हर दिन 2000 लोगों का खाना चट कर देने वाले टिड्डियों का भारत में 26 साल बाद सबसे बड़ा हमला


वजन सिर्फ 2 ग्राम और एक दिन में महज 2 ग्राम खाना खाने वाली टिड्डियों का दल आज भारत में किसानों को परेशान कर रहा है। भारत में राज्यों के फसलों पर टिड्डियों ने जोरदार हमले किए हैं। इससे बचने के लिए जहां प्रशासन ने तैयारियां की हैं वहीं किसान भी अपनी तरह से तैयारी कर रखी हैं लेकिन सभी तैयारियां धरी की धरी रह जाती है जब इनका हमला होता है। किसान विभिन्न तरह से इससे बचाव के लिए उपाय किए हैं कोई थाली, शंख बजा रहा है तो कोई डीजे बजा रहा है तो प्रशासन छिड़काव पर अपने दांव लगा रहा है लेकिन सभी के सभी मशीनरी फेल है।

 

पाकिस्तान से आए टिड्डी दलों के आगे सरकार भी घुटने टेकती नजर आ रही है, वहीं किसान के लिए ये किसी आपदा से कम नहीं। टिड्डी को सबसे विनाशकारी कीट माना जाता है जिसका अभी तक कोई पुख्ता समाधान नहीं निकाला जा सका है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इससे करोड़ों लोग प्रभावित हो सकते हैं, भुखमरी के हालात भी बन सकते हैं। वहीं इस नई आफत से विमानों के लिए भी परेशानी पैदा हो गई है।

 

डीजीसीए ने पायलटों को उड़ान भरते समय और उतरते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। पाकिस्तान के रास्ते देश में घुसे रेगिस्तानी टिड्डी ने इस राजस्थान का प्रकोप गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश तक फैल चुका है. यहां के किसान इस मुसीबत को हटाने के लिए कई तरह के इंतजाम कर रहे हैं लेकिन फिलहाल कोई राहत नहीं नजर आ रही है।

 

टिड्डी दल फसलों के लिए बेहद नुकसानदायक है। किसी क्षेत्र में एक वर्ग किमी में टिड्डी दल पहुंच जाए, तो हर दिन हजार से दो हजार लोगों का खाना खा लेता है, जिस क्षेत्र में टिड्डी दल पहुंचता है, वहां प्रजनन भी करता है। हालांकि, प्रजनन के लिए रेगिस्तानी भूमि ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है। अनुकूल परिस्थितियों में एक दल में करीब 8 करोड़ टिड्डियां होती हैं, जो हवा के रुख के साथ प्रतिदिन 150 किमी तक की यात्रा कर सकती हैं। टिड्डी दल अपने रास्ते में आने वाले सभी प्रकार की फसलों एवं गैर-फसलों को चट कर जाता है।

 

एक टिड्डी एक दिन में 2 ग्राम भोजन करती है लेकिन इसकी संख्या इतनी होती है कि कई लोगों के बराबर खाना खत्म हो सकता है। भारत में 26 साल बाद यह टिड्डियों का सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है। इससे पहले 1993 में टिड्डी दलों ने कई राज्यों में हमला किया था, जिससे करोड़ों रुपये की फसल बर्बाद हो गई थी। इतना ही नहीं हवा के रुख को देखते हुए टिड्डी दल से पूर्वी यूपी के किसान भी हैरान-परेशान हैं. वे खेतों में बैठकर रखवाली कर रहे हैं।

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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