कोरोना वायरस - गिरती अर्थव्यवस्था सरकार के लिए हैं चुनौतियां - चिरंजीत शर्मा


कोरोना वायरस -   गिरती अर्थव्यवस्था सरकार के लिए हैं चुनौतियां - चिरंजीत शर्मा

देश के जाने-माने कंसल्टेंट, औधोगिक सलाहकार और एक्सीलेंट चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के राष्ट्रीय वाइस प्रेसिडेंट चिरंजीत कुमार शर्मा से हमारे रिपोर्टर ने लाकडाउन से आने वाले समय में व्यापारिक परिवेश में किस किस प्रकार की चुनौती देखने को मिलेगी उस पर गहन चर्चा की जिस पर उन्होंने बताया कि आने वाला समय भारत के छोटे और मझलै व्यापारिक प्रतिष्ठान के साथ साथ बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए चुनौती पूर्ण होगा। जिसके साथ साथ  सरकार को भी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बहुत अधिक चुनौतीपूर्ण परिवेश में कार्य करना पड़ेगा।

 

जिससे बैंकों और वित्तीय प्रबंधन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना लाजिमी होगा और लोगों को नौकरी मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

जिसके दुष्प्रभाव को कम करने के लिए सरकार ने जो अभी तक फैसले लिए हैं वो सराहनीय है। लेकिन इससे केवल दुष्प्रभाव का थोड़ा असर कम होगा उसको और प्रभावी बनाने के लिए ‌सरकार को और मजबूत और सशक्त समाधान ढूंढने होंगे ।

 

चिरंजीत शर्मा जी  ने बताया कि जिस तरह चालू तिमाही और पिछली तिमाही के दौरान अधिकांश कंपनियों की आय में दस फीसदी से अधिक कमी आयी है। इससे कंपनियों का लाभ दोनों तिमाहियों में पांच फिसदी से अधिक गिर सकता है और देश की अर्थव्यवस्था चालू वित्तीय वर्ष में 02 प्रतिशत से नीचे रहने का अनुमान है। अगर लाकडाउन का समयविधी और बढ़ायी गयी तो उससे दैश में रोजगार के स्तर पर 60 फीसदी तक नौकरियां कम हो सकती हैं।

 

 

ईसीसीआई के राष्ट्रीय वाइस प्रेसिडेंट ने कहा कि हमारे चेमबर के राष्ट्रीय सर्वे से एक अनुमान लगाया जा सकता है कि देश मे 35 फीसदी कंपनियों में नौकरी जाने की दर 25 से 35  प्रतिशत होगी। जिसके लिए सरकार को उधोगों को एक आर्थिक  पैकेज देना होगा। जिसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक आर्थिक पैकेज की पिछले दिनों घोषणा भी की है। और बेहतर कदम उठाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार आर्थिक विशेषज्ञों से बात कर रही हैं जिसमें ईसीसीआइ अपने सुझाव सरकार समय समय पर प्रदान कर रही है और हमे विश्वास है निश्चित तौर पर सरकार सकारात्मक कदम उठाएँगी जिससे देश में आने वाले समय में ‌आरथिक मंदी का असर देश में कम से कम देखने को मिले और देश को आर्थिक प्रगति के लिए दोबारा रोड मेप तैयार किया जा सके।

 

इसके साथ चिरंजीत शर्मा जी ने हमें बताया कि विश्व के बदलते व्यापारिक परिवेश और राजनीतिक हालात से स्वयं रोजगार को बढ़ाने का मौका मेहनतकश और पढ़ें लिखे नवयुवकों को मिलने की अपार संभावनाएं पैदा होगी जिसका फायदा उठाने का यह सही समय साबित होगा।

देश के नवयुवकों को स्वरोजगार पर ध्यान केंद्रित करने और मेहनत करने से देश को एक सशक्त अर्थव्यवस्था बनने मे‌ सहायक सिद्ध होगी।

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शेयर बाजार में भारी गिरावट से कारोबारी मायूस


शेयर बाजार में भारी गिरावट से कारोबारी मायूस

शेयर बाजार में भारी गिरावट से मायूस हुए देश भर में छोटे, मझले और बड़े कारोबारी. आज भारतीय शेयर बाजार में काफी कमजोरी देखी गई. शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स 90 अंक से टूटा और निफ्टी भी सपाट खुलने के बाद फिसल गया. 

 

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आज सुबह 9.39 बजे सेंसेक्स पिछले सत्र से 68.36 अंकों यानी 0.18 फीसदी की कमजोरी के साथ 37,259.65 पर कारोबार कर रहा जबकि निफ्टी 34.20 अंक यानी 0.31 फीसदी फिसलकर 10,982.80 पर कारोबार कर रहा था. 

 

इसके साथ BSE के 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सत्र के मुकाबले मामूली कमजोरी के साथ 37,298.73 पर खुला और 37,346.05 तक उछला. मगर, सुस्त कारोबारी रुझान के कारण सेंसेक्स करीब 90 अंक पिसलकर 37,237.47 पर आ गया.

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देश भर में 1 वर्ष में बंद किए गए 5500 ATM और 600 ब्रांच : RBI


देश भर में 1 वर्ष में बंद किए गए 5500 ATM और 600 ब्रांच : RBI

देश में मौजूद सरकारी बैंक बड़े-बड़े शहरों में अपने ATM और ब्रांच को बंद कर रहें हैं. इसकी वजह यह बताई जा रही है कि शहर में रहने वाले लोग इंटरनेट बैंकिंग पर बहुत ज्यादा जोर दे रहें शिफ्ट हो गए हैं, जिसकी वजह से सरकारी बैंकों का ऐसा मानना है कि ब्रांच और ATM जैसे फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को कम किया जा सकता है. बता दें कि, पिछले 1 वर्ष में देश के 10 सरकारी बैंक ने कुल मिलाकर 5,500 ATM और 600 ब्रांच बंद किए हैं.

 

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बताया जा रहा है कि, देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने जून 2018 से 2019 के बीच 420 ब्रांच और 768 ATM बंद किए हैं. वहीं विजया और देना बैंक को मिलाने के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा ने कुल40 ब्रांच और 274 ATM पर इस बीच शटर गिराया है. इस लिस्ट में पंजाब नैशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया,  केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूनियन बैंक और इलाहाबाद बैंक भी शामिल हैं.

 

गौरतलब है कि, जहां एक तरफ सरकारी बैंक खर्च घटाने के लिए नेटवर्क में कटौती कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट सेक्टर के एक्सिस बैंक, HDFC बैंक और ICICI बैंक ने अपने बैंकिंग नेटवर्क का विस्तार किया है. RBI के आंकड़ों से पता चलता है कि इन बैंकों ने खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में अपने ATM लगाए हैं.

 

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