छात्रों में न्याय कुशल व्यवहार विकसित करने की जरूरत- रमेश चंद्र रतन, रेल बोर्ड रेलमंत्रालय


छात्रों में न्याय कुशल व्यवहार विकसित करने की जरूरत- रमेश चंद्र रतन, रेल बोर्ड रेलमंत्रालय

- एमिटी विश्वविद्यालय स्थित एमिटी विधि विद्यालय,नोएडा में दो दिवसीय राष्ट्रीय वैकल्पिक न्याय विवाद समाधान प्रतियोगिता के तृतीय संस्करण का आयोजन सम्पन्न हुआ।
 

नईदिल्ली-

छात्रों में न्याय कुशल व्यवहार विकसित करने की जरूरत है। रेलबोर्ड पीएसी के चेयरमैन रमेश चंद्र रतन ने एमिटी विश्वविद्यालय के विधि विद्यालय नोएडा में राष्ट्रीय वैकल्पिक न्याय विवाद समाधान प्रतियोगिता में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि विधि के छात्र को आज और महत्ता बढ़ गई है। इसे व्यवहार के रूप में लें। आज जिस भी सेक्टर में जाएंगें वहा विधि के छात्रों की मांग है।

 

रमेश चंद्र रतन ने कहा कि एमिटी विश्वविद्यालय विशिष्ट शिक्षा के लिए जाना जाता है। जिस प्रकार से विगत कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय ने अपने मानदंड तय किए हैं इससे कई उत्कृष्ट छात्र यहां से विभिन्न क्षेत्रों में नाम कमा रहे हैं। इस मौके पर न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने विधि के छात्रों को उत्साहवर्द्धन करते हुए कहा कि आप भी कल के भविष्य हैं।

 

निश्चिततौर पर आज के दौर में आपकी जिम्मेदारी बढ़ गई है। बेहतर पढ़ाई है बेहतर वकील का निर्माण करता है। इस मौके पर आरएस गोस्वामी ने कहा कि आज छात्रों को अपने मिशन की ओर ध्यान देना होगा। बिना लक्ष्य के कई छात्र चले आते हैं। अभी एक वर्ष में 15000 छात्र रजिस्ट्रेशन के लिए आए हैं ऐसे में प्रतियोगिता को जान लेना चाहिए।

 

छात्रों को संबोधित करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के एडवोकेट श्याम एस शर्मा ने कहा कि आज वकील को नए युग में नए तरह के जजमेंट को सीखना चाहिए। आज मेटिएटर नए तरह का भूमिका की शुरुआत हुई है जिसके लिए आज युवाओं को सीखना चाहिए क्योंकि आने वाले दिनों में इसका महत्व बढ़ेगा।

 

इसके पहले अतिथियों को स्वागत करते हुए एमिटी विधि संस्थान, नोएडा एवं संस्थान के अतिरिक्त निदेशक, डॉ आदित्य तोमर ने कहा कि हमारी कोशिश है कि छात्रों को परफेक्ट एडवोकेट के रूप में तैयार कर ही यहां से भेजे जिसके लिए एमिटी विश्वविद्यालय लगातार कई तरह के प्रतियोगिता का आयोजन करता रहा है जिसमें देशभर के एक्सपर्ट सहित जज अपने अनुभव से छात्रों को प्रोत्साहित करते हैं।

 

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प्रतियोगिता के चार प्रमुख विषय कुछ इस प्रकार थे -

मध्यस्थता-समझौता वार्ता, मुवक्किल परामर्श प्रतियोगिता, मध्यस्थता निर्णय लेखन आदि। प्रतियोगिता का उद्देश्य भावी अधिवक्ताओं को वास्तविक समस्याओं से अवलोकित कराकर  परंपरागत न्यायालय व्यवस्था से इतर वैकल्पिक न्याय की तरफ प्रेरित एवं मुवक्किलों के प्रति सुगम व्यवहार को बढ़ावा देना था। प्रतियोगिता में कुल 48 दलों ने हिस्सा लिया।

 

पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर रमेश चंद्र रतन,चेयरमैन, पीएसी रेलबोर्ड, रेल मंत्रालय, भारत सरकार, एन. डी. गुप्ता, सांसद राज्य सभा, न्यायमूर्ति प्रतीक जालान, दिल्ली उच्च न्यायालय से और समीप शास्त्री, अध्यक्ष, राष्ट्रीय गवर्नेंस एवं लीडरशिप संस्थान उपस्थित रहे।

 

पुरस्कारों का विवरण कुछ इस प्रकार रहा: -

 

प्रथम स्थान, मुवक्किल परामर्श प्रतियोगिता: - महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय मुम्बई के छात्र रुचिर जैन एवं आयुषी भूतरा और उपविजेता सिम्बायोसिस पुणे की छात्राएं अक्षिता गोयल तथा कणिका जैन रहीं।
मध्यस्थता-समझौता वार्ता में प्रथम स्थान नालसार हैदराबाद की निष्ठा गोयल और अर्चित देवा ने प्राप्त किया, उपविजेता के रूप में, यू.आई.एल.एस  के छात्र हर्षिल गुप्ता एवं आर्यमन ठाकुर रहे।

 

समझौता प्रतियोगिता में एन.एल.यू, जोधपुर से आये सौरभ थॉम्पन एवं प्रियांशी छज्जर विजयी रहे। उपविजेता का स्थान यू.पी.ई.एस देहरादून से आईं ईश्वर एंगु एवं स्मृति गांधी को मिला।

 

मध्यस्थता निर्णय लेखन में एन.एल.यू जोधपुर के प्रग्ज्ञानश निगम और राधिका भाटी ने बाज़ी मारी। समारोह की चलवैजंती नालसार हैदराबाद को उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रदान की गई। कार्यक्रम की संयोजिका के रूप में प्रियंका घई जी, मौजूद रहीं। कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं परायण में डॉ डी. के. बंधोपाध्याय, अध्यक्ष, समस्त एमिटी विधि संस्थान, नोएडा एवं संस्थान के अतिरिक्त निदेशक, डॉ आदित्य तोमर जी का विशेष सहयोग एवं योगदान रहा।

 

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