगा. लेकिन गुरुवार को उन्होंने एक छोटी सी कंपनी में निवेश किया है, जो महज दो साल पुरानी है. बल्कि वह एक स्टार्टअप है, जिसे अर्जुन देशपांडे ने शुरू किया है. ये स्टार्टअप है 'जेनरिक आधार'. वैसे तो ये पता नहीं है कि ये डील कितने में हुई है, लेकिन बताया जा रहा है कि टाटा ने करीब 50 फीसदी हिस्सा खरीद लिया है.

 

दरअसल, अर्जुन देशपांडे की उम्र अभी केवल 18 साल है, जिन्होंने दवा का खुदरा कारोबार करने वाली कंपनी जेनरिक आधार शुरू की है. जब वह 16 साल के थे तब उन्होंने इस कंपनी की शुरुआत की थी.

 

कैसे काम करती है अर्जुन की कंपनी?

सीधे मैन्युफैक्चरर्स से सामान लेकर रिटेलर्स को बेचती है. इस वजह से रिटेलर्स की कमाई करीब 20 फीसदी बढ़ गई है. वर्तमान में इस कंपनी का रेवेन्यू करीब 6 करोड़ रुपये हैं और अगले 3 सालों में इसे 150-200 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.

 

बता दें कि अर्जुन को अपनी मां से प्रेरणा मिली है, जो इंटरनेशनल फार्मा बिजनेस से जुड़ी हुई हैं. वह अपने स्कूल की छुट्टियों में अमेरिका, वियतनाम, चीन और दुबई जैसे देशों में जाया करते थे, जिस दौरान उन्हें ये कंपनी खोलना का आइडिया सूझा. वह बहुत से आयातकों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से भी मिलते थे, जिससे पता चला कि अन्य देशों में सस्ती दवाएं मिलती हैं. उन्होंने जब मां से पूछा कि भारत में दवाइयां महंगी क्यों हैं तो पता चला कि भारत में अधिकतर जेनरिक दवाएं ब्राड के जरिए प्रमोट की जाती हैं, इसलिए वह महंगी होती हैं.

 

अर्जुन का मिशन भी जान लीजिए

जेनरिक कंपनी के जरिए अर्जुन देशपांडे एक मिशन पर काम कर रहे हैं. वह चाहते हैं कि बुजुर्गों और पेंशनभोगियों को जरूरत की दवाई कम से कम कीमत में मिले. वह कहते हैं कि करीब 60 फीसदी आबादी महंगी होने की वजह से दवा नहीं खरीद पाती है, इसलिए वह कीमत को घटाना चाहते हैं.

 

अर्जुन का आइडिया बिल्कुल यूनीक है. उनका मॉडल फार्मेसी-एग्रीगेटर बिजनस मॉडल है. ये यूनीक आइडिया ही है, जिसमें रतन टाटा जैसे बड़े कारोबारी को भी लुभा लिया, जिसके चलते उन्होंने जेनरिक आधार कंपनी में निवेश किया है.

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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