जानें टीवी पर्दे की बहू, अमेठी की सांसद और राजनेत्री स्मृति ईरानी की जीवनी


जानें टीवी पर्दे की बहू, अमेठी की सांसद और राजनेत्री स्मृति ईरानी की जीवनी

टीवी पर्दे की बहू और अमेठी की सांसद राजनेत्री स्मृति ईरानी अपने बेबाक बोल के लिए जानी जाती है। इनका नाम उन नेताओं की लिस्ट में है जो बिना किसी डर के मीडिया के सामने सच बोलते हैं। वर्तमान समय में स्मृति ईरानी अमेठी से सांसद और मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री हैं। आज हम आपको अमेठी की सांसद और छोटे पर्दे की बहू की जीवनी के बारे में बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं।

 

स्मृति ईरानी का जन्म 23 मार्च 1977 को एक पंजाबी परिवार में हुआ है। इनके पिता का नाम अजय कुमार मल्होत्रा और माँ का नाम मां शिबानी है। जहां इनके पिता पंजाबी तो मां बंगाली परिवार से ताल्लुक रखते हैं। स्मृति ईरानी तीन बहनें है जिसमें वह सबसे बड़ी हैं। ईरानी ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा दिल्ली से प्राप्त की है। प्रारंभिक पढाई हॉली चाइल्ड औक्सिलियम स्कूल से पूरी की और फिर माध्यमिक पढाई दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरी की है।

 

1990 के दशक में स्मृति ईरानी दिल्ली छोड़ मुंबई आ गई। यहीं से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की और 1998 में फेमिना मिस इंडिया सुंदरता प्रतियोगिता में भाग ली। इस प्रतियोगिता को जीतने में वह कामयाब नहीं हुई लेकिन गलैमर वर्ल्ड में अपना छाप छोड़ गयी। इसके बाद उन्हें एकता कपूर की सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में काम करने का मौका मिला। जो काफी पॉपुलर हुआ। इसी सीरियल से ईरानी छोटे पर्दे की बहू बनकर उभरी। ये सीरियल 3 जुलाई 2000 को शुरू होकर 6 नवंबर 2008 तक चला था। इसके बाद उन्होंने दर्जनों सीरियल में काम किया।

 

 

राजनीतिक करियर

स्मृति ईरानी ने 2003 में अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत की। इसके लिए उन्होंने बीजेपी को चुना। उनके बारे में ऐसा कहा जाता है कि उनके दादा आरएसएस में थे। इस समय उन्हें महाराष्ट्र युवा विंग के उपाध्यक्ष का पद सौंपा गया। जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। इसके बाद उनकी राजनैतिक पहुँच बढ़ती गयी।

 

हालांकि, एक बाद उन्होंने अपने ही पार्टी के तत्कालीन गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा था कि उन्हें सीएम पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। जिसके लिए स्मृति ईरानी की पार्टी के अंदर और बाहर बहुत आलोचना हुई। जब पार्टी का दबाव बढ़ा तो उन्होंने अपना बयान वापस लिया और माफ़ी मांगी थी। इसके बाद वह पार्टी से लगातार जुड़ी रही और पार्टी के पक्ष में बहुत जनसभाओं को सम्बोधित किया।

 

इसके बाद साल 2014 में लोकसभा चुनाव में मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला और मोदी सरकार बनी। इस सरकार में उन्हें कैबिनेट में शामिल किया गया। इस चुनाव में वह अमेठी से राहुल गाँधी के खिलाफ चुनाव लड़ी थी लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था लेकिन जब 2014 में लोकसभा चुनाव हुआ तो इस चुनाव में वह राहुल गाँधी को शिकस्त देने में कामयाब हुई थी।

 

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में स्मृति ईरानी को ऊर्जा एवं प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेवारी दी गयी है। आशा करते है कि स्मृति ईरानी अपने दायित्व को सच्ची निष्ठ से पूरे करे।

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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