सुलग रहा दुनिया का फेफड़ा, भविष्य के संकेत


सुलग रहा दुनिया का फेफड़ा, भविष्य के संकेत

एक तरफ पूरी दुनिया भीषण ग्लोबल वार्मिंग के खतरे का सामना कर रही है जिससे धरती के अस्तित्व को बचाने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक और पर्यावरण विद लगातार कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी तरफ धरती पर आक्सीजन की 20 फीसदी उपलब्धता को सुनिश्चित करने वाला दक्षिण अमेरिका का अमेजन जंगल महाभयानक आग से बुरी तरह से झुलस रहा है.

 

यहां पर पूरी दुनिया का करीब आधे से ज्यादा रेनफारेस्ट पाया जाता है. इसके अलावा यहां करीब 16 हजार से भी अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, अमेजन का घना जंगल प्राकृतिक संसाधनों से भरा हुआ है. इसके अलावा वनस्पति और जीव जंतुओं को संयुक्त रूप से देखें तो यहां पर 30 लाख प्रजातियां और 10 लाख मूलनिवासी रहते हैं.

 

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अमेजन के घने जंगलों से दुनिया को 20 फीसदी आक्सीजन की आपूर्ति होती है, इसी कारण से इसे दुनिया का फेफड़ा कहा जाता है. यहां के जंगलों में लंबे समय से भीषण आग लगी हुई है जिसके कारण अब करीब एक लाख वर्ग किलोमीटर का जंगल जलकर खाक हो गया है. जिसके चलते ग्लोबल वार्मिंग में काफी बढ़ोत्तरी हुई है. इस महा भयंकर आग के कारण धुंए का गुबार कई हजार किलोमीटर तक के आसमान में फैल गया है.

 

इससे फैलने वाले प्रदूषण के बारे में यूरोपीय संघ के कॉपर्निकस एटमास्फ़ियर मानिटरिंग सर्विस (कैम्स) का कहना है कि इसका धुआं अटलांटिक कोस्ट तक फैल रहा है. यहां तक कि 2000 मील दूर साओ पाउलो का आसमान भी धुएं से भर गया है. आग से बड़े पैमाने पर कार्बन डाई ऑक्साइड पैदा हो रहा है. कैम्स ने दावा किया है कि इस साल अभी तक 228 मेगाटन के बराबर कार्बन डाई ऑक्साइड पैदा हुई, जोकि 2010 के बाद सर्वाधिक है. इतना ही नहीं इस आग के कारण बड़े पैमाने पर जहरीली कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस भी पैदा हो रही है.

 

 


 

कार्बन मोनो ऑक्साइड ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में लकड़ी के जलने से पैदा होती है. कैस्म के नक्शे में ज़हरीली कार्बन मोनो ऑक्साइड दक्षिणी अमरीका के तटीय इलाकों से आगे जाती दिखाया गया है. अमेजन के विशाल जंगल पूरी दुनिया का 4 फीसदी है और यह हमारे देश भारत से करीब दोगुना है. एक आंकड़े के मुताबिक मौजूदा साल में ही अब तक अमेजन में 74,000 बार आद लगने की घटनाएं हो चुकी हैं. वहीं ब्राजील की नैशनल इंस्टिट्यूट फॉर स्पेस रिसर्च के सैटलाइट डेटा के अनुसार, 2018 में आग लगने की घटनाओं में 84% की वृद्धि देखी गई है.

 

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लेकिन ये बड़े ही अफसोस की बात है कि ऐसे गंभीर मुद्दे पर ब्राजील की सरकार का उदासीन रवैय बना हुआ है. जो कि चिंताजनक है. ब्राजीलियन राष्ट्रपति राष्ट्रपति जैर बोल्सोनारो दावा करते हुए कहते हैं कि उनकी सरकार को बदनाम करने के लिए एक एनजीओ ने जान-बूझकर इस जंगल में आग लगाई है. बोल्सोनारो खास तौर पर पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि अमेजन की आग को जबरन मुद्दा बनाया जा रहा है ताकि ब्राजील के आर्थिक विकास की गति को बाधित किया जा सके.

 

बहरहाल दुनियाभर से पड़े दबाव के बीच बोल्सोनारो ने अमेजन में सेना को तैनात करने का आदेश दे दिया है. लेकिन विश्व समुदाय ने राष्ट्रपति पर पर्यावरण के मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं का आरोप लगाया है. वैज्ञानिकों का भी कहना है बोल्सोनारो के कार्यकाल में जंगलों की कटाई व्यापक स्तर पर हुई है. उनके कार्यकाल में गैर-कानूनी तरीके से जंगल काटनेवालों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई जिससे स्थिति भयावह बनती जा रही है.

 

आम तौर पर शुष्क मौसम में जंगल में आग लगने की घटनाएं होती हैं. लेकिन अमेजन की वर्षा के मौसम में लगी. इसके अलावा कई बार जान-बूझकर भी जंगलों में आग लगाई जाती है ताकि उस जमीन का प्रयोग खेती के लिए किया जा सके. अमेजन में विश्व का 10 फीसदी बायोमास यानि कि जैव ईंधन है. इस कारण इन जंगलों में बड़ी मात्रा में पूरे विश्व का कॉर्बन रहता है. जंगल में लगी आग के कारण बड़े पैमाने पर जंगल से कॉर्बन उत्सर्जित होगा और यह ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ने का भी कारण है.

 

खास बातें....

 

- विश्व के कुल रेनफॉरेस्ट क्षेत्र का आधे से अधिक हिस्सा अकेले अमेजन के जंगल हैं.

-अमेजन के जंगलों का क्षेत्र 5.5 मिलियन स्क्वॉयर किमी है, जो भारत के कुल क्षेत्रफल से अधिक है.

-यह पूरी पृथ्वी के करीब 4% क्षेत्र में फैला हुआ है.

-विश्व के करीब 60% रेनफॉरेस्ट हिस्सा अकेले अमेजन जंगलों में है.

-अमेजन जीव पारिस्थितिकी संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है. यहां पर पृथ्वी के 30% से अधिक पेड़-पौधों और कीटों   का निवास स्थान है.

-अमेजन के जंगलों में 39 हजार करोड़ पेड़ हैं और 16,000 से अधिक जीव प्रजातियां मौजूद हैं.

 

 कुलदीप सिंह 

 

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