अमित शाह तालिबान की भाषा बोलते हैं- आचार्य प्रमोद कृष्णन


अमित शाह तालिबान की भाषा बोलते हैं- आचार्य प्रमोद कृष्णन

 

कल्कि पीठ के आचार्य और लखनऊ के कोंग्रेसी सांसद प्रमोद कृष्णन ने मोदी सरकार और गृह मंत्री अमित शाह की तुलना तालिबानियों से की हैं. उन्होंने माननीय गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना करते हुए कहा कि अमित शाह तानाशाह की राजनीति कर रहे हैं. इसलिए तालिबान की भाषा बोल रहे हैं. 

 

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सीएए व एनआरसी को लेकर पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह लोगों में गफ़लतफमी पैदा कर रहे हैं कि कांग्रेस और विपक्षी पार्टी इसके विरोध में हैं. लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टी इसके विरोध में नहीं है. बल्कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जो वोटों का धुर्वीकरण किया जा रहा है, उससे देश को खतरा है. 

 

आचार्य प्रमोद ने आगे कहा कि हम सीएए व एनआरसी के खिलाफ नहीं है. लेकिन इसे किसी खास धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इसे धर्म से जोड़कर हमारे खिलाफ प्रचार कर रहे हैं, जो बिल्कुल गलत है. भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. जहां सभी धर्मों के लोगों को सामान अधिकार और अवसर प्राप्त है. ऐसे में केवल मुस्लिम वर्ग को सीएए से अलग रखना, वोटों की राजनीति को दर्शाता है. 

 

उन्होंने भारत की संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भगवान् श्री राम ने शबरी के जूठे बेर खाएं तो उन्होंने उनसे उनकी जाति नहीं पूछी थी बल्कि सनातन धर्म की संस्कृति और संस्कार को प्रदर्शित किया था. वहीं, आप जाति और धर्म के आधार पर लोगों को देश में शरण देना चाहते हैं. ये अपनी संस्कृति और संस्कार नहीं है. 

 

वहीं, जब मीडिया ने उनसे शॉट गन शत्रुघ्न सिन्हा पर उनकी राय मांगी तो उन्होंने कहा कि शत्रुघ्न सिन्हा कौन हैं, वे उन्हें जानते हैं. किस पार्टी से हैं और कहां के संसद हैं. मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं हैं. अगर वे कांग्रेस में हैं तो वो उनकी दोहरी राजनीति को दर्शाता है क्योंकि इस प्रकार के लोग भले ही पार्टी बदल लें लेकिन उनकी आत्मा अपनी पार्टी के साथ होती है.

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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